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पंजाब में एनालॉग पनीर की बिक्री पर लगा बैन, सरकार का आदेश तुरंत प्रभाव से लागू

 Written By: Mangal Yadav
 Published : Aug 28, 2026 02:07 pm IST,  Updated : Aug 28, 2026 02:35 pm IST

पंजाब सरकार ने पूरे राज्य में एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के निर्माण, प्रोसेसिंग, तैयारी, पैकिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : ANI

पंजाब सरकार ने पूरे राज्य में एनालॉग पनीर के उत्पादन, बिक्री और भंडारण पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। पंजाब के खाद्य एवं औषधि प्रशासन की कमिश्नर कंवल प्रीत बरार द्वारा जारी यह आदेश तुरंत लागू हो गया है और जारी होने की तारीख से एक साल तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि इसे कानून के अनुसार रद्द, संशोधित या बढ़ाया न जाए। 

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) के साथ धारा 18 और 29 के तहत जारी इस आदेश में कहा गया है कि एनालॉग पनीर, नॉन-डेयरी पनीर वीगन पनीर, सिंथेटिक पनीर और प्लांट-बेस्ड पनीर जैसे नामों से पहचाने जाने वाले उत्पादों का निर्माण, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री की जा रही थी, जबकि उन्हें पनीर के रूप में दिखाया या बेचा जा रहा था। आदेश में यह भी कहा गया है कि पनीर/छैना बनाने, पैक करने, स्टोर करने, बांटने या बेचने वाले हर फूड बिजनेस ऑपरेटर को यह पक्का करना होगा कि हर पैकेज पर 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लेबलिंग एंड डिस्प्ले) रेगुलेशंस, 2020' के तहत ज़रूरी जानकारी लिखी हो।

जांच में 42 प्रतिशत सैंपल फेल

जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल, 2025 और 31 मार्च, 2026 के बीच, पूरे पंजाब से पनीर, डेयरी एनालॉग के नमूने जांच के लिए खाद्य प्रयोगशाला में भेजे गए थे। इनमें से अब तक 512 नमूनों की जांच की गई और जांचे गए नमूनों में से 215 नमूने (42%) मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इनमें 156 घटिया क्वालिटी वाले और 59 असुरक्षित सैंपल शामिल थे। आदेश में कहा गया है कि जांचे गए सैंपल के एक बड़े हिस्से में ब्यूटिरो-रिफ्रैक्टोमीटर (BR) रीडिंग दूध की वसा के लिए तय सीमा से बाहर थी, जिससे पता चलता है कि इसमें ऐसी वनस्पति (बाहरी) वसा मिलाई गई थी या असली वसा की जगह उसका इस्तेमाल किया गया था, जो दूध में प्राकृतिक रूप से नहीं होती। इस वजह से एक्ट के प्रावधानों के तहत यह खाद्य पदार्थ असुरक्षित और गलत लेबल वाला (misbranded) माना गया। 

सरकार ने कहा कि एक साल तक लगातार सख्ती, निगरानी और सैंपलिंग के साथ-साथ जागरूकता और लेबलिंग के उपाय करने के बावजूद, नियमों के मुताबिक न होने वाले पनीर और असली पनीर की जगह वेजिटेबल-फैट एनालॉग के इस्तेमाल के मामलों में कोई खास सुधार नहीं दिखा। इसलिए इन पर बैन लगाया जाता है। बता दें कि एनालॉग पनीर सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। पंजाब से पहले महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश में भी इसे बेचने पर पाबंदी है।

इनपुट- एएनआई

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