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'राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाने पर की जाए गंभीरता से चर्चा', भाजपा के राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल ने उठाई ये मांग

 Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Aug 30, 2026 11:19 pm IST,  Updated : Aug 30, 2026 11:26 pm IST

अशोक कुमार मित्तल ने कहा कि पुरुषों से संबंधित सामाजिक, कानूनी और पारिवारिक मामलों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। साथ ही सरकार से राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाए जाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा करने की अपील की है।

राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल- India TV Hindi
राज्यसभा सांसद अशोक कुमार मित्तल Image Source : PTI

अब देश में राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाए जाने की भी मांग तेजी से उठने लगी है। भाजपा के राज्यसभा सांसद ने ये मांग उठाई है। राज्यसभा सदस्य अशोक कुमार मित्तल ने पुरुषों से जुड़े मुद्दों का व्यवस्थित अध्ययन करने के लिए शोधकर्ताओं, कानूनी विशेषज्ञों, परामर्शदाताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नीति निर्माताओं को साथ लेकर 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' बनाने के लिए देशभर में गंभीर चर्चा की मांग की है। 

पुरुषों की हत्या और आत्महत्या में आई तेजी

राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाए जाने को लेकर उन्होंने चंडीगढ़ के एक कार्यक्रम में यह बात कही है, जिसमें भारत में पुरुषों की हत्या और आत्महत्या के मामलों पर आधारित एक रिपोर्ट जारी की गई। मित्तल ने कहा कि यह चर्चा पुरुषों और महिलाओं के बीच मुकाबला खड़ा करने के लिए नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए होनी चाहिए कि हर नागरिक की वास्तविक चिंताओं को सुना जाए। 

कुछ आवाजें अनसुनी रह जाती हैं

भाजपा नेता मित्तल ने कहा, 'अगर कुछ आवाजें अनसुनी रह जाती हैं तो क्या सच्चा न्याय संभव है? यह किसी के अधिकार छीनने का सवाल नहीं है और निश्चित रूप से महिलाओं के खिलाफ खड़े होने का सवाल भी नहीं है। भारत ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण प्रगति की है और यह प्रगति जारी रहनी चाहिए। लेकिन न्याय की इस यात्रा में पुरुषों से जुड़ी वास्तविक चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हमें इन मुद्दों पर गंभीर, संवेदनशील और संस्थागत चर्चा की जरूरत है।' 

इस रिपोर्ट का किया गया जिक्र

एकम न्याय फाउंडेशन की रिपोर्ट 'हसबेंड मर्डर बाय वाइफ एंड सुसाइड बाय मेन: अ रिसर्च रिपोर्ट एंड एनालिसिस ऑन इंसिडेंट्स रिपोर्टेड इन द मीडिया इन द ईयर्स 2024 एंड 2025' में वर्ष 2024 में पति या साथी की हत्या के 244 मामलों और वर्ष 2025 में 419 मामलों का दस्तावेजीकरण किया गया है। इसके अलावा साल 2024 में 277 और साल 2025 में आत्महत्या के 426 मामले दर्ज किए गए हैं।

पहले भी उठा जा चुकी है मांग

बता दें कि ये कोई पहली बार नहीं हैं कि राष्ट्रीय पुरुष आयोग को बनाए जाने की मांग उठी है। इसके पहले भी कई सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रीय पुरुष आयोग बनाए जाने की मांग उठाई है।  (भाषा के इनपुट के साथ)

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