1. Hindi News
  2. राजस्थान
  3. स्कूल में भटककर आया भालू का बच्चा, स्टूडेंट ने खिलाया टिफिन में खाना; 6 दिन बाद मां को देखते ही कूद कर पीठ पर चढ़ा

स्कूल में भटककर आया भालू का बच्चा, स्टूडेंट ने खिलाया टिफिन में खाना; 6 दिन बाद मां को देखते ही कूद कर पीठ पर चढ़ा

 Published : Apr 01, 2025 11:22 am IST,  Updated : Apr 01, 2025 11:25 am IST

स्कूल में छात्रों को भालू का यह बच्चा घूमते हुए मिला था। इसके बाद वन्य जीव विभाग इसकी मां से मिलाने के लिए जतन करने में जुट गया था। रविवार को 6 दिन बाद अपनी मां से मिला तो इस दौरान शीशू भालू दौड़ता हुआ गया और मां की पीठ पर चढ़ गया।

bear cub- India TV Hindi
स्कूल में पहुंचा था भालू का बच्चा। Image Source : SOCIAL MEDIA

राजस्थान के कोटा में वनकर्मियों ने अपनी मां से बिछड़कर स्कूल में भटककर पहुंचे एक महीने के भालू के बच्चे को उसकी मां से मिला दिया है। रविवार को 6 दिन बाद अपनी मां से मिला तो इस दौरान शीशू भालू दौड़ता हुआ गया और मां की पीठ पर चढ़ गया। कोटा के उप वन संरक्षक अनुराग भटनागर ने सोमवार को इस हृदयस्पर्शी घटना का जिक्र करते हुए बताया कि भालू के बच्चे को पिछले सोमवार को शंभूपुरा के वरिष्ठ राजकीय विद्यालय के कर्मियों ने सौंपा था। चूंकि शावक को जंगल में छोड़ना जोखिम भरा था, इसलिए उसे अभेड़ा जैविक उद्यान में आश्रय देने का निर्णय लिया गया तथा उसकी मां की तलाश के लिए कदम उठाए गए।

स्कूल में छात्रों को भालू का यह बच्चा घूमते हुए मिला था। बच्चों ने इसे टिफिन में खाना भी खिलाया था। इसके बाद वन्य जीव विभाग इसकी मां से मिलाने के लिए जतन करने में जुट गया था। भटनागर ने कहा, ‘‘पशु चिकित्सक ने पाया कि बच्चा भालू स्वस्थ है। उसे जैविक पार्क में रखा गया, जहां वनकर्मियों ने उसकी स्थिति पर नजर रखी और उसे नियमित रूप से भोजन दिया।’’

जंगल में ध्वनि रिकॉर्डिंग बजाई गई

इस बीच, वनपाल बुधराम जाट के नेतृत्व में एक अलग टीम को सोमवार से शनिवार तक हर रात शंभूपुरा के आसपास संभावित स्थानों पर मादा भालू की तलाश के लिए तैनात किया गया। मादा भालू को उसके बच्चे की ओर आकर्षित करने के लिए जंगल में ध्वनि रिकॉर्डिंग बजाई गई। हालांकि, उसकी मां का पता लगाने के सभी प्रयास निरर्थक साबित हुए और विशेषज्ञों के सुझाव पर यह निर्णय लिया गया कि क्षेत्र में भालुओं के संभावित मार्ग पर 150 ‘कैमरा ट्रैप’ लगाए जाएंगे। कैमरा ट्रैप गति और ताप सेंसर से सुसज्जित होते हैं तथा इनका उपयोग वन्यजीव गतिविधियों के चित्र या वीडियो बनाने के लिए किया जाता है।

मंदिर के पुजारी ने की मदद

हालांकि, रविवार शाम को एक सफलता तब मिली जब बुधराम जाट को सूचना मिली कि एक भालू और उसका बच्चा शंभूपुरा से लगभग 10 किलोमीटर दूर श्योपुरिया गांव में एक मंदिर के पास एक मांद में रह रहे थे। भटनागर ने कहा, ‘‘शाम करीब 5.45 बजे जब सूचना मिली तो जाट उस समय अपने बाल कटवाने के लिए सलून में थे। उनके बाल तब तक आधे ही कटे थे, लेकिन वह पूरे बाल कटवाए बिना ही तत्काल संबंधित स्थान पर पहुंचे।’’

वनपाल बुधराम जाट ने बताया कि श्योपुरिया गांव के मंदिर के पुजारी ने उन्हें मंदिर के पास एक मांद में एक मादा भालू के अपने बच्चे के साथ रहने की सूचना दी थी। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्हें इस बारे में पता चला, वह वन विभाग की टीम के साथ रात करीब आठ बजे बच्चे को लेकर बताए गए स्थान पर पहुंचे। चूंकि भालुओं की सुनने और सूंघने की क्षमता दृष्टि से अधिक मजबूत होती है, इसलिए वन विभाग की टीम ने मंदिर के पास मांद से लगभग 50 फुट दूर बॉक्स को खोलकर रख दिया और इंतजार करने लगी।

पीठ पर बिठाकर ले गई मादा भालू

शिशु भालू ने कुछ देर तक जानी-पहचानी गंध और आवाजें महसूस कीं और फिर वह बॉक्स से बाहर कूदकर मंदिर के पास बनी मांद की ओर भाग गया। मादा भालू भी अपने बच्चे के पास आती दिखी। उप वन संरक्षक ने कहा कि जब मां और बच्चा दोनों करीब आए, तो मां ने कुछ सेकंड तक अपने बच्चे की पहचान की और फिर उसे पीठ पर बैठाकर अपनी मांद में चली गई। भटनागर ने सफल प्रयास के बाद कहा, ‘‘पूरी वन टीम के लिए यह खुशी और संतुष्टि का क्षण था, बच्चे को सफलतापूर्वक मां के साथ मिला दिया गया।’’ (भाषा इनपुट्स के साथ)

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। राजस्थान से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।