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जिस IAS अफसर को आजम खान ने कहा था 'तनखैय्या', वही करेगा जौहर यूनिवर्सिटी के भविष्य का फैसला!

 Written By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX
 Published : Jul 18, 2026 11:52 am IST,  Updated : Jul 18, 2026 11:52 am IST

रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण नोटिस मामले में अपील होने पर सुनवाई RDA अध्यक्ष और मंडलायुक्त आन्जनेय सिंह करेंगे, जिन्हें 2019 में आजम खान ने 'तनखैय्या' कहा था। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर क्या कार्रवाई होती है।

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आजम खान और आन्जनेय सिंह। Image Source : PTI

Highlights

  • आन्जनेय सिंह की अध्यक्षता वाला आरडीए सुनेगा जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी अपील।
  • ध्वस्तीकरण नोटिस पर सियासत तेज, सपा सांसद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सक्रिय।
  • विशेषज्ञों के अनुसार नक्शे नियमित कराने में भारी शुल्क चुकाना पड़ सकता है।

रामपुर: समय के साथ परिस्थितियां कैसे बदल जाती हैं, इसकी मिसाल रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी के मामले में देखने को मिल रही है। 2019 में जिस IAS अधिकारी आन्जनेय सिंह को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने 'तनखैय्या' कहा था, अब उसी अधिकारी के सामने जौहर यूनिवर्सिटी के ध्वस्तीकरण नोटिस से जुड़े मामले की अपील आएगी। ऐसे में यूनिवर्सिटी का भविष्य काफी हद तक उनकी अध्यक्षता वाले रामपुर विकास प्राधिकरण यानी कि RDA के फैसले पर निर्भर करेगा। बता दें कि जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों पर बुलडोजर एक्शन की तलवार लटकी है

रामपुर जाएंगे सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी

बता दें कि जौहर यूनिवर्सिटी को मिले ध्वस्तीकरण नोटिस के बाद मामला लगातार चर्चा में है। यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई की आशंका के बीच अब इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी ने रामपुर पहुंचकर जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने की कोशिश करने का ऐलान किया है। नदवी ने कहा है कि वह रामपुर में हिंदू और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे और यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। दूसरी ओर, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी जौहर यूनिवर्सिटी को जारी ध्वस्तीकरण नोटिस को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

आजम खान ने आन्जनेय को कहा था 'तनखैय्या'

इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया है। 2019 में तत्कालीन रामपुर जिलाधिकारी रहे IAS अधिकारी आन्जनेय सिंह को लेकर आजम खान ने सार्वजनिक रूप से तीखी टिप्पणी की थी। उस समय उन्होंने उन्हें 'तनखैय्या' कहा था और उनके बारे में विवादित बयान भी दिया था। अब वही आन्जनेय सिंह मुरादाबाद मंडल के आयुक्त यानी कि कमिश्नर हैं और रामपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं। जौहर यूनिवर्सिटी को मिले ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ यदि आजम खान अपील करते हैं तो उसकी सुनवाई RDA के अध्यक्ष के रूप में आन्जनेय कुमार सिंह के समक्ष होगी।

यूनिवर्सिटी को बचाने के तीन विकल्प मौजूद

जानकारों का कहना है कि यदि जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए भवनों के नक्शे नियमित कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती है तो इस पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आ सकता है। हालांकि यह आधिकारिक अनुमान नहीं है, बल्कि विषय से जुड़े जानकारों का आकलन बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, आजम खान के सामने फिलहाल तीन प्रमुख कानूनी और प्रशासनिक विकल्प हैं:

  1. पहला, रामपुर विकास प्राधिकरण से यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों के नक्शे कंपाउंडिंग के माध्यम से पास कराना। इसके लिए विकास शुल्क, लेबर सेस, कंपाउंडिंग फीस और इम्पैक्ट फीस समेत कई तरह के शुल्क जमा करने पड़ सकते हैं।
  2. दूसरा विकल्प हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना है। हालांकि जानकारों का कहना है कि यदि भवनों के नक्शों को नियमित कराना होगा तो अंततः प्रक्रिया रामपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से ही पूरी करनी पड़ेगी।
  3. तीसरा विकल्प यह है कि आजम खान मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर और आरडीए अध्यक्ष आन्जनेय सिंह के समक्ष आवेदन देकर ध्वस्तीकरण आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध करें।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस मामले में आगे क्या प्रशासनिक और कानूनी फैसला होता है।

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