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''राम मंदिर चढ़ावा चोरी से ध्यान हटाने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाया गया'', सपा सांसद नदवी का बीजेपी पर हमला

 Reported By: Shoaib Raza Written By: Mangal Yadav
 Published : Jul 17, 2026 03:59 pm IST,  Updated : Jul 17, 2026 04:58 pm IST

जौहर यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी से ध्यान भटकाने के लिए इस मुद्दे को हवा दी रही है।

सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी - India TV Hindi
सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी। फाइल Image Source : PTI

आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन की तलवार लटक रही है। रामपुर विकास प्राधिकरण ने जौहर यूनिवर्सिटी को नोटिस दिया है कि वे 38 बिल्डिंग को 15 दिन के अंदर गिरा दें, अन्यथा प्रशासन कानूनी करेगा। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए रामपुर से सपा सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी ने शुक्रवार को कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी से ध्यान हटाने के लिए जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा उठाया गया है। 

जौहर यूनिवर्सिटी को हर हाल में बचाएंगेः नदवी

इंडिया टीवी से बातचीत में मोहिबुल्लाह नदवी ने कहा कि मैं दिल्ली से रामपुर जा रहा हूं। लोगों से आज भी मेरी बात हुई। हिंदू और मुसलमान दोनों जौहर यूनिवर्सिटी को बचाएंगे। यूनिवर्सिटी बच्चों का भविष्य है। हम उसे कुछ नहीं होने देंगे। 

 सपा सांसद ने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी में बहुत सारे बच्चे पढ़ते हैं। यहां सभी धर्म और वर्ग से बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने यूनिवर्सिटी गिराने के आदेश को लेकर सत्ताधारी बीजेपी पर निशाना साधा है।  

यहां देखें सपा सांसद का इंटरव्यू

क्या है पूरा मामला

अभी हाल ही में रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) ने समाजवादी पार्टी नेता आज़म खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने का आदेश दिया है। प्राधिकरण ने पाया कि ये इमारतें बिना मंज़ूर बिल्डिंग प्लान के बनाई गई थीं। यह आदेश उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत सुनवाई और रिकॉर्ड की जांच के बाद जारी किया गया। सुनवाई के दौरान प्राधिकरण ने निष्कर्ष निकाला कि ये निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम का उल्लंघन करते हैं और इसलिए इन्हें गिराया जाना चाहिए। आरोप है कि जौहर यूनिवर्सिटी में 38 इमारतों को बिना मैप पास करवाए ही बनाया गया। यह भी आरोप हैं कि इमरजेंसी जैसी कंडीशन में जौहर यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स और स्टाफ की जिंदगी को खतरा है। जांच में पाया गया कि फायर सेफ्टी नॉर्म्स को फॉलो नहीं किया गया। 

हाल के वर्षों में यह यूनिवर्सिटी जमीन पर कब्ज़े और लीज़ के नियमों के उल्लंघन के आरोपों को लेकर कानूनी विवादों में फंसी रही है और उत्तर प्रदेश सरकार ने कैंपस के बड़े हिस्से को वापस अपने कब्ज़े में ले लिया है। इस साल की शुरुआत में आजम खान और उनके परिवार ने यूनिवर्सिटी के गवर्निंग ट्रस्ट से औपचारिक रूप से इस्तीफ़ा दे दिया था। आजम खान मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के चांसलर और आजीवन अध्यक्ष थे, जोकि इस यूनिवर्सिटी को चलाता है।

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