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"तो आप अपने नाम से डॉक्टर हटा लो", रेप पीड़िता बच्ची की मौत पर SC की तीखी टिप्पणी, जानें क्या कहा?

 Reported By: Atul Bhatia Written By: Kajal Kumari
 Published : Jul 17, 2026 03:44 pm IST,  Updated : Jul 17, 2026 04:37 pm IST

आपने उस बच्ची को इसलिए नजरअंदाज किया था क्योंकि वह गरीब थी, आपको अपने नाम से डॉक्टर शब्द ही हटा लेना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने अस्पतालों और डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए ये तीखी टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा बयान

सुप्रीम कोर्ट ने आज गाजियाबाद में रेप पीड़िता चार साल की मासूम बच्ची को भर्ती करने से इनकार करने वाले दो निजी अस्पतालों को कड़ी फटकार लगाई है। डॉक्टर के पेशे में निहित संवेदनशीलता नहीं दिखाने को लेकर भी तीखी आलोचना की। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने अस्पतालों और डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए कहा कि आपने उस बच्ची को इसलिए नजरअंदाज किया था क्योंकि वह गरीब थी। ऐसा करना मानवता को शर्मसार करने वाली आदत है और आपको अपने नाम से डॉक्टर शब्द ही हटा लेना चाहिए। बता दें कि गाजियाबाद में रेप पीड़िता चार साल की बच्ची की मौत हो गई। उस बच्ची को प्राइवेट अस्पतालों ने एडमिट करने से मना कर दिया था और इस वजह से उसे मृत घोषित कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने उन निजी अस्पतालों को फटकार लगाई, जिन पर गाज़ियाबाद में रेप और मर्डर की शिकार चार साल की बच्ची को शुरुआती इलाज ना देने का आरोप है। निजी अस्पतालों के डॉक्टरों पर CJI सूर्य कांत की तल्ख टिप्पणी सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा-अगर आप अपनी ड्यूटी नहीं निभाते हैं, तो आपको अपने नाम के साथ 'डॉक्टर' लिखने का कोई हक नहीं। अगर आपमें थोड़ी भी संवेदनशीलता होती, तो सुविधा न होने पर भी आप उस बच्ची को दूसरे अस्पताल ले जाते।


कोर्ट ने पूछे सवाल, क्या दिया आदेश?

  • क्या आपने इसलिए उसे नज़रअंदाज़ किया क्योंकि वह गरीब थी? 
  • क्या वह आपकी फीस नहीं दे सकती थी?'
  • सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों से कहा कि वे पीड़ित परिवार की मदद के लिए अपनी मर्ज़ी से दान दें, वरना उन पर जुर्माना लगाया जाएगा।

जानें क्या था पूरा मामला?

16 मार्च को एक शख्स ने चार साल की बच्ची को चॉकलेट दिलाने का लालच दिया था और उसे दूर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। आरोपी लड़की को बदहवास स्थिति में छोड़कर भाग गया था।  परिजनों ने बच्ची को खून से लथपथ पाया और बच्ची तब बेहोश थी। परिजन उसे इलाज के लिए दो प्राइवेट अस्पतालों में ले गए, लेकिन वहां उसे इलाज नहीं मिला। परिजन आखिर में सरकारी अस्पताल ले गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में कहा था कि इस घटना की सबसे बड़ी बात यह है कि अस्पतालों ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई, स्थानीय पुलिस ने भी परिजनों को महत्व नहीं दिया और केस दर्ज करने से इनकार करते रहे। इस मामले पर जब बवाल मचा तो पुलिस ने 17 मार्च को एफआईआर दर्ज की और 18 मार्च को आरोपी को गिरफ्तार किया गया। सबसे बड़ी बात ये है कि एफआईआर में पॉक्सो और सेक्शन 376 नहीं जोड़ा गया था।

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