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राहुल गांधी ने कहा, "कुछ समय पहले मैं कन्याकुमारी से कश्मीर तक पैदल गया था। रास्ते में लाखों युवाओं से मैं मिला था और मेरा एक ही सवाल होता था कि आप क्या करना चाहते हो? मुझे केवल 5 जवाब मिले कि हम इंजीनियर, डॉक्टर, वकील, IAS और फौजी बनना चाहते हैं। इसके बाद मेरे दिमाग में सवाल उठा कि देश के युवा देश का भविष्य हैं और हमारी शिक्षा प्रणाली हमारे युवाओं को हमेशा 5 ही रास्ते क्यों दिखाती है?"
छात्रों की खुदकुशी का मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने कहा, "यात्रा के बाद, जब मैंने शिक्षा व्यवस्था के बारे में थोड़ा और सोचना शुरू किया तो मन में सवाल उठे कि पब्लिक सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था क्यों खत्म हो गई? प्राइवेट सेक्टर की शिक्षा व्यवस्था इतनी महंगी क्यों है? भारत की शिक्षा व्यवस्था अपने बच्चों पर दबाव डालती है, उन्हें तनाव देती है, दबाती है और कुचल देती है, और यह देश के लिए अच्छा नहीं है। मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर काम करें ताकि यह पक्का किया जा सके कि इस भीड़ में, इस देश में किसी भी छात्र को कभी खुदकुशी करने का ख्याल न आए। यह बैठक इसी बारे में है। यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। यह भारत की शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने के बारे में है - कि भारत की शिक्षा व्यवस्था में क्या गलत है और उसमें क्या सुधार करने की ज़रूरत है।"
गौरतलब है कि नीट की तैयारी के दौरान कई बार ये बात सामने आई है कि छात्रों ने प्रेशर के चलते खुदकुशी की। ऐसे में ये एक चिंता का विषय है, जिस पर बात होनी जरूरी है। छात्रों को समझाना जरूरी है कि फेल होने या एग्जाम लेट होने से अपनी जान देना सही स्टेप नहीं है। समस्या का सामना करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।