नागौर: वर्ष 2015 के बहुचर्चित राजस्थान के डांगावास हत्याकांड मामले में बुधवार को SC/ST स्पेशल कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। करीब 11 साल तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने पूरे नागौर जिले सहित आसपास के क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बना दिया।
23 बीघा जमीन को लेकर हुआ था विवाद
यह मामला मई 2015 में नागौर जिले के डांगावास गांव में जमीन विवाद को लेकर हुई हिंसक घटना से जुड़ा था, जिसमें 6 लोगों की दर्दनाक हत्या हो गई थी। करीब 23 बीघा जमीन को लेकर हुए विवाद में 5 दलितों की हत्या हुई थी। वहीं, दूसरे पक्ष से रामपाल गोसाईं नाम के शख्स की गोली लगने से मौत हो गई थी। घटना के बाद मामला प्रदेशभर में सुर्खियों में रहा और इसकी सुनवाई SC/ST स्पेशल कोर्ट में चल रही थी। मेड़ता कस्बे में स्थित SC/ST स्पेशल कोर्ट के जज आशीष बिजारणिया ने 11 साल पुराने इस मामले में बुधवार को फैसला सुनाया।
'CBI ने सही ढंग से नहीं की थी जांच'
कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष उन आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में नाकाम रहा, जिन पर सीबीआई ने आरोप लगाए थे। अभियोजन पक्ष ने 82 गवाह पेश किए जबकि शिकायतकर्ता ने 8 और गवाह सामने रखे। कोर्ट ने पाया कि इनमें से ज्यादातर गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके।
आरोपियों के वकील ने कहा, "अदालत ने पाया कि CBI ने अपनी जांच सही ढंग से नहीं की थी और अभियोजन पक्ष इस मामले में किसी भी आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा।"
फैसला सुनाए जाने के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता कमल आचार्य, महिपाल लटियाल, महेंद्र चौधरी एवं बाबूलाल गोरा ने मीडिया को फैसले की जानकारी दी। अधिवक्ताओं ने न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर अपना निर्णय सुनाया है।
डांगावास गांव में खुशी का माहौल
कोर्ट के फैसले के बाद डांगावास गांव में खुशी का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर प्रसन्नता व्यक्त की। लंबे समय से फैसले का इंतजार कर रहे लोगों में निर्णय को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। लगभग 11 वर्षों बाद आए इस फैसले की पूरे क्षेत्र में दिनभर चर्चा होती रही।
'सभी बरी तो हत्या किसने की?'
उधर, पीड़ित पक्ष के गोविंद मेघवाल ने कहा कि स्थानीय अदालत के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा, "अगर सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है, तो हमारे पांच लोगों की हत्या किसने की? हम हाईकोर्ट का रुख करेंगे।"
क्या था पूरा मामला?
डांगावास में 14 मई 2015 को 23 बीघा जमीन के विवाद को लेकर दो गुटों के बीच हिंसा हुई थी, जिसमें रतनराम मेघवाल, पोखरराम मेघवाल, पांचाराम मेघवाल, खेमाराम मेघवाल और गणपतराम मेघवाल की मौत हो गई थी। दूसरे पक्ष के एक व्यक्ति रामपाल गोसाईं की भी जान चली गई थी। आरोप है कि पीड़ितों में से तीन लोगों को ट्रैक्टर से कुचल दिया गया था। इस मामले की जांच CBI को सौंपी गई थी। बचाव पक्ष के वकील महेंद्र चौधरी ने कहा कि विवाद जमीन के एक सौदे से शुरू हुआ, जिसमें खरीदार ने दाखिल खारिज नहीं कराया, जिससे कब्जे को लेकर झगड़ा हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया। चौधरी ने कहा कि आरोपी घटना में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे।
(रिपोर्ट- सुशील दिवाकर)
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