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'शादी की उम्र न हुई हो, तब भी 'लिव-इन’ में रह सकते हैं बालिग', राजस्थान हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Dec 05, 2025 12:06 pm IST,  Updated : Dec 05, 2025 12:16 pm IST

प्रेमी जोड़े के मामले में सुनवाई करते हुए राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह हर व्यक्ति के जीवन और आजादी की रक्षा करे।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : FREEPIK

राजस्थान हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोगों को लेकर अहम टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि दो बालिग व्यक्ति अपनी मर्जी से ‘लिव-इन’ में रह सकते हैं, भले ही अभी उनकी शादी के लिए जरूरी कानूनी उम्र न हुई हो। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि किसी के संवैधानिक अधिकारों को इस आधार पर कम नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अनूप ढांड ने कोटा निवासी 18 वर्षीय महिला और 19 वर्षीय पुरुष द्वारा सुरक्षा के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। 

प्रेमी जोड़े ने बनवाया लिव-इन एग्रीमेंट

महिला और पुरुष ने कोर्ट को बताया कि वे अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं। इस आदेश की प्रति गुरुवार को उपलब्ध हुई। इस प्रेमी जोड़े ने कहा कि उन्होंने 27 अक्टूबर 2025 को ‘लिव-इन एग्रीमेंट’ किया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि महिला के परिवार ने इस रिश्ते का विरोध किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने कोटा पुलिस में इस बारे में शिकायत की तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

युवक की उम्र नहीं हुई 21 साल

याचिका का विरोध करते हुए लोक अभियोजक विवेक चौधरी ने कहा कि चूंकि युवक की उम्र 21 साल नहीं हुई है, जो पुरुषों के लिए शादी की न्यूनतम कानूनी उम्र है तो उसे ‘लिव-इन’ में रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। 

सरकार की है संवैधानिक जिम्मेदारी

कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत जीवन और निजी आजादी के अधिकार को सिर्फ़ इसलिए नहीं नकारा जा सकता कि याचिकर्ताओं की शादी के लिए जरूरी कानूनी उम्र नहीं हुई है। न्यायाधीश ने आदेश में कहा, ‘सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह हर व्यक्ति के जीवन और आजादी की रक्षा करे।’ 

भारतीय कानून में लिन-इन पर रोक नहीं

उन्होंने कहा कि भारतीय कानून के तहत ‘लिव-इन’ पर रोक नहीं है और न ही इसे अपराध माना जाता है। उन्होंने भीलवाड़ा और जोधपुर (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक को याचिका में उल्लेखित तथ्यों का सत्यापन करने व जरूरत पड़ने पर युगल को जरूरी सुरक्षा देने का निर्देश दिया। (भाषा के इनपुट के साथ)

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