राजस्थान में नागौर के बड़ली में भीषण ब्लास्ट हुआ है। इस धमाके में 2 लोगों की मौके पर मौत की खबर है। यहां पटाखों में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि लगभग 2 किलोमीटर दूर तक इस धमाके की गूंज सुनाई दी। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीमें और कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। आग पर काबू पाने के साथ राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
करीब 2 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी धमाके की आवाज
बता दें कि नागौर के बड़ली क्षेत्र में पटाखों में लगी आग के बाद भीषण ब्लास्ट होने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत होने की सूचना है। धमाका इतना तेज था कि इसकी गूंज करीब 2 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। हादसे के कारणों और नुकसान को लेकर आकलन किया जा रहा है।
शॉर्ट सर्किट की वजह से आग की आशंका
पुलिस अधिकारी ने बताया कि पटाखा फैक्ट्री के पास बिजली का खंभा था। आशंका है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से ये आग लगी है। FSL टीम यहां जांच करेगी और फिर पता चल पाएगा कि यहां क्या हो रहा था। किस वजह से आग लगी। इस घटना के जो भी जिम्मेदार लोग हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हाल में श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर हुआ धमाका
जान लें कि हाल ही में राजस्थान के श्रीगंगानगर में रेलवे ट्रैक पर धमाका हुआ था। इस ब्लास्ट मामले की जांच तेज हो गई है। राजस्थान ATS, इंटेलिजेंस टीम, NIA, IB और मिलिट्री इंटेलिजेंस, फॉरेंसिक टीम के अलावा दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और पंजाब पुलिस भी अपने स्तर पर इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। वहीं, ब्लास्ट के पैटर्न और विस्फोटक को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। घटनास्थल से किसी विस्फोटक, केमिकल, तार या डेटोनेटर का न मिलना और धमाके के वक्त किसी ट्रेन का ट्रैक पर न होना जांच अधिकारियों के लिए एक उलझी हुई पहेली बन गया है।
साजिश के तार कनेक्ट करने की कोशिश कर रहीं एजेंसियां
इस पूरे मामले में एजेंसियां बॉर्डर पर से साजिश के तार कनेक्ट करने की कोशिश कर रही हैं। ISI और शहजाद भट्टी नेटवर्क की पुरानी साजिशों की भी जांच की जा रही है। इसके साथ ही आतंकी फरतुल्लाह गौरी भी पहले रेलवे ट्रैक को उड़ाने की धमकी दे चुका है। वहीं, खुरासान मॉड्यूल से जुड़े लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
ट्रेन गुजरने के 40 मिनट बाद हुआ ब्लास्ट
RPF के आईजी ज्योति कुमार सतीजा ने बताया कि जिस इलाके में ये ब्लास्ट हुआ, उसके आसपास CCTV कैमरे नहीं होने की वजह से संदिग्धों का मूवमेंट पता करना बड़ी चुनौती है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि जिस ट्रैक पर विस्फोट हुआ, वहां आखिरी ट्रेन धमाके से करीब 40 मिनट से एक घंटे पहले गुजरी थी। इसके बाद अगली ट्रेन अगले दिन सुबह गुजरनी थी यानी धमाके के समय उस ट्रैक पर कोई ट्रेन मौजूद नहीं थी।
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