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UGC के विवादित नियमों पर फिर विचार करेगी केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट को बताया; समीक्षा के लिए बनाने जा रही कमेटी

 Reported By: Atul Bhatia,  Written By: Malaika Imam
 Published : Nov 05, 2026 01:52 pm IST,  Updated : Nov 05, 2026 02:16 pm IST

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया कि UGC के विवादित नियमों की दोबारा समीक्षा के लिए कमेटी बनाने जा रही है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा की जाएगी।

Supreme court- India TV Hindi
सुप्रीम कोर्ट Image Source : FILE (PTI)

उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए लाए गए UGC के विवादित नियमों पर केंद्र सरकार एक बार फिर विचार करेगी। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह UGC के विवादित नियमों पर दोबारा विचार कर रही है। सरकार इन नियमों की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाने जा रही है।

सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सभी वर्ग के छात्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा, ताकि  किसी भी वर्ग के छात्र खुद को असंतुष्ट या डरा हुआ महसूस न करें। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा करना जरूरी है। नियम बनाते वक्त देश की युवा पीढ़ी का ध्यान रखा जाना चाहिए। CJI ने कहा कि हर छात्र के हितों की रक्षा की जाएगी। युवा पीढ़ी के भविष्य और उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

पिछली सुनवाई में SC ने नियमों के अमल पर लगाई थी रोक

कोर्ट में दायर याचिकाओं में कहा गया है कि यह नियम भेदभावपूर्ण और सामान्य वर्ग के लोगों को मौलिक अधिकार का हनन करने वाले है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के अमल पर रोक लगा दी थी। कोर्ट का मानना था कि इन नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है और इन नियमों का दुरुपयोग हो सकता है। कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया था कि वह इन नियमों पर विचार के लिए एक नई कमेटी का गठन करें।

क्या है मामला?

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पहले रोहित वेमुला केस पर सुनवाई करते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति के आधार पर भेदभाव को समाप्त करने के लिए नियम-कानून बनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद यूजीसी ने नए नियम लाए। इन नियमों के तहत सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेज में समता कमेटी बनाना अनिवार्य किया गया। SC ST और OBC छात्र इस कमेटी के सामने जातिगत भेदभाव के खिलाफ शिकायत कर सकते हैं। SC ST वर्ग के छात्रों को पहले भी शिकायत का अधिकार था, लेकिन नए नियम में OBC वर्ग को भी शामिल किया गया। वहीं, कमेटी होगी उसमें SC ST और OBC वर्ग के प्रतिनिधि होने चाहिए। हालांकि, इस कमेटी में सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधि हो ऐसा जरूरी नहीं है। विवाद का दूसरा कारण है कि पहले ऐसा प्रावधान था कि अगर कोई झूठी शिकायत करता है तो उसके खिलाफ एक्शन होगा। हालांकि, नए नियमों में यूजीसी ने ऐसा प्रावधान खत्म कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार ने UGC एक्ट में बदलाव किए थे। यूजीसी की ओर से नए नियम बीते 13 जनवरी को जारी किए गए थे। हालांकि, इन नियमों को लेकर सवर्ण वर्ग के छात्रों में जबरदस्त नाराजगी फैल गई। विरोध करने वालों का तर्क है कि यूजीसी के एक्ट में भेदभाव की जो परिभाषा दी गई है, उससे ऐसा लगता जैसे जातिगत भेदभाव सिर्फ  SC, ST और OBC के साथ ही होता है। सामान्य वर्ग के छात्रों को कोई संस्थागत संरक्षण नहीं दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने ने मामले की सुनवाई करते हुए यूजीसी के नियमों पर फिलहाल रोक लगाई है।

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