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राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव का ऐलान, 15 नवंबर तक पूरी होगी चुनाव प्रक्रिया

 Reported By: Manish Bhattacharya Written By: Niraj Kumar
 Published : Jul 20, 2026 05:42 pm IST,  Updated : Jul 20, 2026 06:33 pm IST

राजस्थान में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पंचायत और नगर निकाय चुनावों का बिगुल बज गया है। राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनाव कार्यक्रम पेश किया, जिसके बाद अदालत ने तय समय-सीमा में चुनाव प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

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चुनाव Image Source : PTI

जयपुर: राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव का आखिरकार ऐलान हो गया है। लंबे समय से लंबित इन चुनावों को लेकर चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया। राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनावी कार्यक्रम की जानकारी पेश की। इसके बाद अदालत ने इस मामले से जुड़ी याचिका का निस्तारण कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार और राज्य चुनाव आयोग को तय समय-सीमा के भीतर ही पूरी चुनाव प्रक्रिया संपन्न करनी होगी और अब किसी भी तरह का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

15 नवंबर तक पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न 

चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सीटों के रिजर्वेशन को लेकर गठित ओबीसी आयोग 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगा। इसके बाद 6 से 15 अगस्त के बीच सीटों का रिजर्वेशन और लॉटरी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 17 अगस्त को नगर निकायों के चुनाव का डिटेल्स कार्यक्रम जारी किया जाएगा। जबकि 22 अगस्त से नामांकन भरने की प्रक्रिया शुरू होगी। नगर निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया 20 सितंबर तक पूरी कर ली जाएगी। वहीं, पंचायत चुनावों की बात करें तो इसकीअधिसूचना 23 सितंबर को जारी होगी और 15 नवंबर तक पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न कर ली जाएगी।

चुनाव तय समय में कराना राज्य सरकार और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी

इस मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस एसपी शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने की। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ तौर पर कहा कि चुनाव तय समय में कराना राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।

कांग्रेस के पूर्व विधायक ने दाखिल की थी याचिका

बता दें कि इस संबंध में याचिका कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा और अन्य की ओर से दायर की गई थी। फैसले का स्वागत करते हुए संयम लोढ़ा ने कहा कि सरकार एक देश, एक चुनाव की बात करती है, तो उसे पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव भी एक साथ कराने चाहिए थे। उनका आरोप था कि सरकार चुनाव कराने के पक्ष में नहीं थी, लेकिन हाईकोर्ट की सख्ती के कारण उसे चुनाव कार्यक्रम घोषित करना पड़ा।

गहलोत ने साधा था सरकार पर निशाना

इससे पहले राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा चुनाव कराने की नहीं है। गहलोत ने एक बयान में कहा, ''राज्य सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या हो सकती है कि पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही कथित जानबूझकर की देरी पर हाईकोर्ट को यह तक कहना पड़ रहा है कि 'आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो बताए, न्यायाधीश करवा देंगे।'' उन्होंने कहा कि यह सरकार की गंभीर प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग का यह कथन बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि पंचायती राज विभाग को छह पत्र लिखने के बावजूद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के आरक्षण से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

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