जोधपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय समन्वय बैठक रविवार को संपन्न हो गई। इस बैठक में संघ के विभिन्न अनुषांगिक संगठनों के राष्ट्रीय पदाधिकारियों, संगठन मंत्रियों और प्रमुख प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के अंतिम दिन राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आम्बेकर ने एक पत्रकार वार्ता को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने बैठक में हुई चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया।
महिला सहभागिता और सशक्तिकरण
बैठक में संघ के विभिन्न कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। सुनील आम्बेकर ने बताया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे 887 कार्यक्रमों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। यह एक संकेत है कि देश के सभी क्षेत्रों में महिलाओं का सहभाग बढ़ रहा है, जो एक सकारात्मक बदलाव है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर मंथन
इस बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन पर गहन मंथन हुआ। शिक्षा से जुड़े संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर किए गए प्रयासों पर चर्चा की। इस दौरान NCERT और अन्य शैक्षणिक संस्थानों को पाठ्यपुस्तक लेखन में सहयोग देने का निर्णय लिया गया। यह भी सहमति बनी कि शिक्षा के हर स्तर पर भारतीय भाषाओं, इतिहास और ज्ञान को सही दिशा में शामिल किया जाए, ताकि आम लोगों को उनकी अपनी भाषा में शिक्षा मिल सके।
सामाजिक चुनौतिया और कानून-व्यवस्था
आम्बेकर ने पंजाब और अन्य राज्यों की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पंजाब में बढ़ते मतांतरण और युवाओं में नशे के दुष्प्रभाव पर गहरी चिंता जताई। इसके अलावा, बंगाल में अवैध घुसपैठ, कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और हिंदुओं के लिए बढ़ते खतरे पर भी गंभीर चर्चा हुई। पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ती हिंसा और जातीय तनाव को कम करने के प्रयासों पर भी विचार किया गया, जिसमें मणिपुर के कुकी और मैतेई विवाद पर गृह मंत्रालय द्वारा हुए समझौते को शांति की दिशा में एक अच्छा संकेत माना गया।
सेवा कार्य और नक्सलवाद
बैठक में बाढ़ प्रभावित इलाकों में विभिन्न संगठनों द्वारा चलाए जा रहे राहत कार्यों की भी समीक्षा की गई। इसके साथ ही, वनवासी क्षेत्रों में नक्सली हमलों के कारण उत्पन्न समस्याओं पर भी चिंतन किया गया। यह बताया गया कि सरकार की लगातार कार्रवाई से हिंसा कम हुई है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक है। वनवासी कल्याण आश्रम जैसे संगठनों द्वारा इन क्षेत्रों में किए जा रहे कार्यों की सराहना की गई।
शताब्दी वर्ष और पंच परिवर्तन संकल्प
आगामी शताब्दी वर्ष के आयोजन में विभिन्न संगठनों की भागीदारी पर चर्चा हुई। इस दौरान पंच परिवर्तन संकल्प के तहत पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबंधन और नागरिक कर्तव्यों पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया। आम्बेकर ने यह भी बताया कि 2 अक्टूबर को नागपुर में पूज्य मोहन भागवत का उद्बोधन होगा और संघ की अगली वार्षिक बैठक जबलपुर में आयोजित होगी। यह बैठक इस निष्कर्ष के साथ संपन्न हुई कि देश और समाज सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे हैं, लेकिन अभी भी कई मुद्दों पर लगातार काम करने की आवश्यकता है।
(रिपोर्ट- चंद्रशेखर व्यास)
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