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फर्जी B.Ed डिग्री पर चल रहा था सरकारी नौकरी का खेल, विश्वविद्यालय के कुलपति समेत तीन गिरफ्तार

 Reported By: Manish Bhattacharya Written By: Amar Deep
 Published : Aug 25, 2026 08:18 pm IST,  Updated : Aug 25, 2026 08:18 pm IST

फर्जी डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय, सीहोर के कुलपति समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

कुलपति समेत तीन गिरफ्तार।- India TV Hindi
कुलपति समेत तीन गिरफ्तार। Image Source : PEXELS/REPRESENTATIVE IMAGE

जयपुर: राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के खिलाफ एसओजी की कार्रवाई में बड़ा खुलासा हुआ है। फर्जी और बैकडेटेड B.Ed. डिग्री के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने के मामले में श्री सत्य साईं विश्वविद्यालय, सीहोर के कुलपति समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। एसओजी ने कुलपति मुकेश तिवाड़ी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को 24 अगस्त को गिरफ्तार किया। तीनों को कोर्ट में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

कैसे हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा

मामला शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है। एसओजी के मुताबिक, अभ्यर्थी भारमल राम ने परीक्षा में अपनी जगह डमी अभ्यर्थी बैठाकर परीक्षा पास की और सरकारी शारीरिक शिक्षक की नौकरी हासिल कर ली। जांच में उसके द्वारा पेश की गई B.Ed. डिग्री के फर्जी और बैकडेट में जारी होने के तथ्य सामने आए।

जांच के दौरान विश्वविद्यालय से जुड़े रिकॉर्ड और कंप्यूटर डाटा जब्त किए गए। फॉरेंसिक ऑडिट में सामने आया कि भारमल राम के नाम से दो अलग-अलग फीस लेजर अकाउंट बनाए गए थे और इनमें एंट्री बाद की तारीखों में किए जाने के साथ रिकॉर्ड को बैकडेट में तैयार किए जाने के संकेत मिले। खास बात यह सामने आई कि परीक्षा का परिणाम 21 अक्टूबर 2022 को जारी हुआ था, जबकि फीस लेजर में संबंधित एंट्री इसके बाद की गई थी।

66 अभ्यर्थियों की डिग्रियों पर शक

जांच का दायरा अब और बड़ा हो गया है। एसओजी के अनुसार शारीरिक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में कुल 66 अभ्यर्थियों ने इसी विश्वविद्यालय की B.Ed. डिग्री प्रस्तुत की थी। इनमें से अधिकांश डिग्रियां प्रथम दृष्टया बैकडेट में जारी होने की बात सामने आई है। विश्वविद्यालय में B.Ed. की 100 सीटें अनुमोदित हैं और परीक्षा-2022 से पहले राजस्थान के अभ्यर्थियों की संख्या भी जांच में संदेह का विषय बनी है। एसओजी अब इन अभ्यर्थियों की डिग्रियों और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रही है।

इस मामले में मूल अभ्यर्थी भारमल राम को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उसके खिलाफ जांच पूरी कर चालान कोर्ट में पेश किया जा चुका है। एसओजी विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित अन्य अभ्यर्थियों की डिग्रियों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

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