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पुलिस ने दबोचा फर्जी डिग्री रैकेट का 25 हजार का इनामी, लालच देकर ठग चुका था 58 लाख; हुआ बड़ा खुलासा

 Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Jun 06, 2026 11:23 pm IST,  Updated : Jun 06, 2026 11:23 pm IST

कानपुर पुलिस ने फर्जी डिग्री रैकेट मामले में गाजियाबाद से 25 हजार का इनामी काउंसलर मयंक भारद्वाज गिरफ्तार कर लिया है। जांच में उसके 58 लाख के लेनदेन का बड़ा खुलासा हुआ है।

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फर्जी डिग्री रैकेट का 25 हजार का इनामी काउंसलर गिरफ्तार। Image Source : REPORTERS INPUT

Kanpur Fake Degree Racket: यूपी के कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाकर देशभर में सप्लाई करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी मयंक भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है। मयंक इम्फाल स्थित एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का काउंसलर बताया जा रहा है और फर्जी डिग्री नेटवर्क में उसकी अहम भूमिका सामने आई है। आरोपी मयंक भारद्वाज को गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।

मयंक ने 105 लोगों को दीं फर्जी डिग्रियां

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मयंक भारद्वाज का नाम फर्जी डिग्री नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा से पूछताछ के दौरान सामने आया था। जांच में पता चला कि शैलेंद्र ओझा, मयंक के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों में छात्रों का दाखिला कराता था। अब तक 105 लोगों के दाखिले कराए जाने की जानकारी सामने आई है, जिन्हें बाद में मोटी रकम लेकर डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं।

58 लाख के लेनदेन का हुआ खुलासा

गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस ने उसके कब्जे से सात डिग्री और प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। साथ ही जांच के दौरान उसके बैंक खाते में पिछले तीन वर्षों में लगभग 58 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है। पुलिस इस रकम के स्रोत और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

यूनिवर्सिटी के UGC से संबद्ध होने का देता था लालच

पुलिस के अनुसार, एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की संबद्धता भी जांच के दायरे में है। आरोपी ने यूनिवर्सिटी के यूजीसी से संबद्ध होने का दावा किया है, लेकिन पुलिस को इस संबंध में कई विसंगतियां मिली हैं। मामले की जांच के लिए शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया है।

कई राज्यों में फैला है फर्जी डिग्री रैकेट

जांच में यह भी सामने आया है कि शैलेंद्र ओझा और मयंक भारद्वाज की पहचान वर्ष 2023 में सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच डिजिटल और बैंकिंग लेनदेन के प्रमाण मिले हैं। पुलिस का दावा है कि नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और इसमें छात्र उपलब्ध कराने, काउंसलिंग करने तथा डिग्रियां तैयार कराने के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारियां तय थीं।

बनाते थे हाईस्कूल से लेकर एलएलबी तक की फर्जी डिग्रियां

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह हाईस्कूल से लेकर बीटेक, एलएलबी, डी-फार्मा, बी-फार्मा समेत विभिन्न शैक्षणिक और प्रोफेशनल डिग्रियां 50 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक में उपलब्ध कराता था। इस नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, सिक्किम, कर्नाटक और मणिपुर समेत कई राज्यों तक फैला हुआ है।

पुलिस की जांच में हुआ बड़े नेटवर्क का खुलासा

गौरतलब है कि फरवरी में किदवई नगर क्षेत्र में हुई छापेमारी के दौरान इस बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा हुआ था। अब तक इस मामले में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और जल्द ही नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे किए जाएंगे।

(इनपुट- अनुराग श्रीवास्तव)

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