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Aja Ekadashi Vrat Katha: अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य देती है अजा एकादशी की व्रत कथा, स्वर्ग के खोलती है द्वार

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Aug 18, 2025 02:01 pm IST,  Updated : Aug 19, 2025 06:23 am IST

Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी भगवान विष्णु की प्रिय एकादशी मानी जाती है। कहते हैं जो कोई इस दिन व्रत रखता है उसके समस्त पापों का नाश हो जाता है। मान्यता है अजा एकादशी की व्रत कथा सुनने मात्र से ही अश्वमेध यज्ञ के फल की प्राप्ति हो जाती है।

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अजा एकादशी व्रत कथा Image Source : PIXABAY

Aja Ekadashi Vrat Katha: अजा एकादशी व्रत 19 अगस्त 2025, मंगलवार को रखा जाएगा। मान्यता है इस व्रत को रखने से भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस एकादशी को अन्नदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। कहते हैं इस एकादशी व्रत को करने से समस्त पापों का नाश तो होता ही है साथ ही अंत में स्वर्ग लोग की भी प्राप्ति होती है। यहां आप जानेंगे अजा एकादशी की पावन कथा के बारे में। 

अजा एकादशी व्रत कथा (Aja Ekadashi Vrat Katha)

पौराणिक काल में अयोध्या नगरी में हरिश्चन्द्र नाम के एक राजा हुए थे जो अपनी सत्यनिष्ठा और ईमानदारी के लिए प्रसिद्ध थे। एक बार देवताओं ने उनकी परीक्षा लेने की सोची। राजा ने सपने में देखा कि उन्होंने ऋषि विश्ववामित्र को अपना राजपाट दान कर दिया है। सुबह विश्वामित्र सही में उनके द्वार पर आ गए और कहने लगे तुमने सपने में मुझे अपना राज्य दान कर दिया था। राजा ने सत्यनिष्ठ व्रत का पालन करते हुए विश्वामित्र को अपना समस्त राज्य सौंप दिया। दान की दक्षिणा चुकाने के लिए राजा हरिश्चन्द्र को पूर्व जन्म के कर्म फल के कारण ही अपनी पत्नी, बेटे एवं खुद को भी बेचना पड़ा। हरिश्चन्द्र को एक डोम ने खरीद लिया जो दाह संस्कार का काम करवाता था।

स्वयं वह एक चाण्डाल का दास बनकर उसके यहां कफन लेने का काम करने लगा किन्तु उसने इस आपत्ति के काम में भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा। यही काम करते-करते कई साल बीत गए लेकिन उसे अपने इस नीच कर्म पर बड़ा दुख हुआ और फिर उसने इससे मुक्ति पाने का उपाय खोजना शुरू किया। वह इसी चिन्ता में बैठा था कि गौतम ऋषि उसके पास पहुंचे। हरिश्चन्द्र ने उन्हें अपने जीवन की दुःख-भरी कथा सुनाई। तब महर्षि गौतम ने उसे भादों माह के कृष्ण पक्ष की अजा एकादशी का व्रत करने का सुझाव दिया और कहा कि इस व्रत के प्रभाव से तुम्हारे सारे पाप नष्ट हो जाएंगे।

राजा हरिश्चन्द्र ने महर्षि के कहे अनुसार विधानपूर्वक उपवास किया और रात्रि जागरण किया। इस व्रत के प्रभाव से राजा के सभी पाप नष्ट हो गये और जीवन सुख से भर गया। व्रत के प्रभाव से राजा को पुनः अपने राज्य की प्राप्ति हुई। अन्त समय में हरिश्चन्द्र अपने परिवार सहित स्वर्ग लोक को गया। कहते हैं जो मनुष्य इस उपवास को विधानपूर्वक करते हैं उनके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अन्त में वे स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। साथ ही ये भी कहा जाता है कि इस एकादशी व्रत की कथा के श्रवण मात्र से ही अश्वमेध यज्ञ के फल की प्राप्ति हो जाती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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