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Amalaki Ekadashi 2026 Puja Vidhi: आमलकी एकादशी के दिन कैसे करें आंवला पेड़ की पूजा, जानिए पूजा विधि और महत्व

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Feb 25, 2026 02:18 pm IST,  Updated : Feb 25, 2026 02:18 pm IST

Amalaki Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में आंवला पेड़ अत्यंत पूज्यनीय माना जाता है। आमलकी एकादशी के दिन आंवला पेड़ की पूजा का विधान है। तो आइए जानते हैं कि इस दिन आंवला पेड़ की पूजा कैसे करनी चाहिए।

आमलकी एकादशी 2026- India TV Hindi
आमलकी एकादशी 2026 Image Source : FILE IMAGE

Amalaki Ekadashi 2026: फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इस एकादशी को रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी के साथ ही शिवजी और माता पार्वती की भी पूजा की जाती है। आमलकी एकादशी के दिन आंवला पेड़ की पूजा का भी विधान है। आंवला भगवान विष्णु को अति प्रिय है। ऐसे में आमलकी एकादशी के दिन आंवला वृक्ष की पूजा करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,आंवले के हर हिस्से में भगवान का वास माना जाता है। इसके मूल, यानि जड़ में श्री विष्णु जी, तने में शिव जी और ऊपर के हिस्से में ब्रह्मा जी का वास माना जाता है। आंवले के वृक्ष के स्मरण मात्र से ही गौ दान के समान पुण्य फल मिलता है। इसके स्पर्श से किसी भी कार्य का दो गुणा फल मिलता है, जबकि इसका फल खाने से तीन गुणा पुण्य फल प्राप्त होता है।

इस साल आमलकी एकादशी का व्रत 27 फरवरी 2026 को किया जाएगा। आमलकी एकादशी के दिन लक्ष्मी नारायण के साथ ही आंवला पेड़ की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही आंवला पेड़ की परिक्रमा करने से जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है। तो आइए जानते हैं कि आमलकी एकादशी के दिन किस विधि के साथ आंवला पेड़ की पूजा करनी चाहिए। 

आंवला पेड़ पूजा विधि

  • आमलकी एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि कर साफ-सुथरा कपड़ा पहन लें।
  • इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • फिर आंवला पेड़ में जल अर्पित करें।
  • इसके बाद आंवला पेड़ की जड़ में कच्चा दूध, अक्षत, रोली आदि पूजा सामग्री चढ़ाएं। 
  • आंवला पेड़ के नीचे सरसों या तिल के तेल का दीया जलाएं।
  • इसके बाद आंवला पेड़ की 108 बार परिक्रमा करें।
  • अगर ऐसा संभव नहीं है तो आंवला पेड़ की 7 या 11 बार भी परिक्रमा कर सकते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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