Chaitra Purnima 2026: चैत्र पूर्णिमा के पावन दिन को स्नान-दान और व्रत रखने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। हिंदू नववर्ष की यह पहली पूर्णिमा होती है इसलिए चैत्र पूर्णिमा का हिंदू धर्म में बड़ा महत्व है। इस दिन हनुमान जन्मोत्सव का पावन पर्व भी मनाया जाता है। भक्तों को चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व के दिन गंगा यमुना के पवित्र घाटों पर स्नान-दान करते देखा जा सकता है। साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा को लेकर असमंजस की स्थिति है कि पूर्णिमा 1 को है या दो को क्योंकि पूर्णिमा तिथि दोनों दिन होगी। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि पूर्णिमा तिथि का व्रत कब रखा जाएगा और स्नान दान की पूर्णिमा कब रहेगी।
चैत्र पूर्णिमा 2026 डेट और स्नान-दान मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ 1 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 8 मिनट से होगा। वहीं पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 2 अप्रैल को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगी। आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार व्रतादि की पूर्णिमा 1 अप्रैल को होगी। पूर्णिमा के चांद की पूजा 1 अप्रैल की रात में की जाएगी इसलिए यह दिन व्रत के लिए शुभ रहेगा। वहीं स्नान-दान की पूर्णिमा 2 अप्रैल को मनाई जाएगी। 1 अप्रैल को चंद्रोदय शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा। इसलिए चंद्रमा की पूजा आप 6 बजकर 6 मिनट से रात्रि 9 बजे तक कर सकते हैं। स्नान-दान 2 अप्रैल को दोपहर 1 बजे तक करना शुभ रहेगा।
चैत्र पूर्णिमा का महत्व
चैत्र पूर्णिमा हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा है इसलिए इस दिन पूजा, स्नान-दान करने से आपको पूरे वर्ष भर अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। इस दिन योग-ध्यान करने से आपको मानसिक शक्ति प्राप्त होती है और आध्यात्मिक पथ पर आप आगे बढ़ते हैं। चैत्र पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा करने से कुंडली में चंद्र की स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करना भी इस दिन शुभ माना गया है। वहीं चैत्र पूर्णिमा पर हनुमान जन्मोत्सव भी मनाया जाता है इसलिए हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ और मंत्रों का जप करने से आपके जीवन में सुखद बदलाव आते हैं। चैत्र पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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