1. Hindi News
  2. धर्म
  3. त्योहार
  4. 14 सितंबर को मनाया जाएगा चौरचन पर्व, जानें चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय और महत्व

14 सितंबर को मनाया जाएगा चौरचन पर्व, जानें चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय और महत्व

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 12, 2026 07:06 pm IST,  Updated : Sep 12, 2026 07:24 pm IST

हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को चौरचन का पर्व मनाया जाता है। बिहार के मिथिला क्षेत्र के साथ-साथ नेपाल के तराई इलाकों में भी चौरचन पर्व मनाया जाता है। इस दिन व्रती महिलाएं कई तरह के पकवान बनाती हैं और शाम के समय चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद पारण करती हैं।

चौरचन पर्व 2026- India TV Hindi
चौरचन पर्व 2026 Image Source : INDIA TV

14 सितंबर (सोमवार) को चौरचन का पर्व मनाया जाएगा। इसे चौरचन पावैन और चौठ चंद  के नाम से भी जाना जाता है। मिथिला में चौरचन पूजा का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद जल, अन्न ग्रहण करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चौरचन के दिन व्रत करने और चंद्र देव की विधिपूर्वक पूजा करने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। संतान के जीवन से भी सारी परेशानियां दूर हो जाती हैं। हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को चौरचन पावैन मनाया जाता है। तो आइए जानते हैं इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य देने का शुभ समय क्या रहेगा।

चौरचन पर चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय

चौरचन पर्व में चंद्रमा पूजा का खास महत्व होता है। चंद्र देव को अर्घ्य देने के बाद ही यह पर्व पूरा माना जाता है। सूर्यास्त के बाद से चंद्रास्त तक चंद्रमा को अर्घ्य देने का समय माना जाता है। तो आइए जानते हैं कि 14 सितंबर 2026 शहर के अनुसार,  चंद्र अर्घ्य (चांद निकलने का समय) के संभावित समय  के बारे में।

  • पटना: शाम 5:55 बजे से 7:40 बजे तक
  • मधुबनी: शाम 5:52 बजे से 7:36 बजे तक
  • सीतामढ़ी: शाम 5:54 बजे से 7:38 बजे तक
  • दरभंगा: शाम 5:52 बजे से 7:36 बजे तक
  • समस्तीपुर: शाम 5:52 बजे से 7:36 बजे तक
  • सहरसा: शाम 5:50 बजे से 7:34 बजे तक
  • मधेपुरा: शाम 5:49 बजे से 7:33 बजे तक
  • पूर्णिया: शाम 5:46 बजे से 7:31 बजे तक
  • कटिहार: शाम 5:46 बजे से 7:31 बजे तक
  • दिल्ली-एनसीआर- 08:15 बजे से 08:45 बजे तक

चौरचन पूजा का महत्व

छठ की तरह ही चौरचन में गोल डाला सजाया जाता है, जिसमें मौसमी फल और ठेकुआ समेत कई पकवान होते हैं। छठ में सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है लेकिन चौरचन में चंद्र देव को अर्घ्य दिया जाता है।चौरचन पूजा में अरिपन का विशेष महत्व होता है। पूजा करने से पहले शाम के समय अंगना या पूजा स्थल को साफ कर के गोबर और गेरु से लीपा जाता है। फिर वहां चावल के आटे से एक गोलाकार अरिपन बनाया जाता है जिसे चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद इस अरिपन पर मिट्टी के बर्तनों में जमाई गई दही,  खीर, ठेकुआ, पूरी, और मौसमी फल (केला, सेब, अनार, अमरुद, खीरा) आदि पकवान चढ़ाया जाता है। इसके बाद शाम के समय चंद्र दर्शन होने पर हाथ  फल, पकवान या दही का पात्र लेकर मंत्रोच्चार के साथ चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति आती है और संतान को दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का शुभ संयोग

बता दें कि इस साल 14 सितंबर को चौरचन पर्व के साथ ही हरतालिका तीज का व्रत भी रखा जाएगा। इसके साथ ही 10 दिवसीय गणेश उत्सव का भी आरंभ होगा। इस दिन बप्पा हर घर में पधारेंगे और पूरे दिनों तक गौरी पुत्र गणेश जी की पूजा की जाएगी। वहीं हरतालिका तीज का व्रत करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा की जाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें:

हरतालिका तीज व्रत: क्या जिंदगीभर करना होता है ये उपवास? जानें कब कर सकते हैं उद्यापन और क्या हैं नियम

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Festivals से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें धर्म