शारदीय नवरात्रि में अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों छोटी कन्याओं को माता रानी का बाल स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें भोजन कराने के बाद दक्षिणा या उपहार देने की परंपरा है। कन्या पूजन के दौरान उपहार चुनते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। जानें कंजक पूजन में कौन सी चीजें कन्याओं को भेंट करने से बचना चाहिए और कौन सी चीजें देना शुभ माना जाता है।
नवरात्रि में कन्या पूजन
सनातन धर्म में छोटी कन्याओं को देवी के बाल स्वरूप के तौर पर देखा जाता है। यही वजह है कि नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने की परंपरा है। इस साल शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी। नवरात्रि के दौरान कन्याओं को घर बुलाकर सात्विक भोजन कराया जाता है और इसके बाद उन्हें दक्षिणा या उपहार दिया जाता है।
श्रद्धा से दें उपहार
कन्या पूजन के बाद सिर्फ पैसे देना ही जरूरी नहीं माना जाता। परिवार अपनी सामर्थ्य के अनुसार बच्चियों को उपयोगी और सम्मानजनक वस्तुएं भी भेंट कर सकते हैं। फल, मिठाई, पुस्तक, कॉपी-पेंसिल, रुमाल, चूड़ियां, वस्त्र या अन्य छोटी उपयोगी चीजें दी जा सकती हैं। कई परिवार कन्याओं को मां दुर्गा के प्रतीक स्वरूप लाल चुनरी या श्रृंगार सामग्री भी भेंट करते हैं। हालांकि सबसे जरूरी उपहार की कीमत नहीं, बल्कि उसके पीछे की श्रद्धा और सम्मान का भाव माना जाता है।
नुकीली चीजें
कन्या पूजन के दौरान छोटी कन्याओं को उपहार देते समय नुकीली चीजों से बचने की सलाह दी जाती है। इसलिए ऐसी वस्तुएं चुनने की जगह आप बच्चियों की उम्र और जरूरत के अनुसार कोई उपयोगी सामान दे सकते हैं।
काले रंग की चीजें
कन्या पूजन के दौरान उपहार में काले रंग की वस्तुएं देने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में काले रंग को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। इसकी जगह लाल, गुलाबी या पीले रंग की वस्तुएं उपहार में दी जा सकती हैं।
चमड़े की चीजें
कन्या पूजन में बच्चियों को उपहार देते समय चमड़े से बनी वस्तुएं भी नहीं देनी चाहिए। धार्मिक नजरिए से चमड़े की चीजों को शुभ नहीं माना जाता। इसलिए उपहार चुनते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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