करवा चौथ पर बायना निकालने और सास को देकर उनका आशीर्वाद लेने की परंपरा है। लेकिन अगर सास नहीं हैं या किसी दूसरे शहर में रहती हैं, तो कई महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि बायना किसे दें और यह रस्म कैसे पूरी करें। ऐसी स्थिति में करवा चौथ पर बायना किसे दिया जा सकता है और इस परंपरा को कैसे निभाया जाता है। यहां जानिए करवा चौथ की इस खास रस्म से जुड़े महत्वपूर्ण नियम।
सास दूसरे शहर में रहती हैं तो क्या करें?
करवा चौथ पर महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। शाम को पूजा करने के बाद सास को बायना देने की परंपरा है। अगर सास किसी दूसरे शहर या विदेश में रहती हैं, तो उनके नाम से बायना निकाल सकती हैं। पूजा के बाद फोन या वीडियो कॉल के जरिए उनका आशीर्वाद लें। बायना उन्हें भेज सकती हैं या अगली मुलाकात में दे सकती हैं।
सास न हों तो किसे दें बायना?
अगर सास का निधन हो चुका है, तो घर की किसी बड़ी महिला जैसे जेठानी, ननद, मौसी सास या बुआ सास को बायना दिया जा सकता है। अगर ससुराल में कोई बड़ी महिला मौजूद नहीं है, तो अपनी माताजी या बड़ी बहन को भी बायना दे सकती हैं। आसपास कोई रिश्तेदार न हो, तो किसी सम्मानित सुहागिन महिला या पंडित की पत्नी को बायना देने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।
मां गौरी को अर्पित करें सुहाग का सामान
अगर बायना देने के लिए परिवार में कोई बड़ी महिला उपलब्ध नहीं है, तो मां पार्वती को सुहाग का सामान अर्पित कर सकती हैं। फल और मिठाई गाय को खिलाने का विकल्प भी बताया जाता है।
कैसे निकालें बायना और कब दें?
बायना तैयार करने के लिए थाली में कपड़े, सुहाग का सामान, मिठाई, फल और रुपये रखें। साड़ी या सूट के पल्लू से थोड़ा पानी लेकर बायने के ऊपर दो बार घुमाने की रस्म भी निभाई जाती है। बायना देकर पैर छूकर आशीर्वाद लें। आमतौर पर पूजा और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद बायना दिया जाता है। हालांकि, समय और विधि परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। इसलिए इस रस्म को निभाते समय घर के रीति-रिवाजों का पालन करें।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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