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दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद जरूर पढ़ें लक्ष्मी चालीसा, देवी मां के प्रसन्न होने की है मान्यता, यहां पढ़ें संपूर्ण चालीसा

 Written By: Arti Azad
 Published : Nov 07, 2026 08:32 pm IST,  Updated : Nov 07, 2026 08:32 pm IST

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है। वहीं, शुक्रवार के दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने की कामना की जाती है। यहां पढ़िए संपूर्ण चालीसा हिंदी में।

Shri Lakshmi Chalisa- India TV Hindi
संपूर्ण लक्ष्मी चालीसा Image Source : PINTEREST

दिवाली पर मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान उनके मंत्रों का जाप और आरती करना भी शुभ माना जाता है। इस बार 8 नवंबर 2026 रविवार को दिवाली मनाई जा रही है। इसी के साथ शुक्रवार का दिन भी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि दिवाली और शुक्रवार को लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने से देवी की कृपा प्राप्त की जा सकती है। दीपावली के दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। ऐसे में यहां पढ़िए श्री लक्ष्मी चालीसा के संपूर्ण पाठ।

श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa)

                    ॥ दोहा ॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, परुवहु मेरी आस॥

                      ॥सोरठा॥

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।
सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदम्बिका॥

                      ॥ चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान, बुद्धि, विद्या दो मोही॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

जय जय जगत जननि जगदम्बा। सबकी तुम ही हो अवलम्बा॥
तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥

जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥
विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥
कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्धि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥
क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥
जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥
तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी
तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वाञ्छित फल पाई॥
तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥

और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥
ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बन्धन हारिणी॥
जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥

ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥
पुत्रहीन अरु सम्पति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥

विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥
पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥
बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥
बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्ध उपजै उर प्रेमा॥
जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥
मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥

भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥
बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्धि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥
रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्धि मोहि नहिं अधिकाई॥
रामदास अब कहाई पुकारी। करो दूर तुम विपत्ति हमारी॥

               ॥ दोहा ॥

त्राहि त्राहि दुःख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास।
जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥

रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर।
मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

यहां से डाउनलोड करें संपूर्ण लक्ष्मी चालीसा पीडीएफ

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