कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। दिवाली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के साथ मां सरस्वती की पूजा करने का भी विशेष महत्व माना जाता है। इस साल 8 नवंबर को दीपोत्सव मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सरस्वती विद्या, बुद्धि और ज्ञान की देवी हैं।
दिवाली की शाम पूजा के दौरान उनकी आरती करने से भक्त उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। अगर आप भी दिवाली पर मां सरस्वती की पूजा कर रहे हैं, तो यहां पढ़ें सरस्वती माता के मंत्र और पूरी आरती, जिसे पूजन के दौरान गाया जाता है। साथ ही यहां जानिए दिवाली पूजन की संपूर्ण विधि समेत सभी डिटेल।
मां सरस्वती की आरती (Maa Saraswati Aarti)
ओम जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
चंद्रवदनी पद्मासिनी, धृति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥
जय जय सरस्वती माता।...
बाएँ कर में वीणा धरे, दाएँ कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गले मोतियन माला॥
जय जय सरस्वती माता।...
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥
जय जय सरस्वती माता।...
विद्या दायिनी ज्ञान प्रदान कर, ज्ञान का दीप जलाओ।
भ्रम, अज्ञान और अंधकार, जग से दूर भगाओ॥
जय जय सरस्वती माता।...
धूप, दीप, फल-मेवा, मां स्वीकार करो।
ज्ञान चक्षु दे माता, जग का उद्धार करो॥
जय जय सरस्वती माता।...
मां सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
सुख, समृद्धि, विद्या, भक्ति सहज पावे॥
जय जय सरस्वती माता।...
जय सरस्वती माता, जय जय सरस्वती माता।
सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥
जय जय सरस्वती माता।...
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सरस्वती माता के मंत्र (Saraswati Mata Ke Mantra)
1. ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः।
2. या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
3. ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि।
तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
4. ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः।
5. वद वद वाग्वादिनी स्वाहा।
सरस्वती ध्यान मंत्र (Saraswati Dhyana Mantra)
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता।
या वीणा वरदण्ड मंडित करा, या श्वेत पद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥
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