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क्यों पड़ा मां पार्वती का नाम स्कंदमाता? देवताओं के संकटमोचक बने भगवान कार्तिकेय और किया था तारकासुर का अंत

 Written By: Arti Azad
 Published : Oct 14, 2026 11:05 pm IST,  Updated : Oct 14, 2026 11:05 pm IST

मां स्कंदमाता की कथा भगवान कार्तिकेय और शक्तिशाली असुर तारकासुर से जुड़ी है। मान्यता है कि भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध करके देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। पढ़िए मां स्कंदमाता की कथा।

Maa Skandamata Katha- India TV Hindi
मां स्कंदमाता की कथा Image Source : INDIA TV

नवरात्रि के पंचमी को मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण प्रसिद्ध है। मां स्कंदमाता की कथा शक्तिशाली असुर तारकासुर के अत्याचार, देवताओं की परेशानी और भगवान कार्तिकेय के पराक्रम से जुड़ी है। पढ़िए मां स्कंदमाता की पौराणिक कथा।

तारकासुर ने मांगा अनोखा वरदान

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में तारकासुर नाम का एक शक्तिशाली असुर रहता था। वह अधिक शक्तियां प्राप्त करना चाहता था, इसलिए उसने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी उसके सामने प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा। तब तारकासुर ने ऐसा वरदान मांगा कि उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो सके।

तारकासुर को विश्वास था कि भगवान शिव तपस्या में लीन रहते हैं और उनके विवाह तथा पुत्र जन्म की संभावना बहुत कम है। इसी सोच के कारण वह खुद को लगभग अमर समझने लगा। वरदान मिलने के बाद उसका अहंकार बढ़ गया और उसने देवताओं तथा ऋषि-मुनियों को परेशान करना शुरू कर दिया।

तारकासुर के अत्याचार लगातार बढ़ने लगे। देवता उसके आतंक से परेशान हो गए और उसे रोकने का कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। ब्रह्मा जी के वरदान के कारण उसका अंत केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही संभव था। ऐसे में देवताओं ने भगवान शिव और माता पार्वती से सहायता की प्रार्थना की। देवताओं की प्रार्थना के बाद भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन से कार्तिकेय का जन्म हुआ। कार्तिकेय को स्कंद के नाम से भी जाना जाता है। मां पार्वती ने अपने पुत्र का पालन-पोषण किया और उन्हें साहस, शक्ति तथा युद्ध कौशल से युक्त बनाया।

स्कंद बने देवताओं के सेनापति

समय आने पर भगवान कार्तिकेय ने युद्ध कौशल में दक्षता प्राप्त की। तारकासुर का सामना करने के लिए उन्हें देवताओं की सेना का नेतृत्व सौंपा गया। भगवान कार्तिकेय ने देवताओं की सेना के साथ असुर के विरुद्ध युद्ध किया। यह युद्ध देवताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण था, क्योंकि तारकासुर के आतंक से मुक्ति पाने का यही रास्ता था। युद्ध में भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर का वध कर दिया। इस तरह देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्ति मिली और तीनों लोकों में शांति स्थापित होने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

मां कहलाती हैं स्कंदमाता

स्कंद यानी कार्तिकेय की माता होने के कारण माता पार्वती को स्कंदमाता कहा जाता है। देवी के इस स्वरूप में वे अपने पुत्र को गोद में लिए दिखाई देती हैं। उनका यह रूप ममता और शक्ति के संगम का प्रतीक माना जाता है। 

मां स्कंदमाता का मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करते समय भक्त सुख, शांति, साहस और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। इस दिन देवी के निम्न मंत्र का 11 बार जप किया जा सकता है।

मंत्रः सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चित करद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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