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Mahakumbh: महाकुंभ मेले के पीछे की कहानी क्या है? कुंभ मेला में जाने से पहले जान लीजिए इसका महत्व

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Jan 11, 2025 06:27 pm IST,  Updated : Jan 11, 2025 06:27 pm IST

Mahakumbh 2025: प्रयागराज में पूरे 12 वर्षों बाद महाकुंभ लग रहा है, जिसका शुभारंभ 13 जनवरी से होगा। ऐसे में यहां जान लीजिए कि महाकुंभ मनाने के पीछे की पौराणिक कथा और महत्व क्या है।

महाकुंभ मेला 2025- India TV Hindi
महाकुंभ मेला 2025 Image Source : INDIA TV

Kumbh Mela 2025 Story and significance: पूरे 12 वर्षों के बाद महाकुंभ मेला का आयोजन किया जाता है। महाकुंभ सबसे बड़ा और प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। कुंभ मेला में लाखों-करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। कहते हैं कि जो भी व्यक्ति कुंभ स्नान कर लेता है उसके सभी पाप मिट जाते हैं। इतना ही नहीं उसकी सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं। महाकुंभ दौरान विशेष पूजा-अर्चना, यज्ञ, और अन्य धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। संगम नगरी प्रयागराज में 13 जनवरी 2025, पौष पूर्णिमा से महाकुंभ शुरू हो रहा है। तो चलिए अब जानते हैं कि महाकुंभ मेले के पीछे की कहानी क्या है। साथ ही जानेंगे महाकुंभ का धार्मिक महत्व। 

महाकुंभ से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था तब समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कुंभ यानी कलश लेकर प्रकट हुए। देवताओं के संकेत पर इंद्र पुत्र जयंत अमृत से भरा कलश लेकर बड़े भागने लगे और असुर जयंत के पीछे भागने लगे। अमृत कलथ की प्राप्ति के लिए देवताओं और दैत्यों के बीच बारह दिन तक भयंकर युद्ध हुआ। माना जाता है कि देवताओं का एक दिन मनुष्य के बारह वर्षों के बराबर होता है। इस युद्ध के दौरान जिन-जिन स्थानों पर कलश से अमृत की बूंदे गिरी थी वहां कुंभ मेला लगता है। अमृत की बूंदे इन चार जगहों पर गिरी थी प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। इन चारों स्थान पर कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है।

महाकुंभ का महत्व 

महाकुंभ में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं। इतना ही नहीं कुंभ में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इसके अलावा कुंभ मेला आध्यात्मिक ज्ञान, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक समरसता का भी प्रतीक माना जाता है। लोग आध्यात्मिक ज्ञान और मानसिक शांति के लिए भी कुंभ मेला में आते हैं। बता दें कि महाकुंभ में नागा साधु से लेकर अन्य अलग-अलग बड़े-बड़े संत पधारते हैं, जिनका आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से कुंभ मेला में शामिल होने आते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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