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Papmochani Ekadashi Vrat Katha: पापमोचिनी एकादशी के दिन जरूर करें इस कथा का पाठ, हर पाप से मिलेगी मुक्ति, श्री हरि की कृपा से दूर होगा हर दुख

Written By: Vineeta Mandal Published : Mar 14, 2026 05:39 pm IST, Updated : Mar 14, 2026 05:47 pm IST

Papmochani Ekadashi Vrat Katha: 15 मार्च 2026 को पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को सभी परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है।

पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा- India TV Hindi
Image Source : FILE IMAGE पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा

Papmochani Ekadashi Vrat katha: चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी व्रतअत्यंत ही महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस एकादशी को पापमोचिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल पापमोचिनी एकादशी का व्रत 15 मार्च 2026 को रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापमोचिनी एकादशी के दिन उपवास रखने और विधिपूर्वर विष्णु जी की पूजा-अर्चना करने से जातक को हर पाप से मुक्ति मिल जाती है। पापमोचिनी एकादशी के दिन व्रत कथा का पाठ अवश्य करें। एकादशी व्रत कथा के बिना आपकी पूजा और व्रत अधूरा रह सकता है। तो आइए जानते हैं पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा और शुभ मुहूर्त के बारे में।

पापमोचिनी एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

  • चैत्र माह कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ- 14 मार्च को सुबह 8 बजकर 10 मिनट पर
  • चैत्र माह कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का समापन- 15 मार्च को सुबह 9 बजकर 16 मिनट पर
  • ब्रह्म मुहूर्त- 05:11 ए एम से 05:59 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:35 ए एम से 06:47 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 12:23 पी एम से 01:12 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:48 पी एम से 03:36 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:46 पी एम से 07:10 पी एम

पापमोचिनी एकादशी व्रत कथा

व्रत कथा के अनुसार चित्ररथ नामक वन में मेधावी ऋषि कठोर तप में लीन थे। उनके तप व पुण्यों के प्रभाव से देवराज इन्द्र चिंतित हो गए और उन्होंने ऋषि की तपस्या भंग करने हेतु मंजुघोषा नामक अप्सरा को पृथ्वी पर भेजा। तप में विलीन मेधावी ऋषि ने जब अप्सरा को देखा तो वह उस पर मंत्रमुग्ध हो गए और अपनी तपस्या छोड़ कर मंजुघोषा के साथ वैवाहिक जीवन व्यतीत करने लगे।

कुछ वर्षो के पश्चात मंजुघोषा ने ऋषि से वापस स्वर्ग जाने की बात कही। तब ऋषि बोध हुआ कि वे शिव भक्ति के मार्ग से हट गए और उन्हें स्वयं पर ग्लानि होने लगी। इसका एकमात्र कारण अप्सरा को मानकर मेधावी ऋषि ने मंजुधोषा को पिशाचिनी होने का शाप दिया। इस बात से मंजुघोषा को बहुत दुःख हुआ और उसने ऋषि से शाप-मुक्ति के लिए प्रार्थना किया। तब क्रोध शांत होने पर ऋषि ने मंजुघोषा को पापमोचिनी एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करने के लिए कहा। चूंकि मेधावी ऋषि ने भी शिव भक्ति को बीच राह में छोड़कर पाप कर दिया था, उन्होंने भी अप्सरा के साथ इस व्रत को विधि-विधान से किया और अपने पाप से मुक्त हुए।

Papmochani Ekadashi Vrat Katha PDF Download

इस कथा से स्पष्ट विदित है कि, शारीरिक आकर्षण अधिक समय तक नहीं रहता। शारीरिक सौन्दर्य के लोभ में पड़कर मेधावी मुनि अपने तप संकल्प को भूल गए। यह भयंकर पाप माना जाता है, लेकिन भगवान श्रीहरि की पापमोचनी शक्ति इस भयंकर पाप कर्म से भी सहज ही मुक्ति दिलाने में सक्षम है। जो मनुष्य सद्कर्मों का संकल्प करने के उपरान्त में लोभ-लालच एवं भोग-विलास के वशीभूत होकर अपने संकल्प को भूल जाते हैं, वे घोर नरक के भागी बनते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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