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परिवर्तिनी एकादशी कब है 21 या 22 सितंबर? यहां दूर करें कंफ्यूजन, जानें सही डेट, मुहूर्त और विधि

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 20, 2026 11:38 pm IST,  Updated : Sep 20, 2026 11:39 pm IST

परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु करवट लेते हैं इसलिए इस एकादशी का विशेष महत्व होता है। आपको बता दें कि अभी विष्णु जी योग निद्रा में हैं और देवउठनी एकादशी के दिन जागेंगे।

परिवर्तिनी एकादशी 2026- India TV Hindi
परिवर्तिनी एकादशी 2026 Image Source : INDIA TV

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी व्रत करने वालों पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की खास कृपा रहती है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली का वास रहता है। हर माह में दो बार एकादशी का व्रत आता है एक कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष में। प्रत्येक महीने की एकादशी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में ही भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी का खास महत्व बताया गया है। इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। तो आइए अब जानते हैं कि इस साल परिवर्तिनी एकादशी कब है। 

परिवर्तिनी एकादशी 2026 की सही तारीख

परिवर्तिनी एकादशी की तिथि को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 21 सितंबर को रात 8 बजे होगा। एकादशी तिथि का समापन 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पूजा शुभ मुहूर्त

परिवर्तिनी एकादशी के दिन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से सुबह 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से दोपहर 12 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। वहीं विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 32 मिनट से दोपहर 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 35 मिनट से शाम 6 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। शाम की पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त अति उत्तम माना जाता है।

परिवर्तिनी एकादशी पूजा विधि

  • एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर स्नान आदि के बाद साफ-सुथरे कपड़े पहने लें। संभव हो तो इस पीला रंग का वस्त्र पहनें। 
  • इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर मंदिर के सामने व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थल या मंदिर को साफ कर लें और गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें। 
  • अब एक चौकी रखें और उसपर पीला रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। 
  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखें।
  • विष्णु जी को चंदन का टीका लगाएं और  पीले फूल, पंचामृत, तुलसीदल, फल और नैवेद्य अर्पित करें।
  • माता लक्ष्मी को श्रृंगार का सामान चढ़ाएं और उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएं।
  • नारायण के सामन घी का दीया जलाएं  और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें।
  • परिवर्तिनी एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
  • अब भगवान की आरती करें और पूजा का समापन करें।
  • अगले दिन सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में एकादशी व्रत का पारण करें।

परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण 2026 डेट और मुहूर्त

परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर 2026 को किया जाएगा। पारण यानी व्रत खोलने के लिए शुभ समय सुबह 6 बजकर 27 मिनट से सुबह 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी तिथि रात 10 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगा। बता दें कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक होता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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