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11 सितंबर 2026 का पंचांग: शुक्रवार को है कुशाग्रहणी अमावस्या और साध्य योग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

 Written By: Acharya Indu Prakash,  Edited By: Naveen Khantwal
 Published : Sep 10, 2026 06:33 pm IST,  Updated : Sep 10, 2026 06:33 pm IST

शुक्रवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इस दिन को कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है है। साथ ही इस दिन साध्य योग भी रहेगा। यहां पढ़िए 11 सितंबर 2026 का पूरा पंचांग।

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पंचांग Image Source : INDIA TV

शुक्रवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। इस दिन को कुशोत्पाटिनी अमावस्या (कुशाग्रहणी अमावस्या) के नाम से भी जाना जाता है। स्नान-दान और पितरों के निमित्त तर्पण करने से इस दिन शुभ फलों की प्राप्त हो सकती है। साथ ही इस दिन कुशा ग्रहण की जाती है। ऐसे में जान लेते हैं कि अमावस्या तिथि पर शुभ मुहूर्त कब रहेंगे और इस दिन राहुकाल का समय क्या होगा। आचार्य इंदु प्रकाश से जानें शुक्रवार 11 सितंबर का पंचांग। 

11 सितंबर 2026 का पंचांग

  • भाद्रपद अमावस्या तिथि- 11 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजकर 57 मिनट तक
  • साध्य योग- 11 सितंबर 2026 को शाम 5 बजकर 2 मिनट तक
  • पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र- 11 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजकर 17 मिनट तक
  • शुक्रवार विशेष- भाद्रपद अमावस्या या कुशोत्पाटिनी अमावस्या

11 सितंबर 2026 का शुभ समय

  • ब्रह्म मुहूर्त- 05:17 ए एम से 06:09 ए एम तक
  • प्रातः संध्या- 05:43 ए एम से 07:01 ए एम तक
  • अभिजित मुहूर्त- 12:10 पी एम से 12:54 पी एम तक
  • विजय मुहूर्त- 02:22 पी एम से 03:06 पी एम तक
  • गोधूलि मुहूर्त- 05:59 पी एम से 06:26 पी एम तक
  • सायाह्न संध्या- 06:02 पी एम से 07:20 पी एम तक

राहुकाल का समय

  • दिल्ली- सुबह 10:44 से दोपहर 12:18 तक
  • मुंबई- सुबह 11:03 से दोपहर 12:35 तक
  • चंडीगढ़- सुबह 10:46 से दोपहर 12:19 तक
  • लखनऊ- सुबह 10:30 से दोपहर 12:03 तक
  • भोपाल- सुबह 10:44 से दोपहर 12:17 तक
  • कोलकाता- सुबह 10:00 से दोपहर पहले 11:33 तक
  • अहमदाबाद- सुबह 11:03 से दोपहर 12:36 तक
  • चेन्नई- सुबह 10:33 से दोपहर 12:05 तक

सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 

  • सूर्योदय- सुबह 6:03 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 6:31 बजे

कुशाग्रहणी अमावस्या

भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि को कुशाग्रहणी अमावस्या, पिठोरी अमावस्या और कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कुशा ग्रहण (कुश घास) करने की परंपरा है जिसका इस्तेमाल सालभर होने वाले धार्मिक और मांगलिक कार्यों में किया जाता है। इसके साथ ही भाद्रपद माह की इस अमावस्या पर पितरों के निमित्त तर्पण करने से भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। पितरों को प्रसन्न करने के लिए इस दिन पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है और पीपल तले दीपक जलाया जाता है। वहीं इस दिन किए गए स्नान-दान से व्यक्ति के पाप धुल सकते हैं। 

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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