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26 सितंबर 2026 का पंचांग: शनिवार को इतने बजे तक रहेगी पूर्णिमा तिथि, नोट करें शुभ मुहूर्त और राहुकाल टाइम

 Written By: Acharya Indu Prakash,  Edited By: Arti Azad
 Published : Sep 25, 2026 02:01 pm IST,  Updated : Sep 25, 2026 02:01 pm IST

26 सितंबर 2026 का पंचांग: शनिवार के दिन भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है। कल पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है की भी शुरुआत होने जा रही है। जानिए 26 सितंबर 2026 का पंचांग और राहुकाल का समय।

panchang, 26 सितंबर 2026 का पंचांग- India TV Hindi
26 सितंबर 2026 का पंचांग Image Source : INDIA TV
26 सितंबर 2026 को भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि और शनिवार का दिन है। कल पूर्णिमा तिथि रात 10 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। कल स्नान-दानादि की पूर्णिमा है। साथ ही कल 26 सितंबर को दोपहर पहले 11 बजकर 32 मिनट तक पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र रहेगा, उसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र लग जायेगा। इसके अलावा कल से पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है। आचार्य इंदु प्रकाश से जानिए शनिवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
 
26 सितंबर 2026 का पंचांग
  • भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि - 26 सितंबर को रात 10 बजकर 19 मिनट तक
  • पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र- 26 सितंबर को दोपहर पहले 11 बजकर 32 मिनट तक, उसके बाद उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र लग जायेगा। 
  • 26 सितंबर 2026 विशेष- पितृ पक्ष की शुरुआत
26 सितंबर 2026 शुभ समय
  • ब्रह्म मुहूर्त- 04:36 ए एम से 05:24 ए एम
  • प्रातः सन्ध्या- 05:00 ए एम से 06:11 ए एम
  • अभिजित मुहूर्त- 11:48 ए एम से 12:36 पी एम
  • विजय मुहूर्त- 02:13 पी एम से 03:01 पी एम
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:13 पी एम से 06:37 पी एम
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:13 पी एम से 07:25 पी एम
राहुकाल का समय
  • दिल्ली- सुबह 09:12 से सुबह 10:42 तक
  • मुंबई- सुबह 09:19 से दोपहर पहले 11:00 तक
  • चंडीगढ़- सुबह 09:14 से सुबह 10:44 तक
  • लखनऊ- सुबह 08:57 से सुबह 10:27 तक
  • भोपाल- सुबह 09:11 से सुबह 10:41 तक
  • कोलकाता- सुबह 08:27 से सुबह 09:57 तक
  • अहमदाबाद- सुबह 09:30 से दोपहर पहले 11:00 तक
  • चेन्नई- सुबह 08:59 से सुबह 10:30 तक
सूर्योदय-सूर्यास्त का समय 
  • सूर्योदय- सुबह 06:05 बजे 
  • सूर्यास्त- शाम 06:28 बजे
पितृपक्ष
 
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से सोलह दिवसीय श्राद्ध प्रारंभ होते हैं। 26 सितंबर से श्राद्ध की शुरुआत हो गयी है और आश्विन महीने की अमावस्या को यानि 10 अक्टूबर, दिन शनिवार को समाप्त होंगे। श्राद्ध को महालय या पितृपक्ष के नाम से भी जाना जाता है। बता दूं कि श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है, जिसका मतलब है पितरों के प्रति श्रद्धा भाव। हमारे भीतर प्रवाहित रक्त में हमारे पितरों के अंश हैं, जिसके कारण हम उनके ऋणी होते हैं और यही ऋण उतारने के लिए श्राद्ध कर्म किये जाते हैं।
 
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
 
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