शनिवार के दिन भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। इसके साथ ही शनिवार के दिन अशून्य शयन व्रत भी किया जाएगा। माना जाता है कि अगर पति यह व्रत रखे तो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है। इसके साथ ही शनिवार को पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र और धृति योग भी रहेगा। तो चलिए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं शुक्रवार का पंचांग, राहुकाल, शुभ मुहूर्त और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
29 अगस्त 2026 का पंचांग
- द्रपद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि- 29 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 57 मिनट तक
- धृति योग- 29 अगस्त 2026 को पूरा दिन पूरी रात पार कर के कल सुबह 5 बजकर 22 मिनट तक
- पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र- 29 अगस्त 2026 को देर रात 3 बजकर 43 मिनट तक
- 29 अगस्त 2027 विशेष- अशून्य शयन व्रत
28 अगस्त 2026 शुभ समय
- ब्रह्म मुहूर्त- 04:51 ए एम से 05:37 ए एम
- प्रातः सन्ध्या- 05:14 ए एम से 06:23 ए एम
- अभिजित मुहूर्त- 12:14 पी एम से 01:04 पी एम
- विजय मुहूर्त- 02:45 पी एम से 03:35 पी एम
- गोधूलि मुहूर्त- 06:56 पी एम से 07:19 पी एम
- सायाह्न सन्ध्या- 06:56 पी एम से 08:05 पी एम
- अमृत काल- 07:32 पी एम से 09:10 पी एम
28 अगस्त 2026 राहुकाल का समय
- दिल्ली- सुबह 09:10 से सुबह 10:46 तक
- मुंबई- सुबह 09:31 से दोपहर पहले 11:05 तक
- चंडीगढ़- सुबह 09:10 से सुबह 10:47 तक
- लखनऊ- सुबह 08:56 से सुबह 10:31 तक
- भोपाल- सुबह 09:11 से सुबह 10:46 तक
- कोलकाता- सुबह 08:28 से सुबह 10:03 तक
- अहमदाबाद- सुबह 09:30 से दोपहर पहले 11:05 तक
- चेन्नई- सुबह 09:04 से सुबह 10:37 तक
अशून्य शयन व्रत
अशून्य शयन द्वितीया व्रत किया जायेगा। चातुर्मास के चार महीनों के दौरान प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की द्वितिया तिथि को यह व्रत किया जाता है। यहां एक बात यह समझ लेते है कि- द्वितीया तिथि में रात को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर अशून्य शयन व्रत का पारण किया जाता है और द्वितीया तिथि आज सुबह 9 बजकर 58 मिनट पर लग जायेगी और कल सुबह 9 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। यानि द्वितीया तिथि में चंद्रोदय आज ही होगा। लिहाजा अशून्य शयन व्रत आज ही किया जायेगा। अशून्य शयन द्वितिया का अर्थ है- बिस्तर में अकेले न सोना पड़े। जिस प्रकार स्त्रियां अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिये करवाचौथ का व्रत करती हैं, ठीक उसी तरह पुरुषों को अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र के लिये यह व्रत करना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार अशून्य शयन द्वितिया का यह व्रत पति-पत्नी के रिश्तों को बेहतर बनाने के लिये बेहद अहम है। इस व्रत में श्री हरि विष्णु जी तथा लक्ष्मी जी की पूजा करने का विधान है, विष्णु जी की आरती का पाठ इस दिन अवश्य करना चाहिए। दरअसल शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु का शयनकाल होता है और इस अशून्य शयन व्रत के माध्यम से शयन उत्सव मनाया जाता है। गृहस्थ पति को यह व्रत अवश्य करना चाहिए।
(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)
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