1. Hindi News
  2. धर्म
  3. एकादशी ही नहीं, इन 5 मौकों पर अन्न खाना माना गया है महापाप, नरक के बनते हैं भागी, धर्म शास्त्र में बताए गए हैं कड़े नियम

एकादशी ही नहीं, इन 5 मौकों पर अन्न खाना माना गया है महापाप, नरक के बनते हैं भागी, धर्म शास्त्र में बताए गए हैं कड़े नियम

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : May 27, 2026 11:23 pm IST,  Updated : May 27, 2026 11:23 pm IST

Ann Khane ke Niyam: सनातन धर्म शास्त्रों में ऐसे 6 खास अवसरों का उल्लेख मिलता है, जब अन्न खाना दोषपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि इन दिनों नियमों का पालन करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है, जबकि अनदेखी करने पर व्यक्ति को पाप का भागी माना जाता है।

Ekadashi Vrat Rules- India TV Hindi
किन मौकों पर अन्न खाना है दोषपूर्ण Image Source : PEXELS

Ann Khane ke Niyam: सनातन धर्म में व्रत और उपवास का विशेष महत्व बताया है। शुभ अवसरों पर देवी-देवताओं को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाने के लिए उपवास करने का विधान है। लेकिन कुछ खास दिनों में अन्न का सेवन करने से बचना चाहिए। माना है कि इन नियमों का पालन करने से पुण्य मिलता है, जबकि अनदेखी करने पर दोष लगता है। एकादशी भी ऐसी ही एक तिथि है, जिसमें अन्न खाने पर व्रती को अंत समय में नर्क की प्राप्ति होती है। एकादशी के अलावा भी कई ऐसे अवसर बताए गए हैं, जब भोजन करना शुभ नहीं माना जाता। 

धर्म शास्त्रों का नियम

महाभारत और धर्म शास्त्रों में कुछ विशेष अवसरों पर अन्न ग्रहण करने की मनाही बताई गई है। इन मौकों पर संयम और उपवास को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। धर्मशास्त्र में इस श्लोक के माध्यम से स्पष्ट किया किया है कब व्यक्ति को अन्न का सेवन करने से बचना चाहिए। 

रविन्दुग्रासे हरिजन्मकाले कन्यादाने द्विजभोजने च।

प्राणप्रयाणे हरिवासरे च यदन्नं भुंक्ते नरकं प्रयान्ति।।

रविन्दुग्रासे: ग्रहण के समय 
सनातन परंपरा में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समय अन्न ग्रहण करना शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि ग्रहण काल के दौरान वातावरण में नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है। हालांकि बुजुर्ग, बीमार और बच्चों को कुछ छूट दी जाती है, लेकिन सामान्य व्यक्ति को इस दौरान भोजन से बचने की सलाह दी जाती है।

हरिजन्मकाले: देवी-देवताओं की जन्मतिथि
रामनवमी, नरसिंह जयंती, हनुमान जयंती और जानकी नवमी जैसे पावन अवसरों पर भी अन्न का सेवन करने से बचने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन दिनों फलाहार करना अधिक शुभ माना जाता है। इससे भगवान की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

कन्यादाने: कन्यादान से पहले
हिंदू विवाह में कन्यादान को सबसे बड़ा पुण्य कर्म माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन कन्यादान का संकल्प लिया जाए, उस दिन इस शुभ कार्य से पहले अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से दोषपूर्ण माना गया है।

द्विजभोजने: ब्राह्मण और संत भोजन
धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि यदि किसी ब्राह्मण या संत को भोजन के लिए आमंत्रित किया गया हो, तो पहले उन्हें भोजन कराना चाहिए। उनके भोजन से पहले खुद अन्न ग्रहण करना उचित नहीं माना गया है। हालांकि फल या हल्का आहार लिया जा सकता है।

प्राणप्रयाणे: मृत्यु के समय
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, घर में किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर या किसी के अंतिम समय में अन्न ग्रहण करने से बचना चाहिए। ऐसे समय को शोक और संयम का समय माना गया है। धार्मिक दृष्टि से इस दौरान भोजन करना दोषपूर्ण बताया गया है।

हरिवासरे: एकादशी व्रत
भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत में अन्न ग्रहण करना घोर पाप बताया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और उपवास करने से व्यक्ति को पुण्य और आध्यात्मिक लाभ मिलता है। इसलिए एकादशी पर फलाहार करने की सलाह दी जाती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें: June Panchak 2026: जून में लगेगा मत्यु पंचक, कब से होगा शुरू? इन खतरनाक दिनों में नहीं किए जाते ये 5 काम

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।