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Adhik Maas Tulsi Puja Vidhi: अधिक मास में तुलसी की पूजा कैसे करें? जानिए सही विधि और नियम

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : May 20, 2026 04:04 pm IST,  Updated : May 20, 2026 04:04 pm IST

Adhik Maas Tulsi Puja Vidhi: हिंदू धर्म में पूजा-पाठ और दान-पुण्य के लिए अधिक मास बहुत ही शुभ माना जाता है। यह महीना विष्णु जी का प्रिय माना गया है। ऐसे में अधिक मास में नारायण के साथ ही तुलसी जी पूजा करना भी बहुत ही फलदायी होता है। तो यहां जानिए सही तुलसी पूजा विधि और नियम।

अधिक मास तुलसी पूजन नियम- India TV Hindi
अधिक मास तुलसी पूजन नियम Image Source : INDIA TV

Adhik Maas Tulsi Puja Vidhi: 17 मई से ज्येष्ठ अधिक मास का आरंभ हो चुका है। इस माह को पुरुषोत्तम माह के नाम से भी जाना जाता है। यह माह भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे पावन और उत्तम महीना माना जाता है। विष्णु जी को तुलसी अति प्रिय है ऐसे में अधिक मास में तुलसी पूजन करने से अक्षय पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास में की गई तुलसी पूजा सामान्य दिनों की तुलना में हजार गुना अधिक फलदायी होती है। अधिक मास के पूरे महीने में तुलसी पूजा, दीपदान और परिक्रमा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख-समृद्धि भी आती है।

अधिक मास में तुलसी पूजा की सही विधि

  • अधिक मास के पूरे महीने रोजाना सुबह उठकर स्नान आदि करें और फिर साफ कपड़े धारण करें।
  • इसके बाद तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल लें और उसमें थोड़ा गंगाजल, कच्चा दूध मिला दें।
  • अब तुलसी के पौधे के जड़ में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते हुए जल अर्पित करें।
  • जल चढ़ाने के बाद तुलसी माता को हल्दी, कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएं।
  • माता तुलसी को सुहाग की सामग्री (जैसे चुनरी, चूड़ियां) और पीले फूल अर्पित करें। 
  • अधिक मास में शाम के समय भी तुलसी पूजा करें। 
  • सूर्यास्त के बाद तुलसी के पौधे के पास घी का एक दीपक जलाएं।
  • दीपक के नीचे थोड़े से अक्षत या फूलों की पंखुड़ियां जरूर रखें। सीधे जमीन पर दीपक न रखें।
  • तुलसी जी की आरती करें और कम से कम 3, 5 या 11 बार परिक्रमा करें।

अधिक मास में तुलसी पूजा नियम 

  • रविवार, एकादशी और द्वादशी के दिन तुलसी में जल न चढ़ाएं। कहा जाता है कि इन दिनों में तुलसी माता भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और जल चढ़ाने से उनका व्रत टूट सकता है।
  • अधिक मास में भूलकर भी रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते न तोड़ें। इसके अलावा सूर्यास्त के बाद भी तुलसी दल नहीं तोड़ना चाहिए।
  • तुलसी के पौधे के आसपास जूते-चप्पल न रखें और न ही वहां झाड़ू या कूड़ेदान जैसी चीजें होनी चाहिए। तुलसी के आसपास स्वच्छता का खास ध्यान रखें।
  • तुलसी में हमेशा ताजा और शुद्ध जल ही अर्पित करें। 
  • जूठे या गंदे हाथों से तुलसी के पौधे को भूलकर भी स्पर्श न करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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