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Ahoi Mata Ki Aarti: आज संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए जरूर पढ़ें अहोई माता की आरती

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Nov 01, 2026 06:19 am IST,  Updated : Nov 01, 2026 06:19 am IST

अहोई अष्टमी व्रत में पूजा-पाठ के साथ ही माता अहोई की आरती का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि बिना आरती के पूजा का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। तो यहां पढ़िए अहोई अष्टमी के दिन किए जाने वाली अहोई माता की आरती।

अहोई अष्टमी पूजा के दिन करें अहोई माता की आरती- India TV Hindi
अहोई अष्टमी पूजा के दिन करें अहोई माता की आरती Image Source : INDIA TV

प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिति को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन माता अपनी संतान की दीर्घायु और उसके उत्तम स्वास्थ्य के लिए निर्जला उपवास रखती हैं। माताएं पूरा दिन व्रत करने के बाद शाम के समय तारों को देखने के बाद ही अपने व्रत का पारण करती हैं। वहीं कुछ महिलाओं चंद्रमा के दर्शन करने के अहोई अष्टमी का व्रत खोलती हैं। अहोई अष्टमी का व्रत अत्यंत ही कठिन माना जाता है। इस दिन रात्रि में चंद्रोदय काफी देर से होता है।

बता दें कि अहोई अष्टमी का दिन अहोई आठें के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह व्रत अष्टमी तिथि के समय किया जाता है, जो माह का आठवां दिन होता है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने के साथ ही अहोई माता की आरती भी जरूर करें, तभी आपको व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

॥ आरती अहोई माता की ॥

जय अहोई माता,जय अहोई माता।

तुमको निसदिन ध्यावतहर विष्णु विधाता॥

जय अहोई माता...॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमलातू ही है जगमाता।

सूर्य-चन्द्रमा ध्यावतनारद ऋषि गाता॥

जय अहोई माता...॥

माता रूप निरंजनसुख-सम्पत्ति दाता।

जो कोई तुमको ध्यावतनित मंगल पाता॥

जय अहोई माता...॥

तू ही पाताल बसंती,तू ही है शुभदाता।

कर्म-प्रभाव प्रकाशकजगनिधि से त्राता॥

जय अहोई माता...॥

जिस घर थारो वासावाहि में गुण आता।

कर न सके सोई कर लेमन नहीं धड़काता॥

जय अहोई माता...॥

तुम बिन सुख न होवेन कोई पुत्र पाता।

खान-पान का वैभवतुम बिन नहीं आता॥

जय अहोई माता...॥

शुभ गुण सुंदर युक्ताक्षीर निधि जाता।

रतन चतुर्दश तोकूकोई नहीं पाता॥

जय अहोई माता...॥

श्री अहोई माँ की आरतीजो कोई गाता।

उर उमंग अति उपजेपाप उतर जाता॥

जय अहोई माता...॥

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व

अहोई अष्टमी का व्रत काफी कठिन माना जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे दिन अन्न तो दूर जल भी ग्रहण नहीं करती हैं। आकाश में तारों का दर्शन करने के पश्चात ही अहोई अष्टमी का उपवास का पारण किया जाता है। अहोई अष्टमी का व्रत रखने से निःसंतान दंपति को तेजस्वी संतान की प्राप्ति होती है। वहीं जिनकी संतान है उन्हें लंबी आयु की प्राप्ति होती है। अहोई अष्टमी का व्रत करने से संतान पर आने वाली हर बला टल जाती है और उसका जीवन सुखमय, खुशहाल बन जाता है।

अहोई अष्टमी 2026 के दिन चंद्रमा और तारों के दर्शन का समय

  • अहोई अष्टमी के दिन चंद्रोदय का समय - 06:00 पी एम
  • अहोई अष्टमी के दिन तारों को देखने का समय - 06:00 पी एम

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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