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अहोई अष्टमी व्रत कथा, संतान की रक्षा और माता का आशीर्वाद पाने के लिए करें इसका पाठ

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Oct 31, 2026 05:30 pm IST,  Updated : Oct 31, 2026 05:30 pm IST

अहोई अष्टमी के दिन व्रत लेने वाली महिलाओं को व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। कथा का पाठ करने से माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और साथ ही संतान के जीवन में आने वाले संकट भी दूर होते हैं।

Ahoi Ashtami Vrat Katha- India TV Hindi
अहोई अष्टमी व्रत कथा Image Source : PINTEREST

अहोई अष्टमी के व्रत को अनहोनी टालने वाला माना जाता है। इस दिन माताएं संतान के संकटों को दूर करने के लिए और उनके जीवन में सुख-समृद्धि लाने के लिए व्रत रखती हैं। अहोई अष्टमी की रात में तारों को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत का पारण किया जाता है। साल 2026 में अहोई अष्टमी का व्रत 1 नवंबर को रखा जाएगा। इस दिन व्रत के साथ ही माताओं को अहोई अष्टमी की व्रत कथा का पाठ भी अवश्य करना चाहिए। आइए जान लेते हैं क्या है अहोई अष्टमी की व्रत कथा। 

अहोई अष्टमी व्रत कथा (Ahoi Ashtami Vrat Katha)

अहोई अष्टमी से जुड़ी व्रत कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक साहूकार था जिसकी एक बेटी थी और सात बेटे। साहूकार की सभी संताने विवाहित भी हो चुकी थीं। एक समय की बात है कि साहूकार की बेटी दिवाली से कुछ दिनों पहले अपने पिता के घर पहुंची। पिता के घर में रहते हुए एक बार जब उसकी सभी भाभियां घर को लीपने के लिए जंगल से मिट्टी लाने निकलीं तो वो भी अपनी भाभियों के साथ चली गई। मिट्टी निकालते समय साहूकार की बेटी की खुरपी उस स्थान पर रह रहे स्याहु (साही) के सात बेटों में से एक पर लग गई और वह बच्चा मर गया। बच्चे की मृत्यु से तिलमिलाई स्याहू ने कहा कि तुमने मेरे बच्चे को मारा है तो मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी। साहूकार की बेट यह सुनकर रोने लगी और अपनी भाभियों से एक-एक कर कहने लगी कि वो उसके बदने अपनी कोख बंधवा लें। 

ननंद की विनिती सुनने के बाद सबसे छोटी भाभी तैयार हो गई। इसके बाद छोटी भाभी की जब भी संतान होती तो साही के श्राप के कारण 7 दिन बाद मर जाती । इस तरह छोटी भाभी की सात संतानों की मृत्यु हो गई। अंत में एक पंडित जी के पास भाभी ने उपाय पूछा। पंडित जी ने बताया कि तुम सुरही गाय की सेवा करो, गाय की सेवा करके तुम्हें पुण्य प्राप्त करना होगा। पंडित जी की बात सुनने के बाद सबसे छोटी भाभी सुरही गाय की दिन-रात सेवा करने लगी। उसकी सेवा से प्रसन्न होकर एक दिन सुरही उसे साही के पास ले गई। इसके बाद छोटी भाभी ने साही की भी सेवा की। प्रसन्न होकर साही ने उसे सात पुत्र और सात बहुओं का आशीर्वाद प्रदान किया था। 

साही के आशीर्वाद से सबसे छोटी भाभी को जीवनभर मां बनने का सुख प्राप्त हुआ था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक कृष्ण अष्टमी पर स्याहु (साही) का चित्र बनाकर उसकी विधिवत पूजा करने से संतान के संकट दूर होते हैं। इसको अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अहोई माता, देवी पार्वती का स्वरूप हैं जिनकी पूजा से संतान की रक्षा होती है। यही कारण है कि आज भी महिलाएं अहोई अष्टमी के दिन व्रत रखती हैं और विधि-विधान से पूजा करती हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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