सामुद्रिक शास्त्र और प्राचीन धर्म ग्रंथों के अनुसार, स्त्रियों के माथे की बनावट के आधार पर आप उनके भाग्य, स्वभाव और जीवन के बारे में काफी कुछ जान सकते हैं। कहते हैं स्त्रियों के माथे की खास बनावट उनके भाग्यशाली और धनी होने का संकेत देती है। भविष्य पुराण में इस संबंध में एक श्लोक में कहा गया है, 'अर्द्धेन्दु प्रतिमा भोगमरोश मनायतम्। तत् श्रीभोगकरं श्रेष्ठं ललाटं वर योषिताम् ॥' अर्थात जिन स्त्रियों का माथा अष्टमी तिथि के चंद्रमा के आकार का यानी अर्धचंद्राकार होता है वे बेहद भाग्यशाली मानी जाती हैं। यदि यह माथा बहुत चौड़ा न हो और इस पर छोटे-छोटे बाल न हों, तो ऐसी स्त्री अत्यंत धनी और सौभाग्यशाली होती है।
स्कन्द पुराण के अनुसार शुभ माथे के लक्षण
स्कन्द पुराण के अनुसार, यदि किसी स्त्री का माथा आगे की ओर झुका हुआ न हो, उस पर छोटे-छोटे बाल न हों, उसका आकार अष्टमी के चंद्रमा के जैसा हो, नसों से रहित हो यानी माथे पर नसें न दिखाई दें और चौड़ाई में तीन उंगली जितना हो ऐसी स्त्री सौभाग्यवान होती हैं और इन्हें अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
माथे पर इन चिन्हों का होना बेहद शुभ
सामुद्रिक शास्त्र अनुसार स्त्रियों के माथे पर स्वस्तिक और त्रिशूल का चिन्ह होना अत्यंत शुभ माना जाता है। माथे पर बना स्वस्तिक चिन्ह अपार संपत्ति प्राप्त होने का संकेत देता है। कहते हैं ऐसी स्त्री को धन-दौलत और मान-सम्मान दोनों की प्राप्ति होती है। वहीं जिस स्त्री के माथे पर रेखाओं से त्रिशूल का चिह्न बना होता है, ऐसी स्त्री शासन करने वाली होती है या उसका पति बहुत उच्च पदाधिकारी बनता है।
समुद्र ऋषि के मतानुसार:
जिन स्त्रियों का ललाट तीन अंगुल से अधिक ऊंचा नहीं होता और साथ ही निर्मल, समतल और सुंदर होता है। माथे में नसें और रोएं दिखाई नहीं देते, ऐसी स्त्री की दीर्घ आयु होती है। साथ ही उसे सुख और अपार धन की प्राप्ति होती है।
माथे से जुड़े अशुभ लक्षण
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यदि ललाट की रेखाएं छोटी, कटी हुई या टेढ़ी-मेढ़ी हों, तो ऐसे व्यक्ति की उम्र कम होती है। यदि माथे पर उभरी हुई नसें और बहुत अधिक रोएं दिखाई दें तो यह अशुभ माना जाता है।
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