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Astrology: केतु देता है शौहरत और करियर में जबरदस्त उन्नति, कुंडली के इन 4 भावों में हो अगर विराजमान

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Jun 05, 2026 05:15 pm IST,  Updated : Jun 05, 2026 05:15 pm IST

Astrology: ज्योतिष शास्त्र में केतु को भले ही क्रूर ग्रहों के श्रेणी में रखा गया हो लेकिन कुछ विशेष भावों में बैठकर ये शुभ फल प्रदान करता है। आज इसी के बारे में हम आपको अपने इस लेख में जानकारी देंगे।

केतु ग्रह- India TV Hindi
केतु ग्रह Image Source : CANVA

Astrology: केतु ग्रह को ज्योतिष में छाया ग्रह की संज्ञा दी गई है और साथ ही यह क्रूर ग्रह भी माना जाता है। हालांकि कुंडली के 4 भावों में केतु का बैठना बेहद शुभ साबित हो सकता है। इन भावों में बैठकर केतु व्यक्ति को दौलत-शौहरत और करियर में उन्नति दिलाने वाला माना जाता है। साथ ही ऐसे लोग आध्यात्मिक रूप से भी काफी सक्रिय हो सकते हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि किन भावों में केतु का बैठना शुभ होता है।

कुंडली के तीसरे भाव में केतु 

कुंडली के तृतीय भाव को पराक्रम का कारक माना जाता है। इस भाव में केतु की स्थिति बेहद शुभ मानी जाती है। जिन लोगों की कुंडली के तीसरे भाव में केतु बैठता है वो लोग निडर और मेहनती होते हैं। ऐसे लोग स्वतंत्र विचार वाले माने जाते हैं। जीवन में रिस्क भी ऐसे लोग ले सकते हैं। तृतीय भाव में बैठा केतु व्यक्ति को समाज में शौहरत भी दिलाता है और साथ ही करियर के क्षेत्र में भी उच्च पदों तक ऐसे लोग पहुंचते हैं। 

कुंडली के छठे भाव में केतु 

छठे भाव में बैठा केतु व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय दिलाने वाला माना जाता है। जिस भी व्यक्ति के छठे भाव में केतु होता है वो जीवन में आ रही चुनौतियों के बीच भी दृढ़ता से खड़ा रहता है। ऐसे लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत अच्छी होती है। इसके साथ ही करियर और सामाजिक स्तर पर भी ऐसे लोग अच्छा प्रदर्शन करते हैं। 

कुंडली के आठवें भाव में केतु 

केतु ग्रह अगर कुंडली के आठवें भाव में हो तो व्यक्ति रहस्यमयी हो सकता है। ऐसे लोग गूढ़ विद्याओं जैसे विज्ञान, ज्योतिष, तंत्र में रुचि लेने वाले हो सकते हैं। पैतृक संपत्ति से लाभ ऐसे लोग पाते हैं और साथ ही जीवन में कभी न कभी अचानक से बड़ा धन लाभ भी इनको मिल सकता है। अगर ऐसे लोग रिसर्च कार्य करते हैं तो बड़ी उपलब्धि इनको मिल सकती है। समाज में सम्मान और नौकरी या कारोबार में भी सफल ऐसे लोग हो सकते हैं। 

कुंडली के बारहवें भाव में केतु 

कुंडली का बारहवां भाव मोक्ष, विदेश यात्रा का कारक माना जाता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में केतु द्वादश भाव में होता है ऐसे लोग आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि लेने वाले माने जाते हैं। इसके साथ ही दूरदर्शिता और अंतर्ज्ञानी भी ऐसे लोग हो सकते हैं। विदेशी कारोबार या विदेश में नौकरी करने से इनको जबरदस्त लाभ हो सकता है। ऐसे लोग अपने ज्ञान से समाज में ख्याति भी पाते हैं। 

इन सभी भावों के अलावा केतु अगर मित्र राशि में हो या फिर नवम भाव में हो तब भी अच्छे परिणाम व्यक्ति को मिल सकते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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