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Chanakya Niti: चाणक्य के अनुसार युद्ध के दौरान इन 5 नीतियां को अपनाना बेहद जरूरी, तभी मिलती है जीत

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : May 11, 2025 07:23 am IST,  Updated : May 11, 2025 07:23 am IST

Chanakya Niti: चाणक्य नीति के अनुसार युद्ध के दौरान कुछ नीतियों को अपनाकर ही शत्रु पर विजय प्राप्त की जा सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में।

Chanakya Niti- India TV Hindi
चाणक्य नीति Image Source : SOCIAL

Chanakya Niti: चाणक्य ने अपने ग्रंथ चाणक्य नीति में युद्ध के दौरान कई महत्वपूर्ण नीतियों का वर्णन किया है। इन नीतियों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति युद्ध में जीत हासिल कर सकता है। चाणक्य के अनुसार, युद्ध के दौरान शत्रु को कम नहीं आंकना चाहिए और ना ही उसे कमजोर समझने की गलती करनी चाहिए।

शत्रु को ना आंके कम 

चाणक्य नीति के अनुसार, अपने शत्रु को युद्ध के दौरान कम आंकना भारी पड़ सकता है। युद्ध के दौरान शत्रु की ताकत और कमजोरियों का सही तरीके से आकलन करना चाहिए। शत्रु को युद्ध के दौरान कम आंकने से हार भी झेलनी पड़ सकती है। चाणक्य कहते हैं जितता वही है जो अपने दुश्मन को कभी कम नहीं आंकता। 

शत्रु की हर गतिविधि पर होनी चाहिए नजर

चाणक्य के अनुसार, युद्ध की स्थिति में शत्रु की हर गतिविधि पर नजर रखना सबसे जरूरी होता है। शत्रु की योजनाओं और गतिविधियों को समझने से हम अपनी रणनीति तैयार कर सकते हैं और शत्रु को परास्त करने में यह नीति सबसे कारगर साबित होती है।

शत्रु को शक्ति ही नहीं बुद्धि से करें परास्त

चाणक्य कहते हैं कि शत्रु को बुद्धि से परास्त करना चाहिए। युद्ध में बुद्धि और चतुराई का उपयोग करके शत्रु को हराया जा सकता है। बुद्धि और चतुराई का उपयोग करते हुए शत्रु की कमजोरियों को जानकर फायदा प्राप्त किया जा सकता है और शत्रु पर जीत हासिल की जा सकती है। 

सही समय पर करें वार

चाणक्य के अनुसार, युद्ध की स्थिति में सही समय का इंतजार करना भी जरूरी होता है, यानि धैर्य की आवश्यकता भी युद्ध के दौरान होती है। युद्ध में सही समय पर मौका देखकर हमला करने से शत्रु की पराजय सुनिश्चित की जा सकती है। युद्ध के दौरान धैर्य भी एक बड़ा हथियार साबित हो सकता है।

साम, दाम, दंड, भेद की नीति

चाणक्य युद्ध में साम, दाम, दंड और भेद की नीति का उपयोग करने की भी सलाह देते हैं। साम का अर्थ है शत्रु को समझौता करने के लिए मजबूर करना, दाम का अर्थ है शत्रु को खरीदना, दंड का अर्थ है बात न मानने पर शत्रु को सजा देना और भेद का अर्थ है शत्रु की योजनाओं को भेदना। चाणक्य के अनुसार इन नीतियों को युद्ध के दौरान अपनाकर युद्ध में विजय प्राप्त की जा सकती है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)

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