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गणेश विसर्जन का आखिरी दिन कब है, नोट कर लें सही डेट और शुभ मुहूर्त

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Sep 21, 2026 07:17 am IST,  Updated : Sep 21, 2026 07:17 am IST

गणेश विसर्जन का आखिरी दिन अनंत चतुर्दशी होता है। इस दिन 10 दिनों से चले आ रहे गणेशोत्सव का समापन हो जाता है। जानिए इस साल गणपति विसर्जन का आखिरी दिन कब है।

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गणेश विसर्जन कब है? Image Source : CANVA

गणेश विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी का दिन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है जो इस बार 25 सितंबर को है। इस दिन श्रद्धालु बप्पा की विदाई करने से पहले उनकी विधि विधान पूजा करते हैं। फिर उन्हें भोग लगाते हैं और इसके बाद आरती करके बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। वहीं कुछ परिवारों में गणपति विसर्जन कुछ दिन पूर्व तीसरे, पांचवें या सातवें दिन ही कर दिया जाता है। वहीं मंदिरों और पंडालों में स्थापित की गई गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन अमूमन अनंत चतुर्दशी के दिन ही किया जाता है। चलिए अब जान लेते हैं गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त और विधि।

अनंत चतुर्दशी 2026 गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त

  • प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - 06:11 AM से 10:42 AM
  • अपराह्न मुहूर्त (चर) - 04:44 PM से 06:14 PM
  • अपराह्न मुहूर्त (शुभ) - 12:13 PM से 01:43 PM
  • रात्रि मुहूर्त (लाभ) - 09:14 PM से 10:43 PM
  • रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - 12:13 AM से 04:42 AM, सितम्बर 26
  • चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ - सितम्बर 24, 2026 को 11:18 PM बजे
  • चतुर्दशी तिथि समाप्त - सितम्बर 25, 2026 को 11:06 PM बजे

गणेश विसर्जन कैसे किया जाता है?

गणेश जी की प्रतिमा विसर्जित करने से पहले गणेश भगवान की पूजा व आरती की जाती है, उन्हें फूल चढ़ाये जाते हैं और साथ ही भोग लगाया जाता है। इसके बाद, ढोल-नगाड़ों के साथ धूमधाम से गणपति बप्पा की प्रतिमा को नदी या तालाब तक लाया जाता है। फिर भगवान के नाम के जयकारों के साथ यानी 'गणपति बप्पा मोरया' और 'गणेश महाराज की जय' कहते हुए बप्पा की विदाई की जाती है। आमतौर पर गणेश विसर्जन का उत्सव रातभर और अगले दिन सुबह तक चलता है। गणपति बप्पा की प्रतिमा का विसर्जन घर पर भी किया जा सकता है। इसके लिए आपको एक साफ बड़े बर्तन की जरूरत होगी। उस बर्तन में पानी भरे और थोड़ा सा गंगाजल मिला लें। फिर उसमें फूल डालें। इसके बाद पूरी श्रद्धा से बप्पा की प्रतिमा को इस जल में विसर्जित कर दें। आज के समय में ज्यादातर श्रद्धालु गणपति बप्पा का ऐसे ही विसर्जन करते हैं। वहीं पंडालों और मंदिरों में स्थापित की गई बप्पा की भव्य प्रतिमाओं का विसर्जन नदी या तालाब में किया जाता है। 

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