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जगन्नाथ रथ यात्रा की सबसे रोचक परंपरा 'हेरा पंचमी', जब माता लक्ष्मी इमली के पेड़ के पीछे छिपकर देती हैं ये खास आदेश

 Published : Jul 20, 2026 10:54 am IST,  Updated : Jul 20, 2026 10:55 am IST

जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान कई तरह की विशेष परंपराएं निभाई जाती हैं, जिनमें से एक है हेरा पंचमी। इस खास परंपरा के तहत माता लक्ष्मी के सेवक भगवान जगन्नाथ के रथ के एक हिस्से को क्षति पहुंचाते हैं। इस खास अनुष्ठान को ही हेरा पंचमी के नाम से जाना जाता है।

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जगन्नाथ रथ यात्रा के पांचवें दिन निभाई जाती है ये खास परंपरा Image Source : INDIA TV

हेरा पंचमी, जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान किए जाने वाला एक खास अनुष्ठान है, जो इस बार 20 जुलाई 2026 को किया जाएगा। इस दौरान माता लक्ष्मी, सुवर्ण महालक्ष्मी के रूप में गुंडिचा मंदिर में आती हैं और जगन्नाथ भगवान से पुरी के मुख्य मंदिर में वापस आने का आग्रह करती हैं। इस अनुष्ठान के लिए माता लक्ष्मी को गुंडिचा मंदिर तक एक पालकी में लाया जाता है। फिर पुजारी माता को भगवान जगन्नाथ से मिलाते हैं। जानिए क्या है इस खास अनुष्ठान के पीछे की मान्यता। 

हेरा पंचमी अनुष्ठान का रहस्य

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान जगन्नाथ देवी लक्ष्मी को बिना बताए ही यात्रा पर चले गए थे, जिससे देवी लक्ष्मी नाराज हो गई थीं। इसी कारण से इस अनुष्ठान के दौरान माता लक्ष्मी नाराज होकर गुंडिचा मंदिर में पहुंचती हैं और अपने एक सेवक से जगन्नाथ भगवान के रथ के एक हिस्से को नुकसान पहुंचाने का आदेश देती हैं, जिसे रथ भंग करना कहा जाता है। कहते हैं ये आदेश माता लक्ष्मी गुंडिचा मंदिर के बाहर एक इमली के पेड़ के पीछे छिपकर देती हैं। इसके बाद माता लक्ष्मी हेरा गौरी साही नाम के गोपनीयता मार्ग से शाम के समय जगन्नाथ मंदिर पहुंच जाती हैं। कहते हैं यह खास परंपरा भगवान जगन्नाथ और देवी लक्ष्मी के मधुर संबंध को दर्शाती है। इस परंपरा के तहत माता लक्ष्मी प्रस्थान करने से पहले भगवान जगन्नाथ से वापस मंदिर आने का अनुरोध करती हैं, जिस पर भगवान अपनी सहमति देते हुए माता को एक माला भेंट करते हैं।

इस अनुष्ठान के कुछ दिनों बाद भगवान जगन्नाथ की बहुदा यात्रा निकाली जाती है, जो इस बार 24 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी। इस यात्रा में भगवान अपने बड़े भाई और बहन के साथ जगन्नाथ मंदिर के लिए निकलते हैं। साथ ही मंदिर वापसी के दौरान उनके रथ मौसी मां मंदिर पर रुकते हैं। यहां भगवान जगन्नाथ को पोडा पीठा नाम का भोग अर्पित किया जाता है। ये खास भोग चावल और नारियल से तैयार किया जाता है। 

जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व

स्कंद पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इस पावन यात्रा में शामिल होता है, वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। साथ ही उसका जीवन सुखों से भर जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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