1. Hindi News
  2. धर्म
  3. जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान रस्सी को छूना क्यों माना जाता है जरूरी? जानें क्या है मान्यता

जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान रस्सी को छूना क्यों माना जाता है जरूरी? जानें क्या है मान्यता

 Published : Jul 16, 2026 02:11 pm IST,  Updated : Jul 16, 2026 02:11 pm IST

जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 से शुरू हो चुकी है। इस यात्रा में लाखों भक्त हिस्सा लेते हैं और भक्तों के द्वारा रस्सी से रथों को खींचा जाता है। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि रथ यात्रा के दौरान रस्सी को छूना बेहद जरूरी क्यों माना जाता है।

Rath Yatra 2026- India TV Hindi
रथ यात्रा 2026 Image Source : PTI

जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 16 जुलाई 2026 से हो चुकी है। 9 दिवसीय इस यात्रा के दौरान सात दिन भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी गुंडिचा माता के पास रहते हैं। रथ यात्रा में लाखों की संख्या में भक्त हिस्सा लेते हैं और इस दौरान रस्सियों के द्वारा भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा जी के रथों को खींचा जाता है। हर भक्त रस्सियों को छूना चाहता है। रस्सियों को छूने की पीछे जुड़ी क्या मान्यताएं इसके बारे में ही आज हम आपको अपने इस लेख में आपको जानकारी देंगे। 

अश्वमेध यज्ञ जितना पुण्य 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान जो भक्त रथ से जुड़ी रस्सियों को छू लेता है उसे अश्वमेध यज्ञ जितना पुण्य फल प्राप्त होता है। साथ ही कुछ पौराणिक मान्यताओं में यह भी बताया गया है कि सौ यज्ञों जितने पुण्य की प्राप्ति रथ यात्रा के दौरान रस्सी को छूने मात्र से प्राप्त हो सकती है। इसलिए हर भक्त रथ यात्रा में पहुंचने के बाद रथ से जुड़ी रस्सियों को अवश्य छूना चाहता है। 

रस्सी को छूने से पाप से मिलती है मुक्ति 

मान्यता है कि जो भी भक्त रथ यात्रा के दौरान रस्सी को छू लेता है उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंत समय में उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। सिर्फ इतना ही रस्सी को छूने मात्रा से आपके पिछले जन्म में किए गए पाप भी धुल सकते हैं। जो लोग गर्भगृह में भगवान जगन्नाथ के दर्शन नहीं कर पाते वो रथ यात्रा के दौरान रस्सी को छूकर प्रभु से जुड़ाव महसूस कर सकते हैं। यानि रथ की रस्सी को छूने से प्रभु के दर्शन जितने शुभ परिणाम आपको मिल सकते हैं। 

आध्यात्मिक उन्नति 

रथ यात्रा के दौरान लाखों की संख्या में भक्त पुरी पहुंचते हैं और ऊंच-नीच, जात-पात का भेदभाव मिटाकर रथ यात्रा में शामिल होते हैं। यानि समानता का संगम भी रथ यात्रा के दौरान देखने को मिलता है। ऐसे में जो भक्त इस पावन माहौल में रस्सी को छूता है उसे आध्यात्मिक उन्नति की भी प्राप्ति होती है। वहीं जो लोग पहले से ही अध्यात्म के मार्ग पर हैं और अलौकिक अनुभव प्राप्त करना चाहते हैं भगवान जगन्नाथ उनपर भी कृपा बरसाते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

ये भी पढ़ें:

सावन में इस फूल से करें शिव आराधना, अपराजिता के उपाय दिलाएंगे महादेव की कृपा, खुलेंगे उन्नति के रास्ते

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। धर्म से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।