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जन्माष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा 3 या 4 सितंबर? नोट कर लें इस व्रत की विधि

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Aug 31, 2026 02:21 pm IST,  Updated : Aug 31, 2026 02:27 pm IST

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और शुभ मुहूर्त में बाल गोपाल की विधि विधान पूजा करते हैं। जानिए इस साल जन्माष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा।

Janmashtami Vrat 2026- India TV Hindi
जन्माष्टमी व्रत 2026 Image Source : INDIA TV

जन्माष्टमी का पावन पर्व पूरे भारत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं और बाल गोपाल का सुंदर श्रृंगार करते हैं। फिर शुभ मुहूर्त में कान्हा की विधि विधान पूजा की जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा के लिए रात 12 बजे का समय सबसे शुभ माना जाता है। कहते हैं इसी समय पर भगवान विष्णु ने अपने आठवें अवतार श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था। कहते हैं जो कोई भी भक्त इस शुभ दिन पर व्रत रखता है उसके सारे मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। बता दें कई लोग जन्माष्टमी का व्रत रात 12 बजे तक रखते हैं तो कई अगले दिन की सुबह तक ये व्रत रहते हैं। चलिए जानते हैं इस साल ये व्रत कब रखा जाएगा और इस व्रत को करने की विधि क्या है। 

जन्माष्टमी का व्रत कब है 2026

जन्माष्टमी का व्रत 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को रखा जाएगा। पंचांग अनुसार यह भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव होगा। बता दें जन्माष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11:57 से 12:43 बजे तक रहेगा। 

जन्माष्टमी व्रत पारण डेट 2026

धर्म शास्त्र के अनुसार जन्माष्टमी व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाना चाहिए। अगर आप भी अगले दिन व्रत खोलते हैं तो आप जन्माष्टमी व्रत का पारण 5 सितंबर की सुबह 06:01 के बाद कर सकते हैं। वहीं जो लोग जन्माष्टमी के दिन ही व्रत खोल लेते हैं, वे रात 12:43 बजे के बाद इस व्रत का पारण कर सकते हैं।

जन्माष्टमी तिथि और नक्षत्र समय 2026

  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ - 04 सितंबर 2026 को 02:25 AM बजे
  • अष्टमी तिथि समाप्त - 05 सितंबर 2026 को 12:13 AM बजे
  • रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ - 04 सितंबर 2026 को 12:29 AM बजे
  • रोहिणी नक्षत्र समाप्त - 04 सितंबर 2026 को 11:04 PM बजे

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम और विधि

  • जन्माष्टमी का व्रत सूर्योदय के साथ शुरू हो जाता है।
  • इस व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता, हालांकि आप फलाहारी भोजन यानी व्रत वाला भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
  • कई लोग इस व्रत को निर्जला भी रखते हैं।
  • व्रत की शुरुआत सुबह स्नान के बाद संकल्प लेकर की जाती है।
  • फिर श्रद्धालु रात की पूजा की तैयारी में लग जाते हैं।
  • इस दिन बाल गोपाल की मूर्ति को सजाना बेहद शुभ माना जाता है।
  • भक्त घर के मंदिर में या फिर अन्य किसी साफ स्थान पर बाल गोपाल की मूर्ति या चित्र स्थापित करते हैं और उन्हें झूला, पालना, बांसुरी, मोर पंख और फूलों से सजाते हैं।
  • इस दिन बाल गोपाल को माखन-मिश्री, धनिये की पंजिरी और मखाने की खीर का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
  • रात में श्रद्धालु भगवान को पंचामृत से स्नान कराते हैं। 
  • स्नान के बाद भगवान को नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और उन्हें उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाया जाता है।
  • फिर भगवान की आरती की जाती है और इसके बाद कई श्रद्धालु अपना व्रत खोल लेते हैं।

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