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कुंडली के इन 4 भावों में गुरु की स्थिति होती है बेहद शुभ, ऐसे लोगों को माना जाता है किस्मत का धनी

गुरु को ज्योतिष में शुभ ग्रह माना गया है। कुंडली में इसकी स्थिति का व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि कुंडली के किन भावों में गुरु सबसे शुभ होता है।

Written By: Naveen Khantwal
Published : Nov 09, 2025 03:48 pm IST, Updated : Nov 09, 2025 03:48 pm IST
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Image Source : UNSPLASH ज्योतिष में गुरु

ज्योतिष शास्त्र में गुरु को शुभ ग्रह कहा गया है। गुरु की शुभ स्थिति व्यक्ति को जीवन में बड़ा लाभ दिलाती है, वहीं प्रतिकूल स्थिति में ये जीवन में कठिनाइयां पैदा कर सकते हैं। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि ज्ञान, संतान, धन और ऐश्वर्य के कारक ग्रह कुंडली के किन भावों में बैठकर सबसे शुभ फल प्रदान करते हैं। 

प्रथम भाव में गुरु 

कुंडली के पहले भाव में गुरु का स्थित होना बेहद शुभ होता है। इस भाव में बैठकर गुरु की दृष्टि पंचम और नवम भाव पर होती है। ऐसे में व्यक्ति को भाग्य का भरपूर सहयोग मिलता है। प्रथम भाव आपकी मानसिकता को प्रदर्शित करता है, इसलिए जब भी गुरु प्रथम भाव में बैठता है तो व्यक्ति के विचार सकारात्मक होते हैं। ऐसे लोग आत्मविश्वास से भरे होते हैं और अपने व्यवहार से लोगों का दिल जीतते हैं। 

पंचम भाव में गुरु 

कुंडली का पंचम भाव बुद्धि, संतान, प्रेम और रचनात्मक क्षमता का होता है। इस भाव में गुरु के बैठने से व्यक्ति को रचनात्मक कौशल प्राप्त होते हैं। ऐसे लोगों की बुद्धि तीव्र होती है और शिक्षा के क्षेत्र में ये सफलता प्राप्त करते हैं। इनको प्रेम जीवन में भी शुभ फलों की प्राप्ति होती है। संतान पक्ष से भी ऐसे लोग शुभता प्राप्त करते हैं। इनको भी समय-समय पर भाग्य का सहयोग अवश्य मिलता है। 

नवम भाव में गुरु 

कुंडली के नवम भाव को धर्म, भाग्य और उच्च शिक्षा का कारक माना जाता है। इस भाव में बैठा गुरु व्यक्ति को सौभाग्यशाली बनाता है। ऐसे लोगों को हर कदम पर भाग्य का सहयोग प्राप्त हो सकता है। इसके साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्रों में भी इनको सफलता मिलती है। ऐसे लोग उच्च शिक्षा अर्जित कर सकते हैं और शोध कार्यों में भी इनको सफलता मिलती है। 

एकादश भाव में गुरु 

कुंडली के एकादश भाव को लाभ का कारक माना गया है। यहां गुरु का विराजमान होना आपको भाग्यशाली तो बनाता ही है साथ ही आपको जीवन के हर क्षेत्र में लाभ भी प्राप्त हो सकता है। गुरु एकादश भाव में बैठकर पारिवारिक जीवन में भी शुभ फल प्रदान कर सकता है। यहां गुरु का होना व्यक्ति को साहसी और पराक्रमी भी बनाता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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