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Jyeshtha Purnima 2025: ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत कब रखा जाएगा 10 या 11 जून? जानें सही तिथि और शुभ पूजा मुहूर्त

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Jun 07, 2025 04:01 pm IST,  Updated : Jun 07, 2025 04:01 pm IST

Jyeshtha Purnima 2025: ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत हिंदू धर्म में बेहद शुभ फलदायक माना जाता है। जून के माह में इस बार ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत है। आइए ऐसे में जान लेते हैं, पूर्णिमा व्रत की सही तिथि और पूजा मुहूर्त।

Jyeshtha Purnima 2025- India TV Hindi
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2025 Image Source : FILE IMAGE

Jyeshtha Purnima 2025: हिंदू धर्म में पूर्णिमा व्रत को बेहद शुभ माना जाता है। हर माह में पूर्णिमा का व्रत भक्तों के द्वारा रखा जाता है। इस दिन देवी-देवताओं के साथ ही पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भी धार्मिक क्रियाकलाप किए जाते हैं। पूर्णिमा के दिन चंद्र दर्शन करने से मानसिक और शारीरिक रुप से आप में सुखद बदला आते हैं। जून के महीने में आने वाली पूर्णिमा के दिन भी आप धार्मिक क्रियाकलाप करके लाभ पा सकते हैं। आइए जान लेते हैं कि साल 2025 में जून के माह में पड़ने वाली ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत कब रखा जाएगा और इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा। साथ ही ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि को लेकर जो संशय आपके मन में है उसे भी हम दूर करेंगे। 

ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि और शुभ मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 10 जून को सुबह 11 बजकर 39 मिनट से शुरू हो जाएगी। वहीं पूर्णिमा तिथि का समापन 11 जून को दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत 11 जून को रखा जाना ही शुभ माना जाएगा। हालांकि, ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन रखा जाने वाला वट सावित्री व्रत 10 जून को ही रखा जाएगा क्योंकि इस दिन वट सावित्री की कथा दोपहर के समय की जाएगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन आप सुबह 5 बजे से 7 बजे के बीच पूजा और व्रत का संकल्प ले सकते हैं। सूर्योदय के बाद 6 बजे से रात्रि 8 बजे तक आप लक्ष्मी पूजन, चंद्र दर्शन जैसे शुभ कार्य कर सकते हैं। 

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन क्या करें क्या न करें 

ज्येष्ठ पूर्णिमा हिंदू धर्म के शुभ दिनों में से एक है। इस दिन आप देवी-देवताओं की पूजा के साथ ही पितरों का तर्पण कर सकते हैं। इसके साथ ही आध्यात्मिक विकास के लिए भी यह दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन आप धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन कर सकते हैं, योग-ध्यान कर सकते हैं। पवित्र नदियों में स्नान और दान से भी आपको उचित परिणाम प्राप्त होते हैं। हालांकि, इस दिन आपको मांस-मदिरा जैसी तामसिक चीजों को खाने से बचना चाहिए। इसके साथ ही वासना जनित विचारों को अपने ऊपर हावी न होने दें। एकांत में रहकर, मौन रहकर आप अलौकिक अनुभव इस दिन प्राप्त कर सकते हैं। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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