ज्योतिष शास्त्र में केतु को छाया ग्रह माना गया है जो अध्यात्म, मोक्ष, वैराग्य का कारक भी है। केतु की महादशा का काल 7 वर्ष का होता है। सामान्य तौर पर केतु को पाप ग्रह माना जाता है लेकिन कुछ ग्रहों की अंतर्दशा के दौरान केतु की महादशा शुभ फल देने वाली भी साबित हो सकती है। इन ग्रहों की अंतर्दशा के दौरान धन, पद और पारिवारिक जीवन में भी व्यक्ति को अनुकूल परिणाम मिल सकते हैं। आइए विस्तार से जान लेते हैं केतु के साथ किन ग्रहों की अंतर्दशा को शुभ फलदायक माना जाता है।
केतु की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा
केतु की महादशा के दौरान शुक्र की अंतर्दशा लगभग 1 साल और 2 महीने की होती है। केतु-शुक्र की दशा को बेहद शुभ माना जाता है। इस दशा के दौरान व्यक्ति की रचनात्मकता में वृद्धि देखने को मिल सकती है और करियर के क्षेत्र में ऊंचाइयां मिलनी शुरू हो जाती हैं। जो लोग कला, मीडिया, अभिनय, गायन, वादन आदि के क्षेत्र में हैं उनको बड़ी सफलता मिलने के योग इस दशा के दौरान रहते हैं। सुख-सुविधाओं में वृद्धि भी केतु-शुक्र की दशा के दौरान होती है। अचानक से आय के नए स्रोत मिल सकते हैं और व्यक्ति अपना कार्य भी शुरू कर सकता है।
केतु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा
देवगुरु बृहस्पति और केतु का संबंध ज्योतिष में बेहद खास माना गया है। ये दोनों ही ग्रह आध्यात्मिक और बौद्धिक प्रगति देने वाले माने जाते हैं। ऐसे में केतु के साथ गुरु की अंतर्दशा में शुभ परिणाम व्यक्ति को प्राप्त हो सकते हैं। नौकरी पेशा लोगों को पदोन्नति मिल सकती है वहीं कारोबारियों को भी धन लाभ केतु-गुरु की दशा के दौरान मिल सकता है। इन दोनों ग्रहों की दशा के दौरान आय के नए स्रोत मिलने के भी योग बनते हैं। केतु-गुरु के प्रभाव के चलते व्यक्ति की समाज में प्रतिष्ठा भी बढ़ती है और कार्यक्षेत्र में भी उच्च पद प्राप्त हो सकता है।
केतु की महादशा में बुध की अंतर्दशा
केतु की महादशा में बुध की अंतर्दशा का फल भी शुभ माना गया है। केतु-बुध की दशा के दौरान व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता बढ़ सकती है और सही समय पर सही फैसले व्यक्ति ले सकता है। कारोबारियों को इस दशा के दौरान बेहद अच्छे सौदे मिल सकते हैं और नौकरी पेशा लोग पदोन्नति पा सकते हैं। केतु-बुध की दशा के दौरान उन लोगों को बेहद शुभ परिणाम मिल सकते हैं जो बैंकिंग, लेखन, मार्केटिंग, आईटी आदि के क्षेत्रों में कार्यरत हैं। यह दशा विद्यार्थियों के जीवन में भी अच्छे बदलाव लेकर आ सकती है। केतु के साथ ही अगर आप जानना चाहते हैं कि राहु की महादशा में किन ग्रहों की अंतर्दशा शुभ परिणाम देती है तो इस संबंध में हमारी वेबसाइट पर लेख आप पढ़ सकते हैं।
ध्यान रखने योग्य बात
केतु की महादश के दौरान शुक्र, गुरु और बुध की अंतर्दशा शुभ परिणाम दे सकती है लेकिन इन ग्रहों की कुंडली में स्थिति को देखना भी बेहद जरूरी होता है। अगर कुंडली में ये ग्रह शुभ हैं और केतु के साथ भी इनका संबंध सही है तो शुभ परिणाम मिलने के चांस ज्यादा रहते हैं। वहीं कुंडली में शुक्र, गुरु, बुध शुभ नहीं हैं तो शुभ फलों की प्राप्ति में दिक्कतें भी हो सकती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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