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क्या आप भी नवरात्रि और दुर्गा पूजा को एक समझते हैं? यहां समझिए दोनों के बीच का अंतर

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Oct 13, 2026 10:49 am IST,  Updated : Oct 13, 2026 10:49 am IST

अधिकतर लोग दुर्गा पूजा और नवरात्रि को एक ही मानते हैं। लेकिन दोनों में कई प्रमुख अंतर होते हैं। हालांकि नवरात्रि और दुर्गा पूजा दोनों में मां भगवती की उपासना की जाती है।

दुर्गा पूजा 2026- India TV Hindi
दुर्गा पूजा 2026 Image Source : PEXELS

नवरात्रि हिंदू धर्म का सबसे बड़ा और प्रमुख त्यौहार माना जाता है। शक्ति की उपासना के लिए नवरात्रि का समय अत्यंत ही शुभ होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा के सभी 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने से जातक के सभी दुख-तकलीफ दूर हो जाता है और उसकी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। नवरात्रि पूरे भारत में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाई जाती है। कई लोग नवरात्रि और दुर्गा पूजा को एक मानते हैं लेकिन दोनों में अंतर अंतर है। दुर्गा पूजा विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम और त्रिपुरा समेह पूर्वी भारत में बड़े ही भक्तिभाव और उल्लास के साथ मनाया जाता है। तो आइए जानते हैं दुर्गा पूजा और नवरात्रि के बीच के प्रमुख अंतर के बारे में। 

शारदीय नवरात्रि और दुर्गा पूजा में अंतर

नवरात्रि का यह उत्सव आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होकर नवमी तक यानी पूरे 9 दिनों तक चलता है। इसके बाद दशमी के दिन दशहरा मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि का आरंभ 11 अक्टूबर से हुआ है और समाप्त 19 अक्टूबर 2026 को होगा। वहीं दुर्गा पूजा षष्ठी दिन से शुरू होता और विजयादशमी तक यानी मुख्य रूप से 5 दिनों तक चलता है। हालांकि दुर्गा पूजा तैयारी महालया से शुरू हो जाती है। 

नवरात्रि और दुर्गा पूजा एक ही तिथि में पड़ती है लेकिन दोनों को अलग-अलग रूप से जाना जाता है। नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा जाती है। वहीं  दुर्गा पूजा में मां दुर्गा को महिषासुर मर्दिनी की आराधना और पृथ्वी पर आगमन की परंपरा से जुड़ा होता है। दुर्गा पूजा में माता दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और पूजा पंडाल सजाए जाते हैं। दोनों पर्व शक्ति की उपासना और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देते हैं।

पूजा का स्वरूप

नवरात्रि

नवरात्रि में 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों (नवदुर्गा) शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक की पूजा की जाती है। नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक चलती है।

दुर्गा पूजा

दुर्गा पूजा में मुख्य रूप से महिषासुरमर्दिनी रूप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा में मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिक, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती भी विराजमान होते हैं। बंगाल की परंपरा में षष्ठी के दिन देवी का बोधन और आमंत्रण किया जाता है। इसी दिन से दुर्गा पूजा का मुख्य चरण आरंभ होता है।

दुर्गा पूजा कैलेंडर 2026

  • 16 अक्टूबर 2026- षष्ठी पूजा, बिल्व निमंत्रण, कल्पारंभ अकाल बोधन, आमंत्रण और अधिवास

  • 17 अक्टूबर 2026 - सप्तमी पूजा- नवपत्रिका पूजा, कोलाबोऊ पूजा

  • 19 अक्टूबर 2026- अष्टमी पूजा- कुमारी पूजा संधि पूजा

  • 20 अक्टूबर 2026- नवमी पूजा- बंगाल महा नवमी, दुर्गा बलिदान

  • 21 अक्टूबर 2026- बंगाल विजयादशमी, बंगाल दुर्गा विसर्जन, सिंदूर उत्सव

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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