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कुंडली के इन 3 भावों में बैठकर गुरु देते हैं शुभ प्रभाव, क्या आपके भी इन्हीं भावों में हैं विराजमान?

 Written By: Naveen Khantwal
 Published : Aug 20, 2026 09:15 am IST,  Updated : Aug 20, 2026 09:15 am IST

गुरु ग्रह को कुंडली के कुछ भावों में बेहद शुभ फल देने वाला माना जाता है। आज हम आपको इन्हीं भावों के बारे में जानकारी देंगे।

Guru Grah- India TV Hindi
गुरु 3 भावों में शुभ Image Source : PEXELS

ज्योतिष शास्त्र में गुरु को शुक्र ग्रह का दर्जा प्राप्त है। गुरु ग्रह ज्ञान, वैभव, भाग्य, संतान, धन और आध्यात्मिकता के कारक ग्रह भी हैं। सभी नौ ग्रहों में इनको सबसे शुभ माना जाता है। इनकी स्थिति अगर कुंडली में शुभ हो तो व्यक्ति को जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त हो सकती हैं। इसके साथ ही गुरु की शुभ स्थिति प्रेम, वैवाहिक और करियर जीवन में भी व्यक्ति को सुखद फल दे सकती है। गुरु जिन लोगों की कुंडली में शुभ होता है उन्हें भाग्य का भी भरपूर सहयोग प्राप्त हो सकता है। आइए अब जान लेते हैं कि कुंडली के किन भावों में गुरु सबसे शुभ फल प्रदान कर सकते हैं। 

प्रथम भाव 

कुंडली के प्रथम भाव में बैठकर गुरु व्यक्ति को जीवन में हर सुख-सुविधा प्रदान कर सकते हैं। प्रथम भाव में बैठे गुरु की दृष्टि ज्ञान के पंचम और भाग्य के नवम भाव पर भी होती है। ऐसे में गुरु व्यक्ति को भाग्यशाली और ज्ञानी बनाते हैं। प्रथम भाव में गुरु के बैठने से व्यक्ति आकर्षक भी होता है। प्रथम भाव में बैठा गुरु कई अशुभ फलों को नष्ट करने वाला माना जाता है। गुरु की इस स्थिति के चलते व्यक्ति अपने ज्ञान से लोगों को प्रभावित कर सकता है। इसके साथ ही करियर और पारिवारिक जीवन में भी व्यक्ति को सुखद फल प्राप्त होते हैं। 

पंचम भाव 

कुंडली के पंचम भाव को बुद्धि, शिक्षा, प्रेम संबंध और रचनात्मकता का कारक माना जाता है। इस भाव में बैठकर भी गुरु व्यक्ति को सुखद परिणाम प्रदान करते हैं। गुरु इस भाव के मुख्य कारक भी हैं इसलिए जिन भी लोगों की कुंडली में गुरु पंचम में होते हैं वो लोग जीवन में ख्याति पा सकते हैं। यहां विराजमान गुरु व्यक्ति को बुद्धिमान और शास्त्रों का ज्ञाता बना सकते हैं। ऐसे लोगों को प्रेम और वैवाहिक जीवन में भी सुखद फल प्राप्त होते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपल्बधि ऐसे लोग पा सकते हैं। इनकी वाणी का सकारात्मक प्रभाव हर किसी पर पड़ सकता है। 

नवम भाव

कुंडली का नवां भाव भाग्य और उच्च शिक्षा कारक होता है। इस भाव में स्थिति गुरु भी बेहद शुभ फल देने वाले होते हैं। ऐसे लोगों को भाग्य का हर क्षेत्र में साथ मिल सकता है। कम मेहनत करके भी ऐसे लोग भाग्य के सहारे ऊंचाइयां छू सकते हैं। ऐसे लोग शिक्षा क्षेत्र में भी अच्छा प्रदर्शन करते हैं। पारिवारिक और सामाजिक जीवन में तो इन्हें शुभ फल मिलते ही हैं लेकिन धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में भी ऐसे लोग ऊंचाइयां छू सकते हैं। ऐसे लोग स्वभाव से बहुत सरल और परोपकारी हो सकते हैं। अगर आप जानना चाहते हैं कि कुंडली के सभी 12 भावों में गुरु कैसे फल देते हैं तो हमारी वेबसाइट पर इस बारे में विस्तार से पढ़ सकते हैं। 

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