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विरासत में मिलेगी प्रॉपर्टी या अपने दम पर बनेगा सपनों का घर? कुंडली के चौथे भाव में छिपा है जवाब

 Written By: Laveena Sharma
 Published : Aug 19, 2026 01:20 pm IST,  Updated : Aug 19, 2026 01:22 pm IST

आज के समय में हर व्यक्ति का सबसे बड़ा सपना अपना खुद का मकान बनाना होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जीवन में भूमि, भवन या मकान का सुख मिलेगा या नहीं, इसका रहस्य कुंडली के चौथे भाव में छिपा होता है।

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कुंडली के चौथे भाव से जानिए मकान सुख का योग Image Source : INDIA TV

हर व्यक्ति अपना सपनों का घर बनाने का सपना देखता है। किसी का ये सपना जल्दी साकार हो जाता है तो किसी को इसके लिए काफी लंबा संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुंडली के चौथे भाव और मंगल ग्रह की स्थिति देखकर आप ये आसानी से जान सकते हैं कि आपका ये सपना कब और कैसे पूरा होगा। ज्योतिष शास्त्र अनुसार, जन्म-कुंडली में चौथे भाव का संबंध भूमि, जायदाद और मकान से होता है, जबकि मंगल ग्रह को भूमि का कारक माना गया है। जमीन-जायदाद की प्राप्ति के लिए चौथे भाव के स्वामी (चतुर्थेश) और चौथे भाव में शुभ ग्रहों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। चलिए जानते हैं कुंडली देखकर आप कैसे जान सकते हैं कि आपको मकान सुख कब प्राप्त होगा।

कुंडली में जमीन-जायदाद प्राप्ति के योग

  1. यदि चौथे भाव का स्वामी कुंडली के किसी भी केंद्र (1, 4, 7, 10) या त्रिकोण (1, 5, 9) भाव में स्थित हो, तो व्यक्ति भवनों का स्वामी बनता है।
  2. यदि चौथे भाव का स्वामी अपनी उच्च राशि, मूल त्रिकोण, अपनी खुध की राशि या फिर मित्र की राशि में शुभ ग्रहों से युक्त हो, तो जातक को जमीन-जायदाद का खूब सुख प्राप्त होता है।
  3. यदि जन्म-कुंडली में मंगल अपनी उच्च राशि का होकर लग्न, पंचम या नवम भाव में काफी मजबूत स्थिति में बैठा है और चौथे भाव पर किसी पाप ग्रह की दृष्टि या उपस्थिति नही है, तो व्यक्ति के पास खूब जमीन-जायदाद होगी।
  4. यदि भूमि और जायदाद के योग में दशमेश, नवमेश और लाभेश ग्रहों का आपस में संबंध या संयोग बनता है, तो व्यक्ति अथाह संपत्ति का मालिक बनता है और इतना ही नहीं वह जमीन-जायदाद से जुड़े कारोबार से भी भारी लाभ उठाता है।

किस तरीके से मिलेगा अपना घर? 

  • यदि चौथे भाव का स्वामी अकेले या किसी शुभ ग्रह के साथ केंद्र भाव (1, 4, 7, 10वें भाव) में स्थित है, तो व्यक्ति माता-पिता द्वारा अर्जित जायदाद पर अपना घर बनाएगा।
  • यदि चौथे भाव का स्वामी त्रिकोण भाव (1, 5, 9वें भाव) में स्थित है, तो व्यक्ति को सरकार से प्राप्त या अपने पूर्व जन्मों के पुण्य के बल से भूमि पर मकान बनाने का अवसर मिलेगा।
  • यदि चौथे भाव का स्वामी 3, 6, 8 या 12वें भाव में हो, तो व्यक्ति अपनी पैतृक संपदा को छोड़कर अपने ही दम पर मेहनत करके मकान का निर्माण करेगा।
  • यदि चौथे भाव का स्वामी लग्न में स्थित हो और लग्न का स्वामी चौथे भाव में बैठा हो, तो व्यक्ति अपनी ही कमाई और धन संचय से सुंदर मकान बनाएगा।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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