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Navratri 2026 Maa Shailputri Aarti Live Updates: नवरात्रि का पहला दिन आज, पढ़ें अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि, कथा, पूजा विधि समेत संपूर्ण जानकारी

 Written By: Naveen Khantwal
 Updated : Mar 19, 2026 07:54 pm IST

Navratri 2026 Live Updates: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री के महिषासुरमर्दिनी स्त्रोतम् यानि अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि का पाठ, पूजा विधि, मंत्र आदि के साथ ही पढ़ें पूजा से जुड़ी जरूरी जानकारी।

Chaitra Navratri 2026- India TV Hindi
चैत्र नवरात्रि 2026 Image Source : FREEPIK

Navratri 2026 Live Updates: नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है। माता शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। माता शैलपुत्री स्थिरता और शक्ति का प्रतीक हैं। माता की पूजा करने से भक्तों के जीवन में भी स्थिरता आती है। माता का पूजन आपके मूलाधार चक्र को भी जागृत करता है और जीवन में अच्छे बदलाव आपको देखने को मिलते हैं। आइए ऐसे में अब जान लेते हैं कि नवरात्रि के पहले दिन माता दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा कैसे करनी है और किन मंत्रों का जप करने से आपको लाभ मिलेगा। 

माता शैलपुत्री की पूजा विधि और पूजन मुहूर्त 

नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू हो जाएगा और पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा होगी। माता की पूजा के लिए 19 मार्च की सुबह 06:28 मिनट से 07:55 मिनट तक का समय सबसे शुभ रहेगा। इसी दौरान कलश स्थापना भी की जाएगी। 

मां शैलपुत्री की आरती

शैलपुत्री माँ बैल असवार। करें देवता जय जय कार॥

शिव-शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने न जानी॥

पार्वती तू उमा कहलावें। जो तुझे सुमिरे सो सुख पावें॥
रिद्धि सिद्धि परवान करें तू। दया करें धनवान करें तू॥

सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती जिसने तेरी उतारी॥
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुःख तकलीफ मिटा दो॥

भक्ति भारत आरती घी का सुन्दर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के॥
श्रद्धा भाव से मन्त्र जपायें। प्रेम सहित फिर शीश झुकायें॥

जय गिरराज किशोरी अम्बे। शिव मुख चन्द्र चकोरी अम्बे॥
मनोकामना पूर्ण कर दो। चमन सदा सुख सम्पत्ति भर दो॥

पूजा विधि

  1. मां शैलपुत्री की पूजा करने के लिए आपको सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। इसके बाद स्नान-ध्यान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। 
  2. माता को श्वेत वस्त्र अति प्रिय हैं इसलिए नवरात्रि के पहले दिन सफेद कपड़े पहनकर आपको माता की पूजा करनी चाहिए। सफेद वस्त्र न हों तो पीले वस्त्र भी आप धारण कर सकते हैं। 
  3. इसके बाद आपको गंगाजल से पूजा स्थल को स्वच्छ करना चाहिए और घट स्थापित करना चाहिए। 
  4. घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि के व्रत का संकल्प भी आपको लेना चाहिए। फिर पूजा स्थल पर धूप-दीप जला लें।
  5. संकल्प लेने का बाद माता शैलपुत्री की पूजा शुरू करें।
  6. माता को सिंदूर, अक्षत, सफेद फूल, दूध या घी से बना मिष्ठान आदि आपको अर्पित करना चाहिए। 
  7. पूजा के दौरान माता के मंत्र, कथा आदि का पाठ भी अवश्य करें। 
  8. पूजा के अंत में माता शैलपुत्री की आरती का पाठ अवश्य करें। 

Navratri 2026 Live Updates: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए पूजा विधि, मुहूर्त, मंत्र

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  • 7:04 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री का प्रार्थना मंत्र

    मंत्र- वन्दे वांच्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

  • 6:56 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री की पूजा के दौरान जरूर करें ध्यान मंत्र का जप

    माता शैलपुत्री ध्यान मंत्र- ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः

  • 6:42 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: दुर्गा सप्तशती पाठ के लाभ

    दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से साधक को मानसिक शांति, आत्मबल और आत्मविश्वास मिलता है। 
    यह पाठ जीवन की परेशानियों को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है।
    जो लोग आर्थिक, शारीरिक या मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह पाठ विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। मां दुर्गा की कृपा से जीवन में संतुलन और सुख-समृद्धि बनी रहती है।

  • 6:39 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम

    • दुर्गा सप्तशती पाठ करते समय कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है। 
    • पाठ शुरू करने से पहले मां को प्रणाम करें और उनका ध्यान करें। 
    • पुस्तक को हाथ में पकड़कर पढ़ने की बजाय उसे लाल कपड़े से ढकी चौकी पर रखें।
    • पाठ के दौरान लाल या कुश के आसन पर बैठना शुभ माना जाता है। उच्चारण साफ और संतुलित होना चाहिए। 
    • यदि किसी कारण से पाठ बीच में रोकना पड़े, तो एक अध्याय पूरा करने के बाद ही विराम लें।
    • हर दिन पाठ के अंत में मां से क्षमा याचना करें और पाठ उन्हें समर्पित करें। 
    • साथ ही मन को शुद्ध रखना और किसी के प्रति नकारात्मक भावना न रखना भी जरूरी है।
  • 6:32 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri: पहले दिन की पूजा में करें कवच का पाठ

    ओमकार: मेंशिर: पातुमूलाधार निवासिनी।
    हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥

    श्रींकारपातुवदने लावाण्या महेश्वरी ।
    हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत।

    फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥

  • 6:22 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Mahishasur Mardini Stotram: महिषासुरमर्दिनी स्त्रोतम्

    अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि...

    अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते

    गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।
    भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥

    सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
    त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
    दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २ ॥

    अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते
    शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।
    मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ३ ॥

    अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते
    रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।
    निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ४ ॥

    अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
    चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ।
    दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ५ ॥

    अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
    त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे ।
    दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ६ ॥

    अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
    समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
    शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ७ ॥

    धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
    कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।
    कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ८ ॥

    सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
    कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।
    धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ९ ॥

    जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
    झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।
    नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १० ॥

    अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
    श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।
    सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ ११ ॥

    सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
    विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।
    शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १२ ॥

    अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते
    त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।
    अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १३ ॥

    कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
    सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।
    अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १४ ॥

    करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
    मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते ।
    निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १५ ॥

    कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
    प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे
    जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १६ ॥

    विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
    कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते ।
    सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते ।
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १७ ॥

    पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
    अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
    तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १८ ॥

    कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम्
    भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् ।
    तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १९ ॥

    तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
    किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
    मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २० ॥

    अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
    अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।
    यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते
    जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ २१ ॥

  • 6:16 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के पहले दिन की पूजा में करें श्री दुर्गा स्तुति का पाठ

    श्री दुर्गा स्तुति

    जय जग जननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां ।
    उमा रमा गौरी ब्रह्माणी,
    जय त्रिभुवन सुख कारिणी मां ।।

    हे महालक्ष्मी हे महामाया,
    तुम में सारा जगत समाया ।
    तीन रूप तीनों गुण धारिणी,
    तीन काल त्रैलोक बिहारिणी ।।

    हरि हर ब्रह्मा इंद्रादिक के,
    सारे काज संवारिणी मां ।
    जय जग जननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां

    शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी,
    चंद्रघंटा कूष्मांडा मां ।
    स्कंदमाता कात्यायनी माता,
    शरण तुम्हारी सारा जहां।।

    कालरात्रि महागौरी तुम हो
    सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां
    जय जग जननी आदि भवानी
    जय महिषासुर मारिणी मां

    अजा अनादि अनेका एका,
    आद्या जया त्रिनेत्रा विद्या।
    नाम रूप गुण कीर्ति अनंता,
    गावहिं सदा देव मुनि संता।।

    अपने साधक सेवक जन पर,
    सुख यश वैभव वारिणी मां ।।
    जय जगजननी आदि भवानी,
    जय महिषासुर मारिणी मां।।

    दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां,
    भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां ।
    पाप ताप हर बंध छुड़ाकर जीवो की उद्धारिणी मां,
    जय जग जननी आदि भवानी जय महिषासुर मारिणी मां।।

  • 6:01 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां शैलपुत्री के प्रिय भोग

    नवरात्रि के पहले दिन शाम की पूजा में आपको माता शैलपुत्री के प्रिय भोग उन्हें अर्पित करने चाहिए। आप घी या दूध से बनी खीर माता को अर्पित कर सकते हैं। इसके साथ ही मावे की मिठाई भी माता को अर्पित करना शुभ माना जाता है। 

  • 5:14 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के पहले दिन शाम के वक्त पूजा का शुभ मुहूर्त

    • गोधूलि मुहूर्त- 06:47 PM से 07:11 PM तक
    • सायाह्न सन्ध्या- 06:49 PM से 08:00 PM  तक
  • 5:00 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री की पूजा में अर्पित करें ये फूल

    माता शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि के पहले दिन माता को प्रसन्न करने के लिए चमेली और गुड़हल के फूल आपको अर्पित करने चाहिए। ऐसा करने से माता का आशीर्वाद आपको प्राप्त होता है। 

  • 4:15 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    मां शैलपुत्री के 5 प्रमुख मंदिर

    शैलपुत्री मंदिर, वाराणसी- यहां माता स्वयं प्रकट हुई थीं। 
    शैलपुत्री मंदिर, बारामुला- यह प्राचीन मंदिर माता को समर्पित है क्योंकि मां हिमालय की पुत्री हैं। 
    शैलपुत्री मंदिर, श्रीनगर- इस मंदिर में माता शिला के रूप में एक गुफा के अंदर विराजमान हैं। 
    नवदेवी मंदिर, नौरंगाबाद- इस मंदिर में माता की ज्योति प्रकट हुई थी और यह मंदिर लगभग 100 साल पुराना माना जाता है।
    शैलपुत्री मंदिर, मंडी- इस मंदिर में माता मूर्ति के रूप में विराजमान है और स्थानीय लोग शैलपुत्री को राजमाता भी कहते हैं। 

  • 3:31 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri: मां शैलपुत्री का स्वरूप कैसा है?

    दुर्गा माता का पहला स्वरूप मां शैलपुत्री सौम्य और करुणामयी हैं। इनके दाएं हाथ में त्रिशुल है वहीं बायीं भुजा में कमल सुशोभित है। माता का वाहन वृषभ यानि बैल या नंदी है। माता के मस्तक पर अर्ध चंद्रमा विराजमान है जिसे ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। 

  • 2:53 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026 Live Update: मां शैलपुत्री का भोग

    मां को गाय के घी से बनी खीर या सफेद रंग की मिठाई का भोग लगाएं। पूजा के अंत में मां शैलपुत्री की आरती करें और परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद बाटें।

  • 2:39 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    नवरात्रि की पूजा किस दिशा में बैठकर करें?

    हिंदू मान्यता के अनुसार, यदि कोई कार्य सही समय पर सही दिशा में किया जाए तो उसमें जरूर सफलता प्राप्त होती है। ऐसे में नवरात्रि की पूजा भी शुभ मुहूर्त में करने के साथ ही साथ सही दिशा में बैठकर करनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार, साधक को हमेशा उत्तर-पूर्व दिशा में बैठकर ही नवरात्रि की पूजा करनी चाहिए। वास्तु नियमों के अनुसार, ईशान कोण देवी पूजा के लिए अत्यधिक शुभ और फलदायी माना गया है। इसी प्रकार पूजा करते समय आपका मुख भी उत्तर, पूर्व या फिर उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होना सबसे उत्तम होता है। 

  • 1:53 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    नवरात्रि के दौरान इन चीजों का दान करें

    • नवरात्रि के दौरान किसी विवाहित महिला को लाल चुनरी, लाल साड़ी या कोई शुभ चीज दान करें। 
    • छोटी बच्चियों को भोजन के साथ-साथ किताबें, कॉपियां, पेन आदि सामग्री दान करें। 
    • नवरात्रि के दौरान केले का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। 
    • चावल, आटा, चीनी या सफेद मिठाइयों का दान नवरात्रि के किसी भी दिन किया जा सकता है। 
  • 1:27 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    नवरात्रि पर माता रानी को दिन के हिसाब से लगाएं भोग

    मां शैलपुत्री: नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। उन्हें गाय के शुद्ध घी का भोग लगाना चाहिए। 

    मां ब्रह्मचारिणी: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इन्हें शक्कर, सफेद मिठाई और पंचामृत का भोग बहुत प्रिय है। 

    मां चंद्रघंटा: तीसरे दिन दुखों का नाश करने वाली मां चंद्रघंटा की पूजा होती है। इन्हें दूध से बनी मिठाइयां या खीर अर्पित करनी चाहिए। 

    मां कुष्मांडा: चौथे दिन मां कुष्मांडा को मालपुआ चढ़ाया जाता है। इस भोग को चढ़ाने से बुद्धि तेज होती है और निर्णय शक्ति बढ़ती है।

    मां स्कंदमाता: पांचवें दिन कार्तिकेय जी की माता स्कंदमाता की पूजा होती है। मां को केला विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। 

    मां कात्यायनी: छठे दिन महिषासुर मर्दिनी मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाना चाहिए। 

    मां कालरात्रि: सातवें दिन शत्रुओं का नाश करने वाली मां कालरात्रि को गुड़ चढ़ाया जाता है। 

    मां महागौरी: अष्टमी के दिन मां महागौरी को नारियल का भोग लगाया जाता है। 

    मां सिद्धिदात्री: नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री को तिल, हलवा, पूरी और काले चने का भोग लगाया जाता है। 

  • 12:50 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    काली माता की आरती

    अम्बे तू है जगदम्बे काली

    अम्बे तू है जगदम्बे काली,
    जय दुर्गे खप्पर वाली ।
    तेरे ही गुण गाये भारती,
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

    तेरे भक्त जनो पर,
    भीर पडी है भारी माँ ।
    दानव दल पर टूट पडो,
    माँ करके सिंह सवारी ।
    सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
    अष्ट भुजाओ वाली,
    दुष्टो को पलमे संहारती ।
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

    अम्बे तू है जगदम्बे काली,
    जय दुर्गे खप्पर वाली ।
    तेरे ही गुण गाये भारती,
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

    माँ बेटे का है इस जग मे,
    बडा ही निर्मल नाता ।
    पूत - कपूत सुने है पर न,
    माता सुनी कुमाता ॥
    सब पे करूणा दरसाने वाली,
    अमृत बरसाने वाली,
    दुखियो के दुखडे निवारती ।
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

    अम्बे तू है जगदम्बे काली,
    जय दुर्गे खप्पर वाली ।
    तेरे ही गुण गाये भारती,
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

    नही मांगते धन और दौलत,
    न चांदी न सोना माँ ।
    हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,
    इक छोटा सा कोना ॥
    सबकी बिगडी बनाने वाली,
    लाज बचाने वाली,
    सतियो के सत को सवांरती ।
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

    अम्बे तू है जगदम्बे काली,
    जय दुर्गे खप्पर वाली ।
    तेरे ही गुण गाये भारती,
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

    चरण शरण मे खडे तुम्हारी,
    ले पूजा की थाली ।
    वरद हस्त सर पर रख दो,
    मॉ सकंट हरने वाली ।
    मॉ भर दो भक्ति रस प्याली,
    अष्ट भुजाओ वाली,
    भक्तो के कारज तू ही सारती ।
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

    अम्बे तू है जगदम्बे काली,
    जय दुर्गे खप्पर वाली ।
    तेरे ही गुण गाये भारती,
    ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥

  • 12:32 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    मां दुर्गा की स्तुति: Maa Durga Ki Stuti

    त्वमेवसर्वजननी मूलप्रकृतिरीश्वरी। त्वमेवाद्या सृष्टिविधौ स्वेच्छया त्रिगुणात्मिका॥

    कार्यार्थे सगुणा त्वं च वस्तुतो निर्गुणा स्वयम्। परब्रह्मस्वरूपा त्वं सत्या नित्या सनातनी॥

    तेज:स्वरूपा परमा भक्त अनुग्रहविग्रहा। सर्वस्वरूपा सर्वेशा सर्वाधारा परात्परा॥

    सर्वबीजस्वरूपा च सर्वपूज्या निराश्रया। सर्वज्ञा सर्वतोभद्रा सर्वमङ्गलमङ्गला॥

    सर्वबुद्धिस्वरूपा च सर्वशक्ति स्वरूपिणी। सर्वज्ञानप्रदा देवी सर्वज्ञा सर्वभाविनी।

    त्वं स्वाहा देवदाने च पितृदाने स्वधा स्वयम्। दक्षिणा सर्वदाने च सर्वशक्ति स्वरूपिणी।

    निद्रा त्वं च दया त्वं च तृष्णा त्वं चात्मन: प्रिया। क्षुत्क्षान्ति: शान्तिरीशा च कान्ति: सृष्टिश्च शाश्वती॥

    श्रद्धा पुष्टिश्च तन्द्रा च लज्जा शोभा दया तथा। सतां सम्पत्स्वरूपा श्रीर्विपत्तिरसतामिह॥

    प्रीतिरूपा पुण्यवतां पापिनां कलहाङ्कुरा। शश्वत्कर्ममयी शक्ति : सर्वदा सर्वजीविनाम्॥

    देवेभ्य: स्वपदो दात्री धातुर्धात्री कृपामयी। हिताय सर्वदेवानां सर्वासुरविनाशिनी॥

    योगनिद्रा योगरूपा योगदात्री च योगिनाम्। सिद्धिस्वरूपा सिद्धानां सिद्धिदाता सिद्धियोगिनी॥

    माहेश्वरी च ब्रह्माणी विष्णुमाया च वैष्णवी। भद्रदा भद्रकाली च सर्वलोकभयंकरी॥

    ग्रामे ग्रामे ग्रामदेवी गृहदेवी गृहे गृहे। सतां कीर्ति: प्रतिष्ठा च निन्दा त्वमसतां सदा॥

    महायुद्धे महामारी दुष्टसंहाररूपिणी। रक्षास्वरूपा शिष्टानां मातेव हितकारिणी॥

    वन्द्या पूज्या स्तुता त्वं च ब्रह्मादीनां च सर्वदा। ब्राह्मण्यरूपा विप्राणां तपस्या च तपस्विनाम्॥

    विद्या विद्यावतां त्वं च बुद्धिर्बुद्धिमतां सताम्। मेधास्मृतिस्वरूपा च प्रतिभा प्रतिभावताम्॥

    राज्ञां प्रतापरूपा च विशां वाणिज्यरूपिणी। सृष्टौ सृष्टिस्वरूपा त्वं रक्षारूपा च पालने॥

    तथान्ते त्वं महामारी विश्वस्य विश्वपूजिते। कालरात्रिर्महारात्रिर्मोहरात्रिश्च मोहिनी॥

    दुरत्यया मे माया त्वंयया सम्मोहितं जगत्। ययामुग्धो हि विद्वांश्च मोक्षमार्ग न पश्यति॥

    इत्यात्मना कृतं स्तोत्रं दुर्गाया दुर्गनाशनम्। पूजाकाले पठेद् यो हि सिद्धिर्भवति वांछिता॥

    वन्ध्या च काकवन्ध्या च मृतवत्सा च दुर्भगा। श्रुत्वा स्तोत्रं वर्षमेकं सुपुत्रं लभते ध्रुवम्॥

    कारागारे महाघोरे यो बद्धो दृढबन्धने। श्रुत्वा स्तोत्रं मासमेकं बन्धनान्मुच्यते ध्रुवम्॥

    यक्ष्मग्रस्तो गलत्कुष्ठी महाशूली महाज्वरी। श्रुत्वा स्तोत्रं वर्षमेकं सद्यो रोगात् प्रमुच्यते॥

    पुत्रभेदे प्रजाभेदे पत्‍‌नीभेदे च दुर्गत:। श्रुत्वा स्तोत्रं मासमेकं लभते नात्र संशय:॥

    राजद्वारे श्मशाने च महारण्ये रणस्थले। हिंस्त्रजन्तुसमीपे च श्रुत्वा स्तोत्रं प्रमुच्यते॥

    गृहदाहे च दावागनै दस्युसैन्यसमन्विते। स्तोत्रश्रवणमात्रेण लभते नात्र संशय:॥

    महादरिद्रो मूर्खश्च वर्ष स्तोत्रं पठेत्तु य:। विद्यावान धनवांश्चैव स भवेन्नात्र संशय:॥

  • 12:00 PM (IST)
    Posted by Arti Azad

    मां शैलपुत्री की आरती से पहले करें गणेश जी की आरती

    जय गणेश जय गणेश,

    जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती,

    पिता महादेवा ॥

    एक दंत दयावंत,

    चार भुजा धारी ।

    माथे सिंदूर सोहे,

    मूसे की सवारी ॥

    जय गणेश जय गणेश,

    जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती,

    पिता महादेवा ॥

    पान चढ़े फल चढ़े,

    और चढ़े मेवा ।

    लड्डुअन का भोग लगे,

    संत करें सेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश,

    जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती,

    पिता महादेवा ॥

    अंधन को आंख देत,

    कोढ़िन को काया ।

    बांझन को पुत्र देत,

    निर्धन को माया ॥

    जय गणेश जय गणेश,

    जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती,

    पिता महादेवा ॥

    'सूर' श्याम शरण आए,

    सफल कीजे सेवा ।

    माता जाकी पार्वती,

    पिता महादेवा ॥

    जय गणेश जय गणेश,

    जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती,

    पिता महादेवा ॥

    दीनन की लाज रखो,

    शंभु सुतकारी ।

    कामना को पूर्ण करो,

    जाऊं बलिहारी ॥

    जय गणेश जय गणेश,

    जय गणेश देवा ।

    माता जाकी पार्वती,

    पिता महादेवा ॥

  • 10:59 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    Chaitra Navratri 2026: मां शैलपुत्री की कथा

    मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। यह देवी दुर्गा का पहला स्वरुप माना जाता है। ये ही सती के नाम से भी जानी जाती हैं। 

    पौरािक कथा के अनुसार, एक बार जब प्रजापति ने यज्ञ किया तो इसमें सारे देवताओं को निमंत्रित किया, लेकिन वह अपने जमाई को कुछ खास पसंद नहीं करते थे इसलिए भगवान शंकर को बुलावा नहीं भेजा। सती यज्ञ में जाने के लिए विकल हो उठीं। शंकरजी ने कहा कि हमें निमंत्रित नहीं किया गया है, ऐसे में वहां जाना उचित नहीं है। लेकिन देवी सती का प्रबल आग्रह देखकर शंकरजी ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी। सती जब यज्ञ स्थल पर पहुंचीं तो सिर्फ मां ने ही उन्हें स्नेह दिया। लेकिन बहनों की बातों में व्यंग्य और उपहास के भाव थे। दक्ष ने भी उनके प्रति अपमानजनक वचन कहे। इससे सती को गहरा आघात पहुंचा। 
     
    देवी सती अपने पति का इतना अपमान न सह सकीं और यज्ञ अग्नि में कूदकर खुद को भस्म कर लिया। इस दारुण दुःख से व्यथित होकर शंकर भगवान ने उस यज्ञ का विध्वंस करा दिया। यही सती अगले जन्म में शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में जन्मीं और शैलपुत्री कहलाईं। पार्वती और हेमवती भी इन्हीं के अन्य नाम हैं। शैलपुत्री भी शिवजी की अर्द्धांगिनी बनीं। 

  • 9:44 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    किसका प्रतीक हैं मां शैलपुत्री?

    नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित है, जो मां दुर्गा का पहला स्वरूप हैं। अपने पिछले जन्म में वे माता सती थीं, जो भगवान शिव की पत्नी थीं। बाद में उनका जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ, इसलिए उन्हें शैलपुत्री (पर्वत की पुत्री) कहा जाता है। मां शैलपुत्री शक्ति, स्थिरता और नई शुरुआत का प्रतीक मानी जाती हैं। 

  • 8:20 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    मां शैलपुत्री की पूजा में पहनें इस रंग के कपड़े

    नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री का पूजन किया जाता है। इस दिन पूजा के समय आपको पीले वस्त्र पहनना चाहिए। नवरात्र के पहले दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने से मां शैलपुत्री की विशेष कृपा प्राप्त होती है। पीला रंग ऊर्जा, पॉजिटिविटी और खुशहाली का प्रतीक है। 

  • 7:34 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    इस विधि से करें मां शैलपुत्री की पूजा

    • नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप की आराधना की जाती है। मां शैलपुत्री के पूजन की विधि यहां जानिए। 
    • इसके लिए सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें और घर के पूजा स्थल को सजाएं। 
    • इसके बाद मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। 
    • अब कलश या घट स्थापना करें और उसमें जल, आम के पत्ते और नारियल रखें। 
    • इसके बाद मां की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं। 
    • अब रोली, अक्षत, फूल और धूप-दीप माता को अर्पित करें। 
    • मां शैलपुत्री की आरती के लिए घी का दीपक जलाएं। 
    • अंत में मां की आरती करें और प्रसाद चढ़ाएं। भोग में सफेद रंग की वस्तुएं अवश्य चढ़ाएं। 
  • 6:48 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    मां शैलपुत्री का ध्यान मंत्र

    वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

  • 6:31 AM (IST)
    Posted by Arti Azad

    मां शैलपुत्री का प्रिय भोग

    मां शैलपुत्री को घी का भोग अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान शुद्ध देसी गाय का घी अर्पित करने से भक्तों को आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा आप मिश्री या सफेद रंग की मिठाई भी माता को चढ़ा सकते हैं।

  • 11:56 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता शैलपुत्री का प्रार्थना मंत्र

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए नीचे दिए गए प्रार्थना मंत्र का जप अवश्य करें। 

    मंत्र- वन्दे वांच्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

  • 11:48 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri: नवरात्रि के पहले दिन की पूजा सामग्री

    • कलश  
    • मिट्टी का पात्र 
    • जौ 
    • अक्षत
    • कलावा
    • घी का दीपक
    • मिट्टी (जौ बोने के लिए) 
    • आम के पत्ते
    • नारियल चुनरी के साथ 
    • रोली/सिंदूर 
    • कपूर 
    • अगरबत्ती
    • फूल-माला
    • फल
    • सफेद मिठाई 
  • 11:33 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के पहले दिन करें लौंग और कपूर का ये उपाय

    नवरात्रि के पहले दिन 2 लौंग और एक कपूर को जलाकर पूरे घर में इसका धुआं दिखाएं। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता आएगी और वैवाहिक और करियर के क्षेत्र में आपको शुभ फलों की प्राप्ति आएगी। 

  • 11:20 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री की पूजा में न करें ये गलतियां

    • काले या नीले रंग के वस्त्र न पहनें। 
    • माता को दूर्वा या घास अर्पित न करें। 
    • अखंड ज्योति जलाने वाले हैं तो घटस्थापना से पहले न जलाएं। 
    • पहले दिन का व्रत खत्म होने के बाद लहसुन-प्याज से बना भोजन न खाएं। 
    • माता शैलपुत्री को बासी फल या भोग अर्पित न करें। 
  • 10:45 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के दौरान मंदिर में लौंग का दान करने के लाभ

    नवरात्रि के दौरान अगर आप मंदिर में लौंग का दान करते हैं तो माता दुर्गा की कृपा के साथ ही आपके कष्ट भी दूर होते हैं। राहु केतु से जुड़े बुरे प्रभावों से भी आपको मुक्ति मिलती है। 

  • 10:26 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri Upay: नवरात्रि के पहले दिन करें ये 1 उपाय, मनोकामनाएं होंगी पूरी

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए आपको एक पान के पत्ते में 21 लौंग रखकर मां को अर्पित करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता को प्रसन्न करता है और मां आपकी मनोकामनाएं पूरी कर सकती हैं। 

  • 10:00 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के पहले दिन इन चीजों का दान करना शुभ?

    नवरात्रि के पहले दिन सुहाग की सामग्री, लाल चुनरी, सफेद मिठाइयां, सफेद वस्त्र दान करने से माता शैलपुत्री की कृपा आपको प्राप्त होती है। 

  • 9:46 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता शैलपुत्री का बीज मंत्र क्या है?

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा के दौरान आपको माता के बीज मंत्र 'ॐ ह्रीं शिवायै नम:' का जब भी अवश्य करना चाहिए। इस मंत्र का कम से कम 108 बार जप करने से आपको मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। साथ ही इस मंत्र का जप करने से मां शैलपुत्री की असीम कृपा भी आप पर बरसती है। 

  • 9:17 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री के इस मंत्र का करें 108 बार जप, पूरी होंगी मनोकामनाएं

    नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री के नीचे दिए गए मंत्र का आपको 108 बार जप करने से जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होगी और साथ ही आपको मनोकामनाएं भी पूरी हो सकती हैं। 

    मंत्र-

    वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
    वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

  • 8:40 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन करें इस कवच का पाठ

    ओमकार: मेंशिर: पातुमूलाधार निवासिनी।
    हींकार: पातु ललाटे बीजरूपा महेश्वरी॥

    श्रींकारपातुवदने लावाण्या महेश्वरी ।
    हुंकार पातु हदयं तारिणी शक्ति स्वघृत।

    फट्कार पात सर्वागे सर्व सिद्धि फलप्रदा॥

  • 8:27 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के नौ दिनों में करें दुर्गा चालीसा का पाठ

    श्री दुर्गा चालीसा 

    नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
    नमो नमो अंबे दुःख हरनी ॥ 1 ॥

    निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।
    तिहू लोक फैली उजियारी ॥ 2 ॥

    शशि ललाट मुख महाविशाला ।
    नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥ 3 ॥

    रूप मातु को अधिक सुहावे ।
    दरश करत जन अति सुख पावे ॥ 4 ॥

    तुम संसार शक्ति लय कीना ।
    पालन हेतु अन्न धन दीना ॥ 5 ॥

    अन्नपूर्णा हुयि जग पाला ।
    तुम ही आदि सुंदरी बाला ॥ 6 ॥

    प्रलयकाल सब नाशन हारी ।
    तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ॥ 7 ॥

    शिव योगी तुम्हरे गुण गावेम् ।
    ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावेम् ॥ 8 ॥

    रूप सरस्वती का तुम धारा ।
    दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा ॥ 9 ॥

    धरा रूप नरसिंह को अंबा ।
    परगट भयि फाड के खंबा ॥ 10 ॥

    रक्षा कर प्रह्लाद बचायो ।
    हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥ 11 ॥

    लक्ष्मी रूप धरो जग माहीम् ।
    श्री नारायण अंग समाहीम् ॥ 12 ॥

    क्षीरसिंधु में करत विलासा ।
    दयासिंधु दीजै मन आसा ॥ 13 ॥

    हिंगलाज में तुम्हीं भवानी ।
    महिमा अमित न जात बखानी ॥ 14 ॥

    मातंगी धूमावति माता ।
    भुवनेश्वरी बगला सुखदाता ॥ 15 ॥

    श्री भैरव तारा जग तारिणी ।
    छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥ 16 ॥

    केहरि वाहन सोह भवानी ।
    लांगुर वीर चलत अगवानी ॥ 17 ॥

    कर में खप्पर खडग विराजे ।
    जाको देख काल डर भाजे ॥ 18 ॥

    तोहे कर में अस्त्र त्रिशूला ।
    जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥ 19 ॥

    नगरकोटि में तुम्हीं विराजत ।
    तिहुँ लोक में डंका बाजत ॥ 20 ॥

    शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे ।
    रक्तबीज शंखन संहारे ॥ 21 ॥

    महिषासुर नृप अति अभिमानी ।
    जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥ 22 ॥

    रूप कराल कालिका धारा ।
    सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥ 23 ॥

    पडी भीढ संतन पर जब जब ।
    भयि सहाय मातु तुम तब तब ॥ 24 ॥

    अमरपुरी अरु बासव लोका ।
    तब महिमा सब कहें अशोका ॥ 25 ॥

    ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी ।
    तुम्हें सदा पूजें नर नारी ॥ 26 ॥

    प्रेम भक्ति से जो यश गावेम् ।
    दुःख दारिद्र निकट नहिं आवेम् ॥ 27 ॥

    ध्यावे तुम्हें जो नर मन लायि ।
    जन्म मरण ते सौं छुट जायि ॥ 28 ॥

    जोगी सुर मुनि कहत पुकारी ।
    योग न होयि बिन शक्ति तुम्हारी ॥ 29 ॥

    शंकर आचारज तप कीनो ।
    काम अरु क्रोध जीत सब लीनो ॥ 30 ॥

    निशिदिन ध्यान धरो शंकर को ।
    काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥ 31 ॥

    शक्ति रूप को मरम न पायो ।
    शक्ति गयी तब मन पछतायो ॥ 32 ॥

    शरणागत हुयि कीर्ति बखानी ।
    जय जय जय जगदंब भवानी ॥ 33 ॥

    भयि प्रसन्न आदि जगदंबा ।
    दयि शक्ति नहिं कीन विलंबा ॥ 34 ॥

    मोको मातु कष्ट अति घेरो ।
    तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥ 35 ॥

    आशा तृष्णा निपट सतावेम् ।
    रिपु मूरख मॊहि अति दर पावैम् ॥ 36 ॥

    शत्रु नाश कीजै महारानी ।
    सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥ 37 ॥

    करो कृपा हे मातु दयाला ।
    ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला । 38 ॥

    जब लगि जियू दया फल पावू ।
    तुम्हरो यश मैं सदा सुनावू ॥ 39 ॥

    दुर्गा चालीसा जो गावै ।
    सब सुख भोग परमपद पावै ॥ 40 ॥

  • 8:13 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता शैलपुत्री की पूजा से दूर करें चंद्र दोष

    चैत्र नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माता की पूजा से चंद्र दोष से भी मुक्ति मिलती है। नवरात्रि के पहले दिन माता शैलपुत्री को सफेद फूल चढ़ाकर अगर आप शैलपुत्री के मंत्रों का जप करते हैं तो चंद्रमा कुंडली में मजबूत होते हैं और चंद्रमा से जुड़ी सभी परेशानियों का अंत हो जाता है। 

  • 8:04 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां शैलपुत्री का स्वरूप कैसा है?

    मां शैलपुत्री सौम्य और करुणामयी हैं। इनके दाएं हाथ में त्रिशुल है वहीं बायीं भुजा में कमल सुशोभित है। माता का वाहन वृषभ यानि बैल है। माता के मस्तक पर अर्ध चंद्रमा विराजमान है जिसे ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। 

  • 7:51 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    मां शैलपुत्री को कौन सा पुष्प अर्पित करें?

    मां शैलपुत्री को प्रसन्न करने के लिए चमेली, गुड़हल आदि के फूल आप अर्पित कर सकते हैं। इन पुष्पों को माता को अर्पित करने से आपको जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। 

  • 7:34 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता शैलपुत्री की साधना से कौन सा चक्र जागृत होता है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता शैलपुत्री की पूजा करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है। इस चक्र के जागृत होने से जीवन में संतुलन और ठहराव आता है और साथ ही मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। 

  • 7:19 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता शैलपुत्री को किन चीजों का भोग लगाएं ?

    • माता शैलपुत्री को सफेद चीजों का भोग लगाना शुभ माना जाता है। 
    • देसी घी का भोग माता को लगाने से निरोगी काया प्राप्त होती है। 
    • गाय के दूध से बनी खीर भी माता को अतिप्रिय है। 
    • माता को मलाई, मावे की मिठाई का भोग भी लगा सकते हैं। 
    • मखाने की खीर भी मां शैलपुत्री को अर्पित करना शुभ माना जाता है। 
  • 7:08 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Maa Shailputri Ki Katha: माता शैलपुत्री की कथा

    माता शैलपुत्री को नवदुर्गा में प्रथम स्थान प्राप्त है। माता शैलपुत्री पूर्व जन्म में दक्ष की पुत्री सती थीं।  वहीं अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर में जन्म लेने के कारण इन्हें शैलपुत्री नाम मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रजापति दक्ष ने एक बार एक यज्ञ करवाया था और इसमें शिव-सती को निमंत्रण नहीं दिया। इसके बावजूद भी माता सती भगवान शिव के ना करने के बावजूद भी अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पहुंच गई। जहां प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के सामने ही भगवान शिव को तिरस्कृत करना शुरू कर दिया। पिता का यह व्यवहार देखकर माता सती ने यज्ञ कुंड में ही दाह संस्कार कर दिया। 

    इसके बाद क्रोध में आए भगवान शिव ने दक्ष के इस यज्ञ को ध्वस्त कर दिया। माता सती ने ही अगले जन्म में पर्वतराज हिमालय के घर में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलाईं। शैलपुत्री माता का विवाह भगवान शिव से हुआ था। माता शैलपुत्री की पूजा नवरात्रि के पहले दिन करने से भक्तों की सभी मुरादें पूरी होती हैं और साथ ही वैवाहिक जीवन में भी अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।  

  • 6:52 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां शैलपुत्री की आरती

    मां शैलपुत्री की आरती
    शैलपुत्री मां बैल असवार।
    करें देवता जय जयकार॥ 
    शिव शंकर की प्रिय भवानी।
    तेरी महिमा किसी ने ना जानी॥
    पार्वती तू उमा कहलावे।
    जो तुझे सिमरे सो सुख पावे॥ 
    ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू।
    दया करे धनवान करे तू॥
    सोमवार को शिव संग प्यारी।
    आरती तेरी जिसने उतारी॥ 
    उसकी सगरी आस पुजा दो।
    सगरे दुख तकलीफ मिला दो॥
    घी का सुंदर दीप जला के।
    गोला गरी का भोग लगा के॥ 
    श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं।
    प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं॥
    जय गिरिराज किशोरी अंबे।
    शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे॥ 
    मनोकामना पूर्ण कर दो।
    भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो॥ 

  • 6:38 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पहले दिन इन मंत्रों से करें मां शैलपुत्री को प्रसन्न

    • ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः
    • वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
    • या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    • ह्रीं शिवायै नमः।।
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