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Navratri 2026 Maa Brahmacharini Katha, Mantra Live: माता ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, मुहूर्त, कथा, मंत्र, आरती सबकुछ यहां जानिए

 Written By: Naveen Khantwal
 Updated : Mar 20, 2026 12:26 pm IST

Navratri 2026 Maa Brahmacharini Puja Vidhi, Mantra Live: माता ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। माता को प्रसन्न करने के लिए किस विधि से आपको पूजा करनी चाहिए और किन मंत्रों, आरती आदि का पाठ करने से आपको लाभ होगा आइए जानते हैं।

चैत्र नवरात्रि 2026- India TV Hindi
चैत्र नवरात्रि 2026 Image Source : FREEPIK

Navratri 2026 Maa Brahmacharini Puja Vidhi, Mantra Live: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। साल 2026 में चैत्र नवरात्रि का त्योहार मार्च माह में मनाया जा रहा है और 20 मार्च को नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। माता ब्रह्मचारिणी को संयम और ज्ञान की देवी माना जाता है। ऐसे में माता का आशीर्वाद पाने के लिए भक्तों को नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करनी चाहिए और माता को प्रसन्न करने के लिए आरती, मंत्र आदि का जप करना चाहिए। आइए इस बारे में आपको विस्तार से जानकारी देते हैं।

ब्रह्मचारिणी माता की पूजा विधि (Navratri Ke Dusre Din Ki Puja Vidhi)

  • ब्रह्मचारिणी माता की पूजा से पहले नवरात्रि के दूसरे दिन आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए। 
  • इसके बाद पीले या सफेद रंग के वस्त्र आपको धारण करने चाहिए। 
  • अब पूजा स्थल पर धूप-दीप जलाएं और माता की पूजा आरंभ करें। 
  • माता को सफेद फूल, चंदन, रोली, अक्षत आदि आपको पूजा के दौरान अर्पित करने चाहिए। 
  • पूजा के दौरान माता के मंत्र 'ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः' का कम से कम 108 बार जप करें। 
  • इसके बाद माता की कथा का पाठ करें और अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें। 

माता ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 

माता ब्रह्मचारिणी की पूजा 20 मार्च के दिन की जाएगी। माता की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त नीचे दिए गए हैं। ब्रह्मचारिणी माता की पूजा करने से भक्तों को धैर्य, संयम और ज्ञान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जो लोग वैराग्य के पथ पर अग्रसर होना चाहते हैं उनके लिए भी माता की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। 

  • ब्रह्म मुहूर्त- 05:08 AM से 05:55 AM तक
  • प्रातः सन्ध्या- 05:31 AM से 06:43 ए एम तक
  • अभिजित मुहूर्त- 12:22 PM से 01:10 PM तक
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:47 पी एम से 07:11 PM तक
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:49 PM से 08:01 PM तक

Navratri 2026 Maa Brahmacharini Puja Vidhi, Mantra Live: नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए पूजा विधि, मंत्र, आरती और कथा

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  • 11:57 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Navratri Vrat Mein Kya Khana Chahiye: नवरात्रि व्रत में क्या खाना चाहिए?

    नवरात्रि व्रत में दूध, दही, मखाना, सूखे मेवे, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूरी, साबूदाना खिचड़ी, आलू, शकरकंद, कद्दू और सेंधा नमक का सेवन कर सकते हैं। ताजे फल और सेंधा नमक के साथ बनी चीजें भी खा सकते हैं।

     

  • 11:15 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    माता के भजन

  • 10:35 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Mata rani Ki Aarti: माता रानी की आरती

    जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।

    तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
    जय अम्बे गौरी..

    माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
    उज्जवल से दो‌उ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
    जय अम्बे गौरी..

    कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
    रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
    जय अम्बे गौरी..

    केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
    सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
    जय अम्बे गौरी..

    कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
    कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
    जय अम्बे गौरी..

    शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
    धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
    जय अम्बे गौरी..

    चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
    मधु-कैटभ दो‌उ मारे, सुर भयहीन करे॥
    जय अम्बे गौरी..

    ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
    आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
    जय अम्बे गौरी..

    चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
    बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
    जय अम्बे गौरी..

    तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
    भक्‍तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
    जय अम्बे गौरी..

    भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
    मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
    जय अम्बे गौरी..

    कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
    श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
    जय अम्बे गौरी..

    श्री अम्बेजी की आरती, जो को‌ई नर गावै।
    कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
    जय अम्बे गौरी..

  • 9:39 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    दुर्गा सप्तशती के 7 सबसे शक्तिशाली श्लोक (Durga Saptashati Path 7 Powerful Shlok)

    ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा। 

    बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।

    दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि। 
    दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता।।

    सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। 
    शरण्ये त्र्यंम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते॥

    शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे 
    सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते॥4॥

    सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। 
    भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते॥

    रोगानशेषानपंहसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। 
    त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति॥

    सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। 
    एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम्॥

  • 8:35 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Navratri Ke Dusre Din Kanu Sa Rang Pehane: नवरात्रि के दूसरे दिन का रंग

    नवरात्रि के दूसरे दिन हरा रंग पहनना चाहिए। इस रंग के कपड़े पहनने से आपको माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होगी।

  • 8:04 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    Navratri 5th Day Mantra: माता ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए मंत्र

    • मंत्र- दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
    • मंत्र- या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    • मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।
    • मंत्र- तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्।
    • मंत्र- ॐ दुं दुर्गायै नमः।
  • 7:51 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    मां ब्रह्मचारिणी का भोग (Maa Brahmacharini Bhog)

    • शक्कर
    • मिश्री
    • खीर
    • दूध
  • 7:35 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    मां ब्रह्मचारिणी ध्यान मंत्र

    वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
    जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
    गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
    धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालङ्कार भूषिताम्॥
    परम वन्दना पल्लवाधरां कान्त कपोला पीन।
    पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

  • 7:12 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    मां ब्रह्मचारिणी मंत्र (​Maa Brahmacharini Mantra)

    • ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः
    • या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  • 6:49 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि के दूसरे दिन का रंग (Navratri 2nd Day Colour)

    हरा - नवरात्रि के दूसरे दिन का रंग हरा है। ये रंग प्रकृति, विकास, शान्ति और स्थिरता का प्रतीक है। शुक्रवार को इस रंग का उपयोग करने से देवी की खास कृपा प्राप्त होगीहरा रंग नई शुरुआत का भी प्रतीक होता है।

  • 6:26 AM (IST)
    Posted by Laveena Sharma

    नवरात्रि के दूसरे दिन की कथा

    पौराणिक कथा के अनुसार माता ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर में हुआ था। नारद जी के उपदेश को सुनकर माता ने भोलेनाथ को अपने पति के रूप में पाने के लिए माता ने कठोर तप किया। माना जाता है कि तपस्या के पहले हजार वर्षों तक माता ने सिर्फ फल और फूल खाकर जीवन बिताया था। इसके बाद सौ वर्षों तक मां केवल जमीन पर रहीं। इसके बाद धूप, वर्षा आदि की परवाह किए बिना माता ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या जारी रखी। इसके बाद कई वर्षों तक माता ने केवल बिल्वपत्र खाकर जीवन यापन किया और भगवान शिव की आराधना में लीन रहीं। तपस्या के अंतिम पड़ाव में आते-आते माता ने बिल्वपत्र का त्याग भी कर दिया। माता ने पत्तों का त्याग भी तपस्या के दौरान किया था इसलिए उन्हें अपर्णा भी कहा जाता है। इसके बाद निर्जला रहकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए माता ने तपस्या जारी रखी। माता की कठोर तपस्या को देखते हुए ही इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से पुकारा जाता है। 

    माता ब्रह्माचारिणी की तपस्या से प्रसन्न होकर एक ऋषि का रूप बनाकर भगवान शिव माता के पास पहुंचे और माता की परीक्षा ली। हालांकि, ऋषि के रूप में आए भगवान शिव की बात माता ब्रह्माचारिणी ने नहीं सुनी और अपनी तपस्या जारी रखी। तब ऋषि के रूप में आए शिव जी ने उनसे कहा कि शिव तुम्हें पति के रूप में अवश्य मिलेंगे। अंत में भगवान शिव ने माता को पत्नी के रूप में स्वीकार किया और माता ब्रह्मचारिणी की तपस्या सफल हुई। माता ब्रह्मचारिणी तपस्वी, आत्मसंयमी और दृढ़ संकल्प थीं। यही वजह है कि उनकी आराधना वालों को भी संयम और आत्मबल प्राप्त होता है। 

  • 11:58 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    माता ब्रह्मचारिणी की पूजा से क्या लाभ प्राप्त होते हैं?

    माता ब्रह्माचारिणी की पूजा से मानसिक शांति और संयम भक्त प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। माता की कृपा से एकाग्रता और ज्ञान बढ़ता है और कठिन समय में भी साहस बना रहता है। इसके साथ ही माता की पूजा से मंगल दोष भी दूर होता है।  

  • 11:03 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri: नवरात्रि के दूसरे दिन करें दुर्गा चालीसा का पाठ

    श्री दुर्गा चालीसा

    नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
    नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
     
    निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
    तिहूं लोक फैली उजियारी॥
     
    शशि ललाट मुख महाविशाला।
    नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
     
    रूप मातु को अधिक सुहावे।
    दरश करत जन अति सुख पावे॥
     
    तुम संसार शक्ति लै कीना।
    पालन हेतु अन्न धन दीना॥
     
    अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
    तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
     
    प्रलयकाल सब नाशन हारी।
    तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
     
    शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
    ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
     
    रूप सरस्वती को तुम धारा।
    दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
     
    धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
    परगट भई फाड़कर खम्बा॥
     
    रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
    हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
     
    लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
    श्री नारायण अंग समाहीं॥
     
    क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
    दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
     
    हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
    महिमा अमित न जात बखानी॥
     
    मातंगी अरु धूमावति माता।
    भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
     
    श्री भैरव तारा जग तारिणी।
    छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
     
    केहरि वाहन सोह भवानी।
    लांगुर वीर चलत अगवानी॥
     
    कर में खप्पर खड्ग विराजै।
    जाको देख काल डर भाजै॥
     
    सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
    जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
     
    नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
    तिहुंलोक में डंका बाजत॥
     
    शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
    रक्तबीज शंखन संहारे॥
     
    महिषासुर नृप अति अभिमानी।
    जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
     
    रूप कराल कालिका धारा।
    सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
     
    परी गाढ़ संतन पर जब जब।
    भई सहाय मातु तुम तब तब॥
     
    अमरपुरी अरु बासव लोका।
    तब महिमा सब रहें अशोका॥
     
    ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
    तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
     
    प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
    दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
     
    ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
    जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
     
    जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
    योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
     
    शंकर आचारज तप कीनो।
    काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
     
    निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
    काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
     
    शक्ति रूप का मरम न पायो।
    शक्ति गई तब मन पछितायो॥
     
    शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
    जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
     
    भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
    दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
     
    मोको मातु कष्ट अति घेरो।
    तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
     
    आशा तृष्णा निपट सतावें।
    रिपू मुरख मौही डरपावे॥
     
    शत्रु नाश कीजै महारानी।
    सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
     
    करो कृपा हे मातु दयाला।
    ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
     
    जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
    तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥
     
    दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
    सब सुख भोग परमपद पावै॥
     
    देवीदास शरण निज जानी।
    करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥

  • 10:22 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    नवरात्रि के दूसरे दिन न करें ये गलतियां

    नवरात्रि का दूसरा दिन माता शैलपुत्री को समर्पित है। मां संयम, दृढ़ संकल्प और वैराग्य का प्रतीक मानी जाती हैं। इसलिए नवरात्रि के दूसरे दिन आपको माता की पूजा के साथ ही पवित्रता का भी ध्यान रखा चाहिए। इस दिन अपशब्द बोलने से बचें। नकारात्मक विचारों को खुद पर हावी न होने दें और संयम न खोएं। 

  • 9:59 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप कैसा है?

    माता ब्रह्मचारिणी श्वेत वर्ण की हैं और श्वेत ही वस्त्र धारण करती हैं। माता के दाहिने हाथ में जप के लिए माला और बाएं हाथ में एक कमंडल विराजमान है। माता को संयम, तपस्या और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है।

  • 9:20 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri: माता ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए लगाएं इन चीजों का भोग

    माता दुर्गा के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री और गुड़ का भोग लगाना शुभ माना जाता है। आप इन पदार्थों से बने भोज्य पदार्थ भी माता को अर्पित कर सकते हैं। 

  • 9:00 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मंगल दोष से मुक्ति के लिए नवरात्रि के दूसरे दिन करें ये उपाय

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। इसलिए नवरात्रि के दूसरे दिन माता ब्रह्मचारिणी की पूजा के साथ ही आपको दूध, दही, घी, गंगाजल और शहद का मिश्रण बनाकर इसका दान करना चाहिए। ऐसा करने से मंगल दोष दूर होता है और पारिवारिक जीवन में सुख समृद्धि आती है। 

  • 8:08 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: माता ब्रह्मचारिणी को प्रसन्न करने के लिए करें इन मंत्रों का जप

    तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्। ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्।
    या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।
    ॐ दुं दुर्गायै नमः।

  • 7:52 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri 2026: मां ब्रह्मचारिणी की व्रत कथा

    पौराणिक कथा के अनुसार माता ब्रह्मचारिणी का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर में हुआ था। नारद जी के उपदेश को सुनकर माता ने भोलेनाथ को अपने पति के रूप में पाने के लिए माता ने कठोर तप किया। माना जाता है कि तपस्या के पहले हजार वर्षों तक माता ने सिर्फ फल और फूल खाकर जीवन बिताया था। इसके बाद सौ वर्षों तक मां केवल जमीन पर रहीं। इसके बाद धूप, वर्षा आदि की परवाह किए बिना माता ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या जारी रखी। इसके बाद कई वर्षों तक माता ने केवल बिल्वपत्र खाकर जीवन यापन किया और भगवान शिव की आराधना में लीन रहीं। तपस्या के अंतिम पड़ाव में आते-आते माता ने बिल्वपत्र का त्याग भी कर दिया। माता ने पत्तों का त्याग भी तपस्या के दौरान किया था इसलिए उन्हें अपर्णा भी कहा जाता है। इसके बाद निर्जला रहकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए माता ने तपस्या जारी रखी। माता की कठोर तपस्या को देखते हुए ही इन्हें ब्रह्मचारिणी नाम से पुकारा जाता है। 

    माता ब्रह्माचारिणी की तपस्या से प्रसन्न होकर एक ऋषि का रूप बनाकर भगवान शिव माता के पास पहुंचे और माता की परीक्षा ली। हालांकि, ऋषि के रूप में आए भगवान शिव की बात माता ब्रह्माचारिणी ने नहीं सुनी और अपनी तपस्या जारी रखी। तब ऋषि के रूप में आए शिव जी ने उनसे कहा कि शिव तुम्हें पति के रूप में अवश्य मिलेंगे। अंत में भगवान शिव ने माता को पत्नी के रूप में स्वीकार किया और माता ब्रह्मचारिणी की तपस्या सफल हुई। माता ब्रह्मचारिणी तपस्वी, आत्मसंयमी और दृढ़ संकल्प थीं। यही वजह है कि उनकी आराधना वालों को भी संयम और आत्मबल प्राप्त होता है। 

  • 7:09 PM (IST)
    Posted by Naveen Khantwal

    Chaitra Navratri Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की आरती

    जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।
    जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।
    ब्रह्मा जी के मन भाती हो।
    ज्ञान सभी को सिखलाती हो।
    ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।
    जिसको जपे सकल संसारा।
    जय गायत्री वेद की माता।
    जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।
    कमी कोई रहने न पाए।
    कोई भी दुख सहने न पाए।
    उसकी विरति रहे ठिकाने।
    जो तेरी महिमा को जाने।
    रुद्राक्ष की माला ले कर।
    जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।
    आलस छोड़ करे गुणगाना।
    मां तुम उसको सुख पहुंचाना।
    ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।
    पूर्ण करो सब मेरे काम।
    भक्त तेरे चरणों का पुजारी।
    रखना लाज मेरी महतारी।

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