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Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी को क्यों कहते हैं भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी? जानिए इसका महत्व और पौराणिक इतिहास

 Written By: Laveena Sharma @laveena1693
 Published : Jun 24, 2026 08:11 am IST,  Updated : Jun 24, 2026 10:12 am IST

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी साल की सबसे बड़ी एकादशी कहलाती है और इस साल ये एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी। कहते हैं इस एकादशी व्रत को करने मात्र से ही साल की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है। चलिए जानते हैं क्या है इसका धार्मिक महत्व और पौराणिक इतिहास।

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निर्जला एकादशी का महत्व Image Source : INDIA TV

Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी भी कहते हैं। इस एकादशी पर अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग कर दिया जाता है। बता दें इस एकादशी व्रत में व्रती एकादशी के सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय होने तक निर्जला व्रत रहता है। ये एकादशी साल में आने वाली 24 एकादशियों में सबसे बड़ी एकादशी मानी जाती है। चलिए जानते हैं इसका महत्व और पौराणिक इतिहास।

निर्जला एकादशी को क्यों कहते हैं भीमसेनी एकादशी?

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये व्रत पांडव पुत्र भीमसेन ने रखा था। पौराणिक कथा अनुसार, पांडव परिवार में माता कुंती, धर्मराज युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी सभी साल की 24 एकादशियों पर नियमपूर्वक व्रत रखते थे और वे भीमसेन को भी ये व्रत रखने के लिए कहते थे। लेकिन भीम अपनी भूख को नियंत्रित नहीं कर पाते थे, जिस कारण से उनके लिए महीने में दो बार उपवास रखना असंभव था। अपनी इस समस्या के समाधान के लिए भीम महर्षि वेदव्यास के पास गए। तब महर्षि व्यास ने भीम से कहा कि यदि तुम वर्ष भर की सभी एकादशियों का व्रत रख पाने में सक्षम नहीं हो तो तुम केवल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रहो। ध्यान रहे कि इस व्रत में तुम्हें आचमन के अलावा जल की एक बूंद भी मुख में नहीं डालनी है। यदि तुम इस एक दिन सच्चे मन से निर्जला व्रत रहो तो तुम्हें वर्ष भर की सभी 24 एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त हो जाएगा। व्यास जी के कहे अनुसार भीम ने पूरी दृढ़ता से ये व्रत किया और साल की सभी एकादशियों का फल एक साथ प्राप्त किया। कहते हैं तभी से इस तिथि को भीमसेनी एकादशी या पांडव एकादशी कहा जाने लगा।

निर्जला एकादशी का धार्मिक महत्व

  • धार्मिक मान्यताओं अनुसार इस व्रत को करने से मनुष्य को उसके सभी पापों से छुटकारा मिल जाता है।
  • ये व्रत करने वाले व्यक्ति को वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
  • इस व्रत को करने से सालभर की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है।
  • ये व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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